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राकेश रोशन का भावुक खुलासा: 'बेटी सुनैना के कैंसर के दौरान अकेले में रोया, उसके सामने हमेशा मुस्कुराया'

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राकेश रोशन का भावुक खुलासा: 'बेटी सुनैना के कैंसर के दौरान अकेले में रोया, उसके सामने हमेशा मुस्कुराया'

सारांश

राकेश रोशन ने खुलासा किया कि बेटी सुनैना के कैंसर के दौरान वह अकेले में रोते थे, लेकिन उसके सामने हमेशा मुस्कुराते थे। सुनैना ने भी 2018 में पिता के कैंसर के वक्त यही किया। इस पिता-बेटी के दर्द और हौसले की कहानी इंस्टाग्राम वीडियो में सामने आई।

मुख्य बातें

राकेश रोशन ने बताया कि बेटी सुनैना की बीमारी के दौरान वह कई बार अकेले में रोए, लेकिन उसके सामने हमेशा मुस्कुराते रहे।
सुनैना रोशन को 2007 में सर्वाइकल कैंसर का पता चला था; लंबे इलाज के बाद उन्होंने बीमारी को मात दी।
राकेश रोशन को 2018 में गले के शुरुआती चरण के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का पता चला था और उनकी सर्जरी सफल रही।
सुनैना ने खुलासा किया कि पिता के कैंसर के दौरान वह आईने के सामने खुद को हंसाने की कोशिश करती थीं और फिर मुस्कुराते हुए उनके सामने जाती थीं।
राकेश रोशन ने कहा कि 'मुश्किल समय में हौसला और सकारात्मक सोच ही सबसे बड़ी दवा होती है।'

दिग्गज फिल्म निर्माता और अभिनेता राकेश रोशन ने हाल ही में अपनी जिंदगी के सबसे कठिन अध्याय को सार्वजनिक रूप से साझा किया — वह दौर जब उनकी बेटी सुनैना रोशन सर्वाइकल कैंसर, फैटी लिवर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से एक साथ जूझ रही थीं। एक पिता के रूप में वह भीतर से टूट रहे थे, फिर भी बेटी के सामने हर बार मुस्कुराते हुए जाते थे — ताकि उसका मनोबल कभी न डगमगाए।

इंस्टाग्राम वीडियो में पिता-बेटी का दिल छू लेने वाला संवाद

सुनैना रोशन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने और राकेश रोशन ने अपने जीवन के सबसे मुश्किल पलों को खुलकर याद किया। वीडियो में सुनैना ने अपने पिता से पूछा — 'जब मेरी तबीयत सबसे ज़्यादा खराब थी, उस वक्त एक पिता के तौर पर आपके मन में क्या चल रहा था?' यह सवाल सुनते ही राकेश रोशन कुछ पलों के लिए भावुक हो गए।

राकेश रोशन का दर्द: 'अकेले में आंसू, बेटी के सामने मुस्कान'

राकेश रोशन ने बताया, 'वह दौर मेरे लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। ऐसा सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई बार हुआ जब मैं अकेले में भगवान से प्रार्थना करता था और मेरी आंखों में आंसू आ जाते थे। हालांकि, जब भी मैं तुमसे मिलने आता था, तब अपने सारे दर्द को छिपा लेता था — मैं हमेशा मुस्कुराते हुए तुम्हारे सामने आता था, ताकि तुम कभी कमज़ोर महसूस न करो।'

उन्होंने आगे कहा, 'एक पिता होने के नाते अपनी संतान को तकलीफ में देखना सबसे मुश्किल अनुभव होता है। कई बार मैं अंदर से बुरी तरह टूट जाता था, लेकिन फिर सोचता था कि अगर मैं खुद कमज़ोर पड़ गया तो बेटी का हौसला भी टूट जाएगा। इसलिए मैंने हमेशा अपने चेहरे पर मुस्कान बनाए रखी।'

सुनैना का खुलासा: आईने के सामने खुद को हंसाने की कोशिश

पिता की बात सुनकर सुनैना रोशन भी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि 2018 में जब राकेश रोशन को गले के शुरुआती चरण के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा कैंसर का पता चला, तब उन्होंने भी वही किया जो उनके पिता ने उनके लिए किया था। 'मैं आपके सामने हमेशा मुस्कुराकर रहती थी और हिम्मत देने की कोशिश करती थी, लेकिन जैसे ही अपने कमरे में जाती थी, फूट-फूटकर रोती थी।'

सुनैना ने यह भी खुलासा किया कि कई बार वह आईने के सामने खड़ी होकर खुद को जबरन हंसाने की कोशिश करती थीं — पहले खुद को मानसिक रूप से तैयार करती थीं और फिर मुस्कुराते हुए पिता के सामने जाती थीं, ताकि परिवार की घबराहट उन तक न पहुंचे।

सकारात्मक सोच को बताया सबसे बड़ी दवा

राकेश रोशन ने इस पूरे अनुभव से एक गहरा संदेश साझा किया: 'परिवार का कोई भी सदस्य जब गंभीर बीमारी से गुजरता है तो उसके अपने लोग भी उतना ही दर्द महसूस करते हैं। लेकिन ऐसे समय में अगर परिवार सकारात्मक रवैया अपनाए और मरीज के सामने मज़बूत बना रहे, तो उससे बीमार व्यक्ति को लड़ने की ताकत मिलती है। मुश्किल समय में हौसला और सकारात्मक सोच ही सबसे बड़ी दवा होती है।'

बातचीत के अंत में सुनैना ने कहा, 'आखिरकार लड़ाई लड़ने की असली ताकत इंसान के भीतर से आती है। व्यक्ति को खुद यह फैसला करना पड़ता है कि वह बीमारी के आगे हार नहीं मानेगा, बल्कि उसका सामना करेगा और उसे हराकर आगे बढ़ेगा।'

राकेश रोशन और सुनैना की बीमारी का सफर

गौरतलब है कि सुनैना रोशन को 2007 में सर्वाइकल कैंसर का पता चला था। लंबे इलाज के बाद उन्होंने इस बीमारी को मात दी। इसके अलावा वह फैटी लिवर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ चुकी हैं, जिनके बारे में वह समय-समय पर खुलकर बात करती रही हैं। वहीं, राकेश रोशन को 2018 में गले के शुरुआती चरण के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का पता चला था और उनकी सर्जरी सफल रही। यह पिता-बेटी की जोड़ी अब अपनी इस जीवट कहानी से लाखों लोगों को प्रेरणा दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जिसे मुख्यधारा की स्वास्थ्य चर्चा अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में कैंसर जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सार्वजनिक संवाद बढ़ रहा है। सुनैना का 2007 से अब तक का सफर और राकेश रोशन की 2018 की सर्जरी — दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि देखभाल करने वाले का मनोबल भी उतना ही ज़रूरी है जितना मरीज़ का।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनैना रोशन को कौन सी बीमारी हुई थी?
सुनैना रोशन को 2007 में सर्वाइकल कैंसर का पता चला था। इसके अलावा वह फैटी लिवर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ चुकी हैं। लंबे इलाज के बाद उन्होंने इन बीमारियों को मात दी।
राकेश रोशन को कौन सा कैंसर हुआ था?
राकेश रोशन को 2018 में गले के शुरुआती चरण के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा कैंसर का पता चला था। उन्होंने सर्जरी करवाई, जो सफल रही।
राकेश रोशन और सुनैना का भावुक वीडियो कहाँ आया?
सुनैना रोशन ने यह वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने और राकेश रोशन ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद किया और एक-दूसरे से ताकत लेने की बात साझा की।
सुनैना ने पिता के कैंसर के दौरान क्या किया?
सुनैना ने बताया कि 2018 में राकेश रोशन के कैंसर के दौरान वह आईने के सामने खुद को जबरन हंसाने की कोशिश करती थीं और मानसिक रूप से तैयार होकर मुस्कुराते हुए पिता के सामने जाती थीं। अकेले में वह फूट-फूटकर रोती थीं ताकि पिता को परिवार की घबराहट का एहसास न हो।
राकेश रोशन ने बीमारी से लड़ने का क्या संदेश दिया?
राकेश रोशन ने कहा कि मुश्किल समय में परिवार का सकारात्मक रवैया और मरीज़ के सामने मज़बूत बने रहना उसे लड़ने की ताकत देता है। उनके अनुसार हौसला और सकारात्मक सोच ही सबसे बड़ी दवा होती है।
राष्ट्र प्रेस
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