नाग अश्विन का बड़ा बयान: 'कल्कि 2898 एडी' सिर्फ शुरुआत, भारतीय पौराणिक कथाओं में साइंस-फिक्शन की अपार संभावना
सारांश
मुख्य बातें
निर्देशक नाग अश्विन ने स्पष्ट किया है कि 'कल्कि 2898 एडी' भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित साइंस-फिक्शन सिनेमा की महज़ पहली कड़ी है — आगे इस विधा में अनेक नई कहानियाँ पर्दे पर आ सकती हैं। मुंबई में एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि फिल्म की व्यावसायिक सफलता ने साबित किया है कि भारतीय दर्शक ऐसी असाधारण, बड़े पैमाने की कहानियों को देखने के लिए तैयार हैं।
भारतीय पौराणिक कथाओं में साइंस-फिक्शन की संभावना
नाग अश्विन ने कहा, 'भारतीय पौराणिक कथाओं में ऐसे कई विचार पहले से मौजूद हैं, जिन्हें भविष्य की दुनिया के साथ जोड़ा जा सकता है।' उनके अनुसार भारतीय कथाओं में समय, विनाश, दोबारा जन्म और भविष्य की दुनिया जैसे विषय पहले से विद्यमान हैं, जिनमें साइंस-फिक्शन की भरपूर गुंजाइश है।
उन्होंने आगे जोड़ा, 'अगर इन पुराने विचारों को नए तरीके से कहानी में रखा जाए, तो दर्शकों को कुछ ऐसा देखने को मिल सकता है जो उन्होंने पहले नहीं देखा।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय फिल्म उद्योग में पौराणिक कथाओं पर बड़े बजट की फिल्मों की एक नई लहर उभर रही है।
फिल्म की सफलता से बढ़ा निर्माताओं का भरोसा
अश्विन ने रेखांकित किया कि 'कल्कि 2898 एडी' जैसी बड़ी और अलग फिल्म बनाने के लिए निर्माताओं को यह विश्वास होना अनिवार्य है कि दर्शक ऐसी कहानियों पर पैसा खर्च करेंगे। उन्होंने कहा, 'फिल्म की सफलता से इस तरह की बड़ी कहानियों पर पूँजी लगाने का भरोसा बढ़ा है।'
गौरतलब है कि इस सफलता का सबसे बड़ा फायदा उन फिल्मकारों को मिल सकता है, जो भारतीय पौराणिक आख्यानों को नए दृष्टिकोण से पर्दे पर लाना चाहते हैं। यह बदलाव भारतीय सिनेमा में एक नई विधा के उभार का संकेत देता है।
'कल्कि 2898 एडी' की कहानी और सितारे
फिल्म की कहानी वर्ष 2898 की उस दुनिया में घटित होती है, जहाँ काशी का स्वरूप आमूलचूल बदल चुका है। कथा के केंद्र में सुमति नाम की एक महिला और उसका अजन्मा शिशु है, जिसे भगवान विष्णु का अंतिम अवतार कल्कि माना जाता है। एक पक्ष उस बच्चे की रक्षा करने में जुटा है, जबकि दूसरा पक्ष उसे प्राप्त करने के लिए सक्रिय है।
अमिताभ बच्चन ने अश्वत्थामा का किरदार निभाया, प्रभास भैरव के रूप में नज़र आए, दीपिका पादुकोण ने सुमति की भूमिका अदा की और कमल हासन ने यास्किन का किरदार जीवंत किया। इसके अलावा शोभना और दिशा पाटनी भी फिल्म में महत्त्वपूर्ण भूमिकाओं में रहीं।
आगे क्या होगा
नाग अश्विन के अनुसार इस विचार-शृंखला पर आगे भी काम जारी रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय पौराणिक कथाओं में समय और ब्रह्मांड से जुड़े जो विचार मिलते हैं, वे आज के दर्शकों को भविष्य की कल्पना की तरह लग सकते हैं — और यही उन्हें सिनेमाई दृष्टि से असाधारण रूप से उपयोगी बनाता है। भारतीय साइंस-फिक्शन सिनेमा के लिए यह एक नई शुरुआत की तरह है।