1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नरगिस दत्त: डॉक्टर का सपना छोड़ 'मदर इंडिया' से बनीं सिनेमा की किंवदंती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नरगिस दत्त: डॉक्टर का सपना छोड़ 'मदर इंडिया' से बनीं सिनेमा की किंवदंती

सारांश

नरगिस दत्त का जीवन एक अधूरे सपने की कहानी है — डॉक्टर बनने की चाह जो माता की जिद के आगे झुक गई। लेकिन जिस अभिनय को वह अनिच्छा से स्वीकार करने गई थीं, वही उन्हें 'मदर इंडिया' के माध्यम से भारतीय सिनेमा की सबसे महान अभिनेत्रियों में से एक बना गया।

मुख्य बातें

नरगिस दत्त का असली नाम रशीद फातिमा था, जन्म 1 जून 1929 को कोलकाता में।
वह डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन माता जदनबाई की जिद से अभिनय में आईं।
1935 में मात्र 6 वर्ष की उम्र में फिल्म ' तलाश-ए-हक ' से शुरुआत।
1949 में राज कपूर की ' बरसात ' से स्टारडम, 1957 में ' मदर इंडिया ' से अंतरराष्ट्रीय पहचान।
3 मई को उनकी पुण्यतिथि; ' मदर इंडिया ' को ऑस्कर नामांकन मिला।

नई दिल्ली, 2 मई (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग में नरगिस दत्त का नाम आते ही 'मदर इंडिया' की याद आती है — लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उनका असली सपना मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनना था। माता जदनबाई की जिद और एक बेमन से दिया गया स्क्रीन टेस्ट ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। 3 मई को उनकी पुण्यतिथि पर नरगिस का वह अधूरा सपना और उस सपने को छोड़ने के बाद जो किंवदंती रच गईं, उसी की कहानी।

डॉक्टर बनने का सपना और माता की जिद

नरगिस दत्त का असली नाम रशीद फातिमा था। उनका जन्म 1 जून 1929 को कोलकाता में हुआ था। उनकी माता जदनबाई उस समय की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका, नृत्यांगना, निर्देशक और अभिनेत्री थीं, और भारतीय सिनेमा की पहली महिला संगीतकार भी। जदनबाई चाहती थीं कि उनकी बेटी भी अभिनय की दुनिया में आए, लेकिन नरगिस का स्वप्न कुछ और था — वह चिकित्सा क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहती थीं। गौरतलब है कि उस समय महिलाओं के लिए डॉक्टर बनना बेहद दुर्लभ और साहस भरा कदम माना जाता था।

माता की इच्छा के आगे नरगिस की अपनी चाह बेमानी साबित हुई। 1935 में, जब नरगिस मात्र 6 वर्ष की थीं, जदनबाई ने उन्हें बाल कलाकार के रूप में फिल्म 'तलाश-ए-हक' में उतार दिया। इस तरह उनके अभिनय की शुरुआत हो गई, लेकिन नरगिस का मन अभिनय में कहीं नहीं था।

महबूब खान का स्क्रीन टेस्ट और किस्मत का पलटना

एक दिन जदनबाई ने अपनी बेटी को महबूब खान के पास स्क्रीन टेस्ट के लिए भेज दिया। नरगिस बिल्कुल बेमन से टेस्ट देने गई थीं — उनका इरादा था कि महबूब खान उन्हें अस्वीकार कर देंगे और वह अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा कर सकेंगी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। महबूब खान उनकी अभिनय प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत अपनी फिल्म 'तकदीर' के लिए नरगिस को मुख्य भूमिका में चुन लिया। यह वह पल था जिसने नरगिस के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया।

स्टारडम और 'मदर इंडिया' की सफलता

1945 में महबूब खान की फिल्म 'हुमायूं' आई, लेकिन नरगिस की असली सफलता 1949 में मिली। राज कपूर की फिल्म 'बरसात' और दिलीप कुमार के साथ 'अंदाज' ने नरगिस को एक सुपरस्टार में तब्दील कर दिया। 'बरसात' में राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों के लिए एक किंवदंती बन गई। 'आवारा', 'श्री 420', 'चोरी चोरी', 'जागते रहो' जैसी फिल्मों में दोनों ने साथ काम किया, और इन फिल्मों के गाने आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं।

