गोवा में दुर्गा पूजा: लिसा रे ने जुड़वां बेटियों संग 'आमंदर पूजा' बाड़ी में मनाया महाष्ठमी का उत्सव
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री लिसा रे ने महाष्टमी के अवसर पर गोवा में बंगाली समुदाय द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा उत्सव की भावपूर्ण झलकियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि गोवा के एक पड़ोसी गाँव में बंगाली समुदाय ने मिलकर 'आमंदर पूजा' नाम से एक खूबसूरत 'पूजा बाड़ी' तैयार की, जहाँ उत्सव के सभी पारंपरिक रंग देखने को मिले।
महाष्टमी पर 'छोटी देवियों' की प्रस्तुति
लिसा ने अपनी जुड़वां बेटियों को प्यार से 'छोटी देवियाँ' कहते हुए बताया कि महाष्टमी के दिन वे गोवा के कई पंडालों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देने में व्यस्त रहीं। उनकी बेटियों ने प्रदर्शन कला और संस्कृति अकादमी, गोवा के साथ मिलकर विभिन्न पंडालों में परफॉर्म किया।
लिसा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'शुभ महाष्टमी। इस पूजा में मैं अपनी छोटी देवियों के साथ व्यस्त रही, जिन्होंने प्रदर्शन कला और संस्कृति अकादमी, गोवा के साथ गोवा के कई पंडालों में परफॉर्म किया। माँ के लिए की गई इस प्रस्तुति में अपना पूरा दिल और जान लगाने के लिए मौमिता पाल को धन्यवाद।' वीडियो में दोनों बेटियाँ पीले कपड़ों में अन्य बच्चों के साथ नृत्य करती नज़र आती हैं।
गोवा में बंगाली समुदाय का 'आमंदर पूजा' आयोजन
लिसा के अनुसार, गोवा के पड़ोसी गाँव में बंगाली समुदाय द्वारा तैयार की गई 'आमंदर पूजा' बाड़ी में उत्सव के तमाम रंग एक साथ देखने को मिले — बच्चों की खिलखिलाहट और भागदौड़, स्वादिष्ट भोग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामुदायिक जुड़ाव, भक्ति और भावनाओं का सुंदर समागम।
उन्होंने लिखा, 'इस साल, गोवा के एक पास के गाँव में बंगाली समुदाय ने एक बहुत ही सुंदर पूजा बाड़ी — आमंदर_पूजा — तैयार की है। इसमें इस उत्सव के सबसे खास पहलू, बच्चों की भागदौड़, स्वादिष्ट भोग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामुदायिक जुड़ाव, भक्ति और भावनाएं, देखने को मिलते हैं।'
बंगाली जड़ों से गहरा जुड़ाव
लिसा रे ने इससे पहले भी अपनी बंगाली विरासत के प्रति गहरे लगाव को सार्वजनिक रूप से अभिव्यक्त किया है। उन्होंने साझा किया कि वे टोरंटो में दुर्गा पूजा मनाते हुए बड़ी हुईं, और बाद में हांगकांग, दुबई तथा जहाँ भी जीवन ले गया, वहाँ माँ दुर्गा से मिलती रहीं।
उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में लिखा, 'ढाक की आवाज़ — एक ऐसी जानी-पहचानी लय जो यादों से भी कहीं गहरे उतर जाती है। और बस इसी तरह, माँ यहाँ आ जाती हैं। इस साल गोवा में षष्ठी, बोधन और अधिवास मनाने को लेकर बहुत खुश हूँ। मेरे नए घर में बंगाल का एक छोटा सा हिस्सा। शहर अलग हैं, समुदाय अलग हैं, लेकिन दिल में उठने वाली वह जानी-पहचानी भावना बिल्कुल एक जैसी है।'
उत्सव का समापन 'शुभ शारदीया' के साथ
लिसा ने अपने फॉलोअर्स को सोशल मीडिया के जरिए उत्सव की तस्वीरें और वीडियो दिखाते हुए सभी को शुभ शारदीया की बधाई दी। उन्होंने अपने दोस्तों द्वारा साझा किए गए वीडियो में फॉलोअर्स से आग्रह किया कि वे ध्यान से देखें — पीले कपड़ों में उनकी जुड़वां बेटियाँ नृत्य करती दिखाई देंगी। गोवा में बंगाली समुदाय की यह एकता दर्शाती है कि सांस्कृतिक परंपराएँ भौगोलिक सीमाओं से परे भी जीवंत बनी रहती हैं।