'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' स्टारकास्ट रीयूनियन: स्मृति ईरानी समेत पुरानी टीम रीवा बब्बर के घर मिली
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में हाल ही में टेलीविज़न की यादगार धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की स्टारकास्ट का एक भावनात्मक रीयूनियन हुआ, जहाँ दशकों पुरानी दोस्ती एक बार फिर तरोताज़ा हुई। अभिनेत्री अपर्णा मेहता ने इस खास मिलन की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा कीं, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गईं। यह रीयूनियन ऐसे समय में हुआ जब शो का दूसरा सीज़न अपने अंतिम पड़ाव पर है।
रीवा बब्बर के घर जमी पुरानी 'क्योंकि' गैंग
यह मिलन अभिनेत्री रीवा बब्बर के घर पर आयोजित हुआ। अपर्णा मेहता ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'क्योंकि' गैंग के साथ रीवा बब्बर के प्यारे घर पर — हमेशा की तरह हंसी, अच्छे खाने और यादगार पलों से भरी एक शाम। तस्वीरों में स्मृति ईरानी, गौरी प्रधान, रितु चौधरी, कमलिका गुहा ठाकुरता, रक्षंदा खान, हितेन तेजवानी, सुमित सचदेव और अन्य कई कलाकार एक साथ नज़र आए।
तुलसी विरानी का आइकॉनिक किरदार निभाने वाली स्मृति ईरानी अपने पुराने सह-कलाकारों के साथ तस्वीरों में मुस्कुराती दिखीं। गौरी प्रधान ने शो में नंदिनी विरानी और अपर्णा मेहता ने सविता विरानी का किरदार निभाया था।
शो का इतिहास और विरासत
टेलीविज़न इतिहास का यह अध्याय 3 जुलाई 2000 को स्टार प्लस पर शुरू हुआ था। एकता कपूर और शोभा कपूर (बालाजी टेलीफिल्म्स) द्वारा निर्मित इस धारावाहिक में स्मृति ईरानी ने तुलसी वीरानी और अमर उपाध्याय व रोनित रॉय ने मिहिर वीरानी की भूमिका निभाई थी।
शो की कहानी गुजराती परिवार 'वीरानी परिवार' — जिसे 'शांति निकेतन' के नाम से जाना जाता था — के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जिसमें एक आदर्श बहू तुलसी परिवार की हर चुनौती को धैर्य और संयम से संभालती है। तुलसी का किरदार भारतीय टेलीविज़न के सबसे प्रतिष्ठित और पहचाने जाने वाले किरदारों में गिना जाता है।
दूसरा सीज़न और फिनाले की तैयारी
दर्शकों के अपार प्यार और नॉस्टेल्जिया की लहर को देखते हुए निर्माताओं ने 2025 में 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' शुरू किया, जिसमें स्मृति ईरानी समेत मूल स्टारकास्ट के कई सदस्य एक बार फिर वापस लौटे। यह दूसरा सीज़न अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका है और इसका आखिरी एपिसोड 20 अक्टूबर को प्रसारित किया जाएगा।
यह रीयूनियन महज़ एक पार्टी नहीं था — यह उन कलाकारों का मेल था जिन्होंने मिलकर भारतीय टेलीविज़न के एक युग को परिभाषित किया। फिनाले के साथ एक और अध्याय बंद होने से पहले, यह शाम उन पुरानी यादों की एक मीठी विदाई की तरह थी।