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'विश्वगुरु' में मुकेश खन्ना की वापसी: 'सेंसर' के बाद यह होगी मेरी सबसे बड़ी फिल्म

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'विश्वगुरु' में मुकेश खन्ना की वापसी: 'सेंसर' के बाद यह होगी मेरी सबसे बड़ी फिल्म

सारांश

'शक्तिमान' और 'भीष्म पितामह' के नाम से मशहूर मुकेश खन्ना का बड़े पर्दे पर लंबे इंतजार के बाद कमबैक — और इस बार विषय है भारत की आध्यात्मिक शक्ति। 'विश्वगुरु' उनकी खुद की नज़र में 'सेंसर' (2001) के बाद सबसे बड़ी फिल्म है।

मुख्य बातें

मुकेश खन्ना की आगामी फिल्म 'विश्वगुरु' उनके अनुसार 2001 की फिल्म 'सेंसर' के बाद उनका सबसे बड़ा बड़े पर्दे का प्रोजेक्ट है।
फिल्म में शामिल होने से पहले निर्माताओं के साथ तीन दौर की बैठकें हुईं; कहानी के विषय ने उन्हें राज़ी किया।
फिल्म का निर्देशन शैलेश बोगानी और अतुल सोनार ने किया है।
'विश्वगुरु' एक विदेशी समूह के भारत पर षड्यंत्र और आध्यात्मिक ज्ञान की भारतीय शक्ति पर आधारित कहानी है।
मुकेश खन्ना शक्तिमान और भीष्म पितामह की भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं।

अभिनेता मुकेश खन्ना ने अपनी आगामी फिल्म 'विश्वगुरु' को लेकर बड़ा खुलासा किया है — उनका कहना है कि देव आनंद की फिल्म 'सेंसर' के बाद यह उनकी सबसे महत्वपूर्ण बड़े पर्दे की परियोजना साबित हो सकती है। मुंबई में एक बातचीत के दौरान खन्ना ने बताया कि फिल्म के विषय ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने आखिरकार इस प्रोजेक्ट में काम करने का फैसला किया।

विषय ने किया आकर्षित

खन्ना ने बताया कि वे आमतौर पर बहुत कम फिल्में स्वीकार करते हैं, लेकिन 'विश्वगुरु' की कहानी और उसका केंद्रीय विचार उन्हें शुरू से ही आकर्षक लगा। उन्होंने कहा, 'मुझे विषय पसंद आया, मुझे कहानी अच्छी लगी।' निर्माताओं के साथ तीन दौर की बैठकों के बाद उन्होंने इस परियोजना में शामिल होने की सहमति दी।

उन्होंने बताया कि निर्माता बार-बार उनसे मिलने आए — 'तीन बार वो मेरी मेज पर बैठे, बाहर गए, फिर अंदर आए, फिर बाहर गए, फिर अंदर आए।' अंततः उनकी दृढ़ता ने खन्ना को मना लिया।

'सेंसर' के बाद सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

खन्ना ने खुलकर स्वीकार किया कि बड़े पर्दे से उनकी अनुपस्थिति लंबी रही है। उन्होंने कहा, 'देखिए, मैं बहुत कम फिल्में करता हूं और मैं खुलकर कहता हूं कि शायद देव आनंद की फिल्म 'सेंसर' के बाद मेरी कोई बड़ी फिल्म आने वाली है। लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं, इसलिए मैंने यह फिल्म की।'

गौरतलब है कि देव आनंद की 2001 में आई फिल्म 'सेंसर' में मुकेश खन्ना ने एक भारतीय सेना अधिकारी का किरदार निभाया था। उसके बाद से बड़े पर्दे पर उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति सीमित रही है।

हिंदी भाषा में संवाद पर सहमति

खन्ना ने यह भी बताया कि निर्माताओं ने उन्हें पहले ही सूचित किया था कि फिल्म में उन्हें हिंदी में संवाद बोलने होंगे। उन्होंने कहा, 'सर, आपको इस फिल्म में हिंदी बोलनी है — और मैंने कहा, ठीक है, कोई बात नहीं। क्योंकि विषय...' — यानी विषय की ताकत ने उन्हें हर शर्त पर राज़ी किया।

