स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह, सितारों ने की तारीफ
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इस बार ऐतिहासिक रूप से गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निकट वडोदरा में आयोजित किया जा रहा है — पहली बार जब यह प्रतिष्ठित समारोह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बाहर हो रहा है। 22 सितंबर 2026 को आयोजन स्थल पहुँचे फिल्मी जगत के सितारों और निर्माताओं ने इस अनूठे आयोजन पर उत्साह जताया और इसे भारतीय सिनेमा के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत बताया।
मुख्य घटनाक्रम
दशकों से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह नई दिल्ली में आयोजित होता आया है। इस बार पहली बार इसे वडोदरा लाया गया है, जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा — के निकट स्थित है। यह बदलाव भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों को देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित करने की नीति पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि यह पहला बड़ा राष्ट्रीय सांस्कृतिक पुरस्कार समारोह है जो गुजरात की धरती पर आयोजित हो रहा है।
फिल्म निर्माता राहुल बाली की प्रतिक्रिया
फिल्म प्रोड्यूसर राहुल बाली ने समारोह में शामिल होने के लिए मुंबई से वडोदरा पहुँचकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर हमें बहुत नाज है। इस शहर में पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार आयोजन होने पर मुझे बेहद खुशी हो रही है।'
बाली ने आगे कहा, 'मैं सभी से अपील करूंगा कि यहां पर इस तरह के और भी कार्यक्रम होने चाहिए और साथ ही, बॉलीवुड के लोगों को भी बुलाना चाहिए। मैं अपने बॉलीवुड के दोस्तों से भी कहूंगा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर फिल्म जरूर बनाएं, ताकि दुनिया को पता चले कि क्या जबरदस्त चीज बनाई है।' उन्होंने यह भी कहा कि जब सिनेमा जोड़ता है तो वह सरहद नहीं देखता, और भारतीय सिनेमा को दुनिया का सबसे बड़ा माना जाता है।
वडोदरा की प्रशंसा करते हुए बाली ने बताया कि उन्होंने अब तक केवल सोशल मीडिया पर इस शहर की तस्वीरें देखी थीं और आउटडोर शूटिंग के लिहाज से इसे शानदार स्थान बताया।
अभिनेत्री गोपी देसाई की राय
अभिनेत्री गोपी देसाई, जो इस बार पुरस्कार ग्रहण करने नहीं बल्कि जूरी की हैसियत से समारोह में शामिल हुई हैं, ने बताया कि शुरुआत में उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि समारोह दिल्ली में नहीं हो रहा। उन्होंने कहा, 'पहले सुनकर अजीब लगा कि दिल्ली में नहीं, कहीं और हो रहा है। फिर बोला गया कि वडोदरा में हो रहा है, तो ये तो अच्छी बात है।'
देसाई ने बताया कि अपने करियर में उन्हें पहले दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं, जो उन्होंने दिल्ली जाकर प्राप्त किए थे। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि आने वाले वर्षों में यह समारोह अलग-अलग राज्यों में आयोजित हो सकता है, जिससे सांस्कृतिक विकेंद्रीकरण को बल मिलेगा। इस बार वे साउथ पैनल 2 की चेयरपर्सन के रूप में जूरी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
आम जनता और पर्यटन पर असर
वडोदरा और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्षेत्र में इस आयोजन से स्थानीय पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को महत्त्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में फिल्मी हस्तियों और मीडिया की उपस्थिति से इस क्षेत्र की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई ऊँचाई मिल सकती है।
क्या होगा आगे
अभिनेत्री गोपी देसाई सहित कई हस्तियों ने संकेत दिया है कि यह नई परंपरा भविष्य में देश के अन्य राज्यों तक भी विस्तारित हो सकती है। यदि यह प्रारूप सफल रहा, तो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हर साल एक नए शहर में आयोजित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता — जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को उजागर करने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।