दिव्यांका त्रिपाठी का मातृत्व के बाद वापसी पर सच: 'बाउंस बैक जैसा कुछ नहीं होता, शरीर में दर्द होता है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी ने 13 अक्टूबर 2026 को जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद काम पर लौटने की चुनौतियों को लेकर खुलकर बात की। वे इन दिनों पति विवेक दहिया के साथ कपल रियलिटी शो 'पति पत्नी और पंगा' में नज़र आ रही हैं और उन्होंने स्पष्ट किया कि मातृत्व के बाद की 'जादुई वापसी' की धारणा असलियत से कोसों दूर है।
मां बनने के बाद काम पर लौटना — असली चुनौती
दिव्यांका ने बताया कि बच्चों को कुछ मिनट के लिए भी अकेला छोड़ना उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा, 'इस स्टेज पर बच्चों को संभालना आसान है, क्योंकि अभी बस वे सोते और खाते हैं, लेकिन मुझे पता है कि अब उनके घुटनों के बल चलने का समय आएगा। मेरे लिए तो उन्हें दो से चार मिनट के लिए भी अकेला छोड़ना मुश्किल है।' यही वजह है कि उन्हें बच्चों को शूटिंग सेट पर भी साथ ले जाना पड़ता है।
'बाउंस बैक' का मिथक तोड़ा
दिव्यांका ने उस आम धारणा पर सवाल उठाया जिसमें यह माना जाता है कि महिलाएं — खासकर सेलेब्रिटी — प्रसव के बाद आसानी से 'बाउंस बैक' कर लेती हैं। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा कहती हूं कि महिलाएं ऐसे ही बाउंस बैक नहीं कर लेतीं। भले ही हम एक्ट्रेस कैमरे के सामने हंसती-मुस्कराती दिखती हैं, लेकिन शरीर के अंदर दर्द, थकान और दिमाग में कन्फ्यूजन जैसा रहता है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर मातृत्व के बाद की 'परफेक्ट वापसी' को लेकर महिलाओं पर अदृश्य दबाव बढ़ता जा रहा है।
महिलाओं की तुलना न करने की अपील
अभिनेत्री ने ज़ोर देकर कहा कि हर महिला की परिस्थितियाँ अलग होती हैं और किसी एक के अनुभव को दूसरे पर थोपना उचित नहीं। उन्होंने कहा, 'मैं ये इसलिए कह रही हूं ताकि कोई भी एक महिला की तुलना दूसरी से न करे और ये न कहे कि 'अरे दिव्यांका ने कर लिया।' नहीं, ये सबके लिए मुश्किल है। हर कोई अपने हिसाब से काम पर लौटता है।' गौरतलब है कि यह बयान उन लाखों महिलाओं की स्थिति को रेखांकित करता है जो प्रसव के बाद काम और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में जूझती हैं।
पति और परिवार का सहारा
दिव्यांका ने खुलासा किया कि उनकी इस यात्रा में पति विवेक दहिया और परिवार की भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत हिम्मत दिखा रही हूं, लेकिन इसके पीछे की वजह विवेक हैं — वे हर पल मेरे साथ खड़े रहते हैं। मेरी फैमिली मुझसे कहती है, 'तू कर लेगी। इंतजार करती रही तो कभी शुरू ही नहीं कर पाएगी।'' उन्होंने यह भी जोड़ा कि काम करना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।
काम और मानसिक स्वास्थ्य का रिश्ता
दिव्यांका ने स्वीकार किया कि काम पर लौटना उनकी मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा फैसला था। उनके अनुसार, एक माँ के लिए घर पर रहना भी उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है जितना काम करना। यह नज़रिया मातृत्व और पेशेवर जीवन के बीच के द्वंद्व को एक नई रोशनी में देखने की ज़रूरत की ओर इशारा करता है।