सुमोना चक्रवर्ती ने एंडोमेट्रियोसिस सर्जरी के बाद तोड़ी चुप्पी, दो महीने के दर्द की कहानी साझा की
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री सुमोना चक्रवर्ती ने 5 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वापसी करते हुए खुलासा किया कि वे पिछले दो महीनों से एंडोमेट्रियोसिस की गंभीर बीमारी के चलते सर्जरी और स्वास्थ्य-लाभ से गुज़र रही थीं। उन्होंने बताया कि 4 मई को उनकी सर्जरी हुई, जिसके बाद उन्होंने पूरी तरह खुद को ठीक करने में समय लगाया।
बीमारी और सर्जरी का सफर
सुमोना ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि कई सालों से वे दवाओं और अन्य उपचारों के ज़रिए एंडोमेट्रियोसिस को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन समय के साथ बीमारी गंभीर होती गई। उन्होंने लिखा, 'आखिरकार डॉक्टरों ने सर्जरी का फैसला लिया।' सर्जरी के बाद उनके पेट पर तीन निशान रह गए हैं, जिन्हें वे अपनी जीत का प्रमाण मानती हैं।
डॉक्टर और मेडिकल टीम का आभार
अभिनेत्री ने अपनी डॉक्टर और पूरी मेडिकल टीम को 'किसी फरिश्ते से कम नहीं' बताया। उन्होंने कहा कि टीम ने न केवल उनका इलाज किया, बल्कि उस मानसिक पीड़ा को भी समझा जो शायद बाहर से नज़र नहीं आती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पोस्ट सहानुभूति पाने के लिए नहीं, बल्कि अपना अनुभव साझा करने के उद्देश्य से की गई है।
सोशल मीडिया और ट्रोलिंग पर बेबाक राय
सुमोना ने स्वीकार किया कि बीमारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर हो जाने तक का विचार किया था। उन्होंने लिखा कि उनकी तस्वीरों पर शरीर को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ, जिनमें अधिकतर पुरुष शामिल होते हैं, उन्हें परेशान करती रही हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि एक अभिनेत्री के रूप में वे जानती हैं कि इस तरह की बातें पेशे का हिस्सा हैं।
नई सोच और सकारात्मक बदलाव
स्वास्थ्य-लाभ के इस दौर ने सुमोना की सोच को नई दिशा दी है। वे अब एक ऐसी ऑनलाइन कम्युनिटी बनाने की योजना बना रही हैं जहाँ विशेष रूप से महिलाएँ एंडोमेट्रियोसिस, पेरिमेनोपॉज़, मानसिक स्वास्थ्य, फिटनेस और रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े विषयों पर खुलकर बात कर सकें। उन्होंने कहा कि लाइक्स और फॉलोअर्स की संख्या उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रही। गौरतलब है कि एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की आंतरिक परत जैसा ऊतