26 जून 2026
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एक्टिंग में लीड रोल न होते हुए भी मकरंद देशपांडे का जादू दर्शकों के दिलों पर छाया

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एक्टिंग में लीड रोल न होते हुए भी मकरंद देशपांडे का जादू दर्शकों के दिलों पर छाया

सारांश

मकरंद देशपांडे, जो कभी मुख्य भूमिका में नहीं दिखे, ने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया है। उनके छोटे किरदार भी यादगार रहे हैं। जानिए उनकी अदाकारी और थिएटर के प्रति जुनून के बारे में।

मुख्य बातें

मकरंद देशपांडे का जन्म 6 मार्च 1966 को महाराष्ट्र के दहानू में हुआ।
उन्होंने 1988 में फ़िल्म 'कयामत से कयामत तक' से करियर की शुरुआत की।
उनके नाटक 'सर सर सरला', 'जोक', और 'मां इन ट्रांजिट' दर्शकों द्वारा सराहे गए।
मकरंद ने पांच फ़िल्में निर्देशित की हैं।
टीवी शोज़ और वेब सिरीज़ में भी उन्होंने अपने अभिनय का जादू बिखेरा।

मुंबई, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड में ऐसे कई अदाकार हैं जिन्होंने कभी भी मुख्य भूमिका में नहीं दिखे, लेकिन उनकी अदाकारी और हर किरदार को जीवंत बनाने की कला ने उन्हें दर्शकों के दिलों में खास स्थान दिलाया है। इनमें से एक नाम है मकरंद देशपांडे का... जो फ़िल्मों, नाटकों और वेब सीरीज़ में अपने अनोखे अंदाज के लिए प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने कभी भी लीड रोल नहीं किया, लेकिन उनकी छोटी भूमिकाएँ भी दर्शकों को बेहद पसंद आईं। उनके अभिनय की क्षमता और थिएटर के प्रति जुनून ने उन्हें इंडस्ट्री में विशेष पहचान दिलाई।

मकरंद देशपांडे का जन्म 6 मार्च 1966 को महाराष्ट्र के दहानू में हुआ। बचपन से ही उन्हें अभिनय में गहरी रुचि थी और कॉलेज के दिनों में उन्होंने थिएटर से जुड़ना शुरू कर दिया। यह जुनून उनके करियर का सबसे बड़ा आधार बना।

उन्होंने 1988 में आमिर खान की फ़िल्म 'कयामत से कयामत तक' से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई फ़िल्मों में सहायक किरदार निभाए। 'सरफरोश', 'स्वदेश', 'सत्या', 'मकड़ी', 'डरना जरूरी है', और 'घातक' जैसी फ़िल्मों में उनके किरदार दर्शकों के बीच यादगार रहे।

थिएटर उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। 1990 में उन्होंने पृथ्वी थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद 1993 में उन्होंने अंश थिएटर ग्रुप की स्थापना की, जिसमें उनके साथ के.के. मेनन भी शामिल हुए। यह ग्रुप मुंबई के थिएटर जगत का एक मजबूत स्तंभ बन गया। मकरंद ने 50 से अधिक शॉर्ट प्ले और 40 से अधिक फुल-लेंथ नाटक लिखे और निर्देशित किए, जिनमें 'सर सर सरला', 'जोक', 'मां इन ट्रांजिट', और 'पियक्कड़' दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे।

मकरंद ने न केवल अभिनय में, बल्कि निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने कुल पांच फ़िल्में निर्देशित की हैं, जिनमें 'दानव', 'हनन', 'शाहरुख बोला खूबसूरत है तू', 'सोना स्पा', और 'शनिवार-रविवार' शामिल हैं। उनकी निर्देशित फ़िल्में दर्शकों और समीक्षकों दोनों के बीच सराही गईं।

टीवी और वेब के क्षेत्र में भी मकरंद ने अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा। वह शाहरुख खान के शो 'सर्कस' में नजर आए और 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'साराभाई वर्सेज साराभाई' जैसे लोकप्रिय टीवी शोज में भी काम किया। वेब शोज 'हंड्रेड', 'शूरवीर' और 'द फेम गेम' में भी उन्होंने अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा।

मकरंद ने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए हैं। उन्हें साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवार्ड में बेस्ट नेगेटिव रोल के लिए सम्मानित किया गया और मराठी फ़िल्म 'डागड़ी चौल' के लिए फ़िल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकित भी किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकरंद देशपांडे ने कौन-सी फ़िल्म से करियर की शुरुआत की?
मकरंद देशपांडे ने 1988 में आमिर खान की फ़िल्म 'कयामत से कयामत तक' से अपने करियर की शुरुआत की।
मकरंद देशपांडे के कौन से नाटक प्रसिद्ध हैं?
उनके नाटक 'सर सर सरला', 'जोक', 'मां इन ट्रांजिट', और 'पियक्कड़' बहुत प्रसिद्ध हैं।
मकरंद देशपांडे ने कितनी फ़िल्में निर्देशित की हैं?
मकरंद देशपांडे ने कुल पांच फ़िल्में निर्देशित की हैं।
क्या मकरंद देशपांडे ने टीवी शोज़ में काम किया है?
हाँ, मकरंद देशपांडे ने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' और 'साराभाई वर्सेज साराभाई' जैसे लोकप्रिय शोज़ में काम किया है।
मकरंद देशपांडे को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
उन्हें साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवार्ड में बेस्ट नेगेटिव रोल के लिए सम्मानित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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