9 सितंबर 2026
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मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह हत्याकांड: इमरान प्रतापगढ़ी बोले- 'नॉर्थ ईस्ट सरकार की प्राथमिकता में नहीं'

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मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह हत्याकांड: इमरान प्रतापगढ़ी बोले- 'नॉर्थ ईस्ट सरकार की प्राथमिकता में नहीं'

सारांश

दिल्ली के किलोकरी गांव में मणिपुरी गिटारवादक चोंगथम विक्रम सिंह की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा; 7 आरोपी गिरफ्तार। सवाल यह है कि राजधानी में नॉर्थ ईस्ट के लोग कितने सुरक्षित हैं।

मुख्य बातें

54 वर्षीय मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की दिल्ली के किलोकरी गांव में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।
घटना सनलाइट कॉलोनी थाना क्षेत्र में हुई; विक्रम सिंह ने घर के बाहर शोर पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद विवाद बढ़ा।
पुलिस ने 7 वयस्क आरोपियों — भरत कुमार, प्रमोद, रमजान खान, दीपांशु, मोहन कुमार, विजय और मन्नू — को गिरफ्तार किया; एक किशोर भी हिरासत में।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि मणिपुर और नॉर्थ ईस्ट सरकार की प्रायोरिटी लिस्ट में नहीं हैं।
DPCC महासचिव दीपक भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस की पेट्रोलिंग विफलता को घटना का कारण बताया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा चुके हैं।

दिल्ली के किलोकरी गांव में मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामले ने 8 सितंबर 2026 को तीव्र राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के महासचिव दीपक भारद्वाज ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सीधा निशाना साधा। इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी दिल्ली की कानून-व्यवस्था और नॉर्थ ईस्ट के निवासियों की सुरक्षा पर सवाल उठा चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

यह मामला दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के सनलाइट कॉलोनी थाना क्षेत्र के किलोकरी गांव का है। 54 वर्षीय चोंगथम विक्रम सिंह मणिपुर मूल के थे और कई वर्षों से अपने परिवार के साथ दिल्ली में रह रहे थे। वह एक संगीत शिक्षक और जाने-माने गिटारवादक थे।

पुलिस के अनुसार, उनके घर के बाहर कुछ डिलीवरी कर्मी और ढाबा कर्मचारी कथित तौर पर शोर-शराबा कर रहे थे। विक्रम सिंह ने आपत्ति जताते हुए उन्हें आवाज़ कम करने को कहा, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि वहाँ मौजूद लोगों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी और उन्हें लात-घूंसों से बुरी तरह पीटा गया।

गंभीर रूप से घायल विक्रम सिंह को उनके बेटे ने होली फैमिली अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू की।

गिरफ्तारियाँ और जाँच की स्थिति

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की सहायता से आरोपियों की पहचान की। इस मामले में भरत कुमार, प्रमोद, रमजान खान, दीपांशु, मोहन कुमार, विजय और मन्नू — इन सात वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा एक किशोर को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, अधिकांश आरोपी अलग-अलग ढाबों पर काम करते हैं और एक आरोपी डिलीवरी कार्य करता था। मामले में आगे की जाँच जारी है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है कि मणिपुर पिछले कई सालों से सरकार के लिए गिनती में ही नहीं आता। मणिपुर के लोगों की पीट-पीटकर हत्या हो या उन्हें सरेआम बेइज्जत किया जाए, सरकार को इससे कोई मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री के भाषणों में भले ही मणिपुर का जिक्र होता हो, लेकिन बाकी समय सरकार का मणिपुर से कोई लेना-देना नहीं दिखाई देता। मणिपुर और नॉर्थ ईस्ट के लोग सरकार की प्रायोरिटी लिस्ट में नहीं आते।'

DPCC के महासचिव दीपक भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, 'यह दिल्ली का मामला है और घटना पुलिस की विफलता दिखाती है। नॉर्थ ईस्ट से आने वाले एक संगीतकार की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई और उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वह घर के बाहर हो रहे शोर को कम कराने के लिए गए थे। अगर इलाके में पुलिस की पर्याप्त मौजूदगी होती या नियमित पेट्रोलिंग होती तो अपराधियों में डर रहता और ऐसी घटना शायद नहीं होती। पिछले कुछ वर्षों से पुलिस की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।'

आम जनता और नॉर्थ ईस्ट समुदाय पर असर

यह घटना दिल्ली में रहने वाले नॉर्थ ईस्ट के लोगों के बीच गहरी असुरक्षा की भावना को उजागर करती है। गौरतलब है कि राजधानी में पूर्वोत्तर राज्यों के हज़ारों छात्र, कामकाजी पेशेवर और कलाकार निवास करते हैं। इस तरह की घटनाएँ नॉर्थ ईस्ट समुदाय के प्रति भेदभाव और उनकी सुरक्षा से जुड़े पुराने सवालों को फिर से सामने ला देती हैं।

क्या होगा आगे

पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जाँच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। दोनों कांग्रेस नेताओं ने माँग की है कि राजधानी में नॉर्थ ईस्ट के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। यह देखना होगा कि इस राजनीतिक दबाव के बाद प्रशासन की ओर से कोई नीतिगत प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह आक्रोश नीतिगत बदलाव में तब्दील होगा — जैसे नॉर्थ ईस्ट समुदाय-बहुल इलाकों में विशेष पुलिस तैनाती या त्वरित न्याय तंत्र। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक बयानबाज़ी पर केंद्रित रहती है, जबकि यह पूछना ज़रूरी है कि पिछले ऐसे मामलों में दोषियों को कितनी जल्दी सज़ा मिली। बिना जवाबदेही के, हर नई घटना पर वही आक्रोश और वही भुलावा — यही चक्र टूटना बाकी है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चोंगथम विक्रम सिंह कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
चोंगथम विक्रम सिंह मणिपुर मूल के 54 वर्षीय संगीत शिक्षक और गिटारवादक थे, जो दिल्ली के किलोकरी गांव में रहते थे। पुलिस के अनुसार, घर के बाहर शोर पर आपत्ति जताने के बाद भीड़ ने उन्हें लात-घूंसों से बुरी तरह पीटा, जिससे होली फैमिली अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की सहायता से भरत कुमार, प्रमोद, रमजान खान, दीपांशु, मोहन कुमार, विजय और मन्नू सहित 7 वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा एक किशोर को भी हिरासत में लिया गया है और आगे की जाँच जारी है।
कांग्रेस ने इस हत्याकांड पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि मणिपुर और नॉर्थ ईस्ट के लोग सरकार की प्रायोरिटी लिस्ट में नहीं हैं। DPCC महासचिव दीपक भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस की पर्याप्त पेट्रोलिंग न होने को घटना की बड़ी वजह बताया।
राहुल गांधी ने इस मामले पर क्या रुख अपनाया?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही दिल्ली की कानून-व्यवस्था और नॉर्थ ईस्ट के लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठा चुके हैं। उनके बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा।
दिल्ली में नॉर्थ ईस्ट के निवासियों की सुरक्षा का मुद्दा क्यों अहम है?
राजधानी में पूर्वोत्तर राज्यों के हज़ारों छात्र, कामकाजी पेशेवर और कलाकार रहते हैं, जो कथित तौर पर भेदभाव और हिंसा के शिकार होते रहे हैं। चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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