फिल्म की कहानी और निर्देशन

शैलेश बोगानी और अतुल सोनार द्वारा निर्देशित 'विश्वगुरु' एक विदेशी समूह की कहानी पर आधारित है, जो छल और बल से भारत पर आक्रमण का प्रयास करता है। फिल्म यह दिखाती है कि कैसे आध्यात्मिक ज्ञान भारत की सबसे बड़ी शक्ति बनता है और देश की वैश्विक शिक्षक की भूमिका को उजागर करता है।

यह ऐसे समय में आई है जब देशभक्ति और आध्यात्मिक विषयों पर आधारित हिंदी फिल्मों की माँग बढ़ी है। मुकेश खन्ना, जो शक्तिमान और भीष्म पितामह जैसी प्रतिष्ठित भूमिकाओं के लिए दशकों से दर्शकों के दिलों में बसे हैं, की यह वापसी बड़े पर्दे पर उनके प्रशंसकों के लिए एक विशेष अवसर होगी।

आगे की राह

फिल्म की रिलीज़ तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन खन्ना के बयान से स्पष्ट है कि वे इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उनकी स्क्रीन पर वापसी न केवल उनके प्रशंसकों के लिए बल्कि हिंदी सिनेमा के लिए भी एक चर्चित घटना बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बड़े पर्दे पर उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। 'विश्वगुरु' का विषय — आध्यात्मिक भारत बनाम विदेशी षड्यंत्र — उस सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की लहर पर सवार है जो हाल के वर्षों में हिंदी सिनेमा में स्पष्ट दिखती है। असली सवाल यह है कि क्या खन्ना की पहचान और फिल्म का विषय मिलकर उस दर्शक वर्ग को थिएटर तक खींच पाएंगे जो 'शक्तिमान' को देखकर बड़ा हुआ और आज ओटीटी का आदी हो चुका है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुकेश खन्ना की फिल्म 'विश्वगुरु' किस विषय पर आधारित है?
'विश्वगुरु' एक ऐसी कहानी है जिसमें एक विदेशी समूह छल और बल से भारत पर आक्रमण का प्रयास करता है, और भारत की आध्यात्मिक शक्ति इस चुनौती का जवाब बनती है। फिल्म देश की वैश्विक शिक्षक की भूमिका को केंद्र में रखती है।
मुकेश खन्ना ने 'विश्वगुरु' क्यों स्वीकार की?
मुकेश खन्ना ने खुद बताया कि फिल्म का विषय और कहानी उन्हें बेहद पसंद आई, जिसके बाद तीन दौर की बैठकों के बाद उन्होंने इस परियोजना में काम करने की सहमति दी। वे आमतौर पर बहुत कम फिल्में स्वीकार करते हैं।
'सेंसर' के बाद से मुकेश खन्ना की बड़ी फिल्में कौन-सी रही हैं?
मुकेश खन्ना ने खुद स्वीकार किया है कि 2001 में देव आनंद की फिल्म 'सेंसर' के बाद उनकी कोई बड़ी फिल्म नहीं आई। 'विश्वगुरु' उनके अनुसार उस लंबे अंतराल को खत्म करने वाली परियोजना है।
'विश्वगुरु' का निर्देशन किसने किया है?
फिल्म 'विश्वगुरु' का निर्देशन शैलेश बोगानी और अतुल सोनार ने किया है।
मुकेश खन्ना किन प्रतिष्ठित भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं?
मुकेश खन्ना मुख्यतः टेलीविज़न पर 'शक्तिमान' की भूमिका और महाभारत में 'भीष्म पितामह' के किरदार के लिए जाने जाते हैं, जो उन्हें भारतीय दर्शकों के बीच एक प्रतिष्ठित अभिनेता के रूप में स्थापित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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