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कुकिंग इंडस्ट्री में एआई से न डरें, इसके साथ बढ़ें: शेफ संजीव कपूर

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कुकिंग इंडस्ट्री में एआई से न डरें, इसके साथ बढ़ें: शेफ संजीव कपूर

सारांश

संजीव कपूर ने खाना पकाने के भविष्य को एआई के साथ जोड़ा, न कि इसके विरुद्ध। हंसल मेहता की 'खाना दिल से' भारत की पहली एआई-संचालित कुकिंग सीरीज़ है, जो सांस्कृतिक विरासत को तकनीक के साथ मिलाती है।

मुख्य बातें

शेफ संजीव कपूर ने कहा कि कुकिंग इंडस्ट्री को एआई से डरना नहीं चाहिए , बल्कि इसके साथ सहयोग करना चाहिए।
हंसल मेहता भारत की पहली एआई-संचालित कुकिंग सीरीज़ 'खाना दिल से' पर काम कर रहे हैं।
मेहता के अनुसार, एआई कहानी कहने का एक सहयोगी होगा, न कि प्रतिस्थापन।
खाना पकाने को सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें इतिहास, भूमि और पीढ़ियों का समावेश है।
एआई का उपयोग पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तरीके से संरक्षित और प्रचारित करने के लिए किया जा रहा है।

मुंबई में शेफ संजीव कपूर ने 2 मई को खाना पकाने के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका पर अपनी राय व्यक्त की, जिसमें उन्होंने नई तकनीकों को अपनाने की वकालत की। कपूर ने कहा कि एआई जैसी तकनीकों से डरने की बजाय उनके साथ सहयोग करना चाहिए, क्योंकि प्रौद्योगिकी का विकास अपरिहार्य है और इसके अनुरूप ढलना ही सफलता की कुंजी है।

टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल की जरूरत

शेफ कपूर ने कहा, "चाहे एआई हो या कोई अन्य तकनीक, हमें हमेशा इसके अनुकूल होना पड़ता है। इंटरनेट के युग से लेकर आज के एआई समय तक, हमने हर बदलाव के साथ खुद को ढाला है। हमेशा कुछ नया आता रहेगा और हमें उसके साथ आगे बढ़ना होगा।" उन्होंने जोर दिया कि नई तकनीक को स्वीकार करना और उसके साथ काम करना ही आगे बढ़ने का रास्ता है।

एआई-संचालित कुकिंग सीरीज का विकास

संजीव कपूर के प्रसिद्ध शो 'खाना खजाना' के निर्देशकों में से एक हंसल मेहता भारत की पहली एआई-संचालित कुकिंग सीरीज 'खाना दिल से' पर काम कर रहे हैं। यह परियोजना खाना पकाने को केवल एक कौशल के बजाय एक सांस्कृतिक और भावनात्मक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करती है।

भोजन को सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखना

मेहता ने कहा कि "एआई का उपयोग केवल एक दृश्य और कल्पना उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि कहानी कहने में एक सहयोगी के रूप में भी होगा। 'खाना दिल से' भोजन को एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत के रूप में पुनः स्थापित करता है।" इस दृष्टिकोण से पारंपरिक खाना पकाने को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जा रहा है।

खाने में संस्कृति और इतिहास का समावेश

'स्कूप' के निर्माता मेहता ने खाना पकाने के गहरे सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "जब आप किसी दूसरी संस्कृति का खाना बनाते हैं तो आप सिर्फ एक रेसिपी का पालन नहीं कर रहे, बल्कि किसी और के जीवन के एक हिस्से में प्रवेश कर रहे हैं।" उन्होंने बताया कि एक रेसिपी में पूरा इतिहास समाहित होता है — भूमि का, प्रवास का, और पीढ़ियों के हाथों का।

मेहता के अनुसार, "ये शायद मानवता के सबसे टिकाऊ सांस्कृतिक दस्तावेज हैं, जो पीढ़ियों से, सीमाओं के पार आगे बढ़ते हैं, और तब भी बचे रहते हैं जब लगभग कुछ भी नहीं बचता। भोजन लोगों को देखने और समझने का एक सच्चा तरीका है कि वे वास्तव में कौन हैं।"

भविष्य की दिशा

यह विकास दर्शाता है कि भारतीय खाना पकाने की परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ कैसे संरक्षित और प्रचारित किया जा सकता है। एआई का उपयोग सांस्कृतिक कथाओं को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने के लिए एक माध्यम बन रहा है, न कि परंपरा को प्रतिस्थापित करने के लिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सतर्कता भी जरूरी है। जब एआई खाना पकाने में प्रवेश करता है, तो सवाल यह है कि क्या यह परंपरागत कौशल को पूरक बनाएगा या उसे सीमांत करेगा। हंसल मेहता की 'खाना दिल से' परियोजना इस संतुलन को खोजने का एक साहसिक प्रयास है, लेकिन बहुत सारे शेफ और पाक-कला शिक्षकों के लिए एआई अभी भी नौकरियों के लिए एक धमकी है। सांस्कृतिक विरासत के नाम पर तकनीक को अपनाना एक बात है; यह सुनिश्चित करना कि मानवीय कौशल और स्थानीय ज्ञान अप्रासंगिक न हो जाएँ, बिल्कुल अलग है। भारतीय खाना पकाने की विविधता को संरक्षित करने के लिए एआई को एक उपकरण के रूप में, न कि एक विकल्प के रूप में, देखना होगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेफ संजीव कपूर ने कुकिंग में एआई के बारे में क्या कहा है?
संजीव कपूर ने कहा कि एआई जैसी नई तकनीकों से डरने की बजाय उनके साथ सहयोग करना चाहिए। उनका मानना है कि तकनीकी विकास अपरिहार्य है और खाना पकाने के क्षेत्र को भी इसके अनुरूप ढलना चाहिए।
'खाना दिल से' क्या है?
'खाना दिल से' भारत की पहली एआई-संचालित कुकिंग सीरीज़ है, जिस पर हंसल मेहता काम कर रहे हैं। यह परियोजना खाना पकाने को एक सांस्कृतिक और भावनात्मक विरासत के रूप में प्रस्तुत करती है।
हंसल मेहता कौन हैं और वे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
हंसल मेहता 'खाना खजाना' के निर्देशकों में से एक हैं और 'स्कूप' के निर्माता हैं। वे अब एआई-संचालित कुकिंग सीरीज़ पर काम कर रहे हैं, जो पारंपरिक खाना पकाने को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का प्रयास है।
खाना पकाने में एआई का उपयोग कैसे किया जाएगा?
मेहता के अनुसार, एआई का उपयोग केवल दृश्य और कल्पना उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि कहानी कहने में एक सहयोगी के रूप में किया जाएगा। इसका उद्देश्य भोजन को एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत के रूप में प्रस्तुत करना है।
खाना पकाने का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
हंसल मेहता के अनुसार, एक रेसिपी में पूरा इतिहास समाहित होता है — भूमि का, प्रवास का, और पीढ़ियों का। खाना पकाने को मानवता के सबसे टिकाऊ सांस्कृतिक दस्तावेज़ों में से एक माना जाता है, जो लोगों को समझने का एक सच्चा तरीका है।
राष्ट्र प्रेस
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