19 अक्टूबर 2026
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महानवमी पर CM रेखा गुप्ता ने किया कन्या पूजन, बोलीं — बेटियों का सशक्तीकरण ही सामाजिक प्रगति की नींव

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महानवमी पर CM रेखा गुप्ता ने किया कन्या पूजन, बोलीं — बेटियों का सशक्तीकरण ही सामाजिक प्रगति की नींव

सारांश

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महानवमी पर कन्या पूजन कर बेटियों के सशक्तीकरण को सामाजिक प्रगति की नींव बताया। इस बार अष्टमी और नवमी एक ही दिन 19 अक्टूबर को पड़ीं, जिससे पंचांग और तिथि को लेकर भक्तों में उत्सुकता और उलझन दोनों रहीं।

मुख्य बातें

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने 19 अक्टूबर 2026 को महानवमी पर परिवार संग कन्या पूजन किया।
उन्होंने कहा — बेटियों का सम्मान, शिक्षा और सशक्तीकरण समाज की सच्ची प्रगति के लिए अनिवार्य है।
दिल्ली सरकार ने हर बेटी की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस वर्ष अष्टमी और महानवमी एक ही दिन पड़ीं; नई दिल्ली में अष्टमी तिथि सुबह 10:50 बजे समाप्त हुई।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, एक ही दिन दोनों तिथियों के अनुष्ठान — अष्टमी पूजा, संधि पूजा और नवमी प्रार्थना — किए जा सकते हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को महानवमी के पावन अवसर पर अपने परिवार के साथ कन्या पूजन किया और मां दुर्गा से सभी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटियों का सम्मान, शिक्षा और सशक्तीकरण सामाजिक प्रगति की असली बुनियाद है।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि बेटियाँ दैवीय शक्ति का साक्षात् स्वरूप होती हैं। उन्होंने कहा, 'समाज की सच्ची प्रगति के लिए बेटियों का सम्मान करना, उन्हें शिक्षित करना, उनकी सुरक्षा करना और उन्हें सशक्त बनाना बहुत ज़रूरी है।' उनके अनुसार, हर बेटी को आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के समान अवसर देना ही कन्या पूजन की असली भावना है।

गुप्ता ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार हर बेटी की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिला सशक्तीकरण नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

कन्या पूजन की परंपरा

कन्या पूजन नवरात्रि के दौरान की जाने वाली एक प्राचीन और महत्त्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें छोटी बच्चियों को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। भक्त श्रद्धापूर्वक उनके पैर धोते हैं, प्रार्थना करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। यह परंपरा स्त्री-शक्ति के प्रति आस्था और सामाजिक सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।

अष्टमी-नवमी एक ही दिन — क्यों हुई उलझन

इस वर्ष भारत के कई हिस्सों में दुर्गा अष्टमी और महानवमी एक ही कैलेंडर दिन — 19 अक्टूबर 2026 — को पड़ीं, जिससे भक्तों में व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के समय को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। हिंदू पर्वों का निर्धारण सामान्य 24 घंटे वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर के बजाय तिथियों (चंद्र दिनों) के आधार पर होता है, इसलिए दो महत्त्वपूर्ण पर्व कभी-कभी एक ही दिन पड़ सकते हैं।

कई पंचांगों के अनुसार, नई दिल्ली में अष्टमी तिथि सोमवार को सुबह लगभग 10:50 बजे समाप्त हुई और उसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो गई। गौरतलब है कि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में भक्त उसी दिन दोनों तिथियों से जुड़े अनुष्ठान कर सकते हैं — सुबह अष्टमी की पूजा, दोनों तिथियों के मिलन बिंदु पर संधि पूजा और फिर नवमी की प्रार्थनाएँ।

अष्टमी और नवमी का धार्मिक महत्व

नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी को देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है, जिन्हें पवित्रता, शांति और क्षमा का प्रतीक माना जाता है। वहीं महानवमी पर देवी के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना होती है, जिनके बारे में मान्यता है कि वे आध्यात्मिक सिद्धियाँ और ज्ञान प्रदान करती हैं।

आने वाले दिनों में विजयादशमी (दशहरा) के साथ नवरात्रि पर्व का समापन होगा, और दिल्ली समेत देशभर में धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा बजटीय आवंटन और ज़मीनी क्रियान्वयन में है। दिल्ली में महिला सुरक्षा और शिक्षा के मोर्चे पर अभी भी गंभीर चुनौतियाँ हैं, और केवल प्रतीकात्मक आयोजनों से परे नीतिगत जवाबदेही ज़रूरी है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM रेखा गुप्ता ने महानवमी पर कन्या पूजन क्यों किया?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 19 अक्टूबर 2026 को महानवमी के अवसर पर परंपरागत कन्या पूजन कर बेटियों के प्रति सम्मान और दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कन्या पूजन नवरात्रि की एक प्राचीन परंपरा है जिसमें छोटी बच्चियों को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।
कन्या पूजन की परंपरा क्या है?
कन्या पूजन नवरात्रि के दौरान की जाने वाली धार्मिक परंपरा है, जिसमें छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन कराया जाता है और आशीर्वाद लिया जाता है। यह परंपरा स्त्री-शक्ति के प्रति आस्था का प्रतीक है।
2026 में अष्टमी और नवमी एक ही दिन क्यों पड़ीं?
हिंदू पर्वों का निर्धारण चंद्र तिथियों के आधार पर होता है, न कि 24 घंटे वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार। इस वर्ष नई दिल्ली में अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:50 बजे समाप्त हुई और उसके बाद नवमी प्रारंभ हुई, जिससे दोनों पर्व एक ही कैलेंडर दिन पर आ गए।
जब अष्टमी और नवमी एक दिन हों तो पूजा कैसे करें?
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में भक्त उसी दिन सुबह अष्टमी की पूजा, दोनों तिथियों के मिलन बिंदु पर संधि पूजा और फिर नवमी की प्रार्थनाएँ कर सकते हैं। इस प्रकार एक ही दिन दोनों तिथियों के अनुष्ठान संपन्न किए जा सकते हैं।
दिल्ली सरकार बेटियों के सशक्तीकरण के लिए क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली सरकार हर बेटी की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, इस अवसर पर कोई नई विशेष योजना की घोषणा नहीं की गई।
राष्ट्र प्रेस
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