नरगिस का करियर चरम पर था, लेकिन 1950 के दशक के मध्य में कुछ फिल्में असफल रहीं। फिर 1957 में महबूब खान की महाकाव्यिक फिल्म 'मदर इंडिया' रिलीज़ हुई। इस फिल्म में नरगिस ने राधा का अविस्मरणीय किरदार निभाया और भारतीय सिनेमा का इतिहास रच दिया। 'मदर इंडिया' को ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकन भी मिला — यह उपलब्धि नरगिस को अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्वीकृति दिलाई। इस भूमिका ने नरगिस को न केवल भारत में बल्कि विश्व सिनेमा में भी एक प्रतिष्ठित अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया।

अभिनय से परे: समाज सेवा और राजनीति

नरगिस ने अभिनय के अलावा समाज सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने सुनील दत्त से विवाह किया और राजनीति में भी सक्रिय रहीं। एक सशक्त महिला के रूप में वह समाज में अपनी जिम्मेदारी निभाती रहीं। उनका जीवन सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था — वह एक समाज सेविका भी थीं।

अधूरा सपना, अमर विरासत

डॉक्टर बनने का नरगिस का सपना माता की जिद के आगे झुक गया, लेकिन उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में जो कमाल किया, वह आज भी याद किया जाता है। उन्होंने सिनेमा को एक नई ऊँचाई दी, और अपनी अभिनय प्रतिभा से लाखों दिलों को छुआ। यह विडंबना ही है कि जिस सपने को पूरा करने का इरादा नहीं था, वही उन्हें अमर बना गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसमें इतनी प्रतिभा दिखाई कि वह न केवल भारतीय बल्कि विश्व सिनेमा की एक महान अभिनेत्री बन गईं। 'मदर इंडिया' का ऑस्कर नामांकन इस बात का प्रमाण है कि किस्मत कभी-कभी हमारी अपेक्षाओं से बेहतर रास्ता दिखा देती है — लेकिन यह भी सच है कि नरगिस का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया, और हम कभी नहीं जान सकते कि वह चिकित्सा क्षेत्र में क्या योगदान दे सकती थीं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरगिस दत्त का असली नाम क्या था?
नरगिस दत्त का असली नाम रशीद फातिमा था। उनका जन्म 1 जून 1929 को कोलकाता में हुआ था। उनकी माता जदनबाई भारतीय सिनेमा की पहली महिला संगीतकार थीं।
नरगिस दत्त डॉक्टर क्यों नहीं बन सकीं?
नरगिस डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन उनकी माता जदनबाई चाहती थीं कि वह अभिनय करें। माता की जिद के आगे नरगिस को झुकना पड़ा, और 1935 में मात्र 6 वर्ष की उम्र में फिल्म ' तलाश-ए-हक ' से उनकी अभिनय यात्रा शुरू हो गई।
नरगिस दत्त को स्टारडम कब मिला?
नरगिस को 1949 में स्टारडम मिला जब राज कपूर की फिल्म ' बरसात ' और दिलीप कुमार के साथ ' अंदाज ' रिलीज़ हुई। लेकिन उनकी सबसे बड़ी सफलता 1957 में महबूब खान की फिल्म ' मदर इंडिया ' से आई।
'मदर इंडिया' ने नरगिस दत्त को क्यों खास बना दिया?
' मदर इंडिया ' में नरगिस ने राधा का किरदार निभाया, जो एक माँ की संघर्ष और त्याग की कहानी थी। इस फिल्म को ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला, जिससे नरगिस को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली। यह फिल्म उनके करियर की सबसे महान उपलब्धि बनी।
नरगिस दत्त की पुण्यतिथि कब है?
3 मई को नरगिस दत्त की पुण्यतिथि मनाई जाती है। वह भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की सबसे महत्वपूर्ण अभिनेत्रियों में से एक थीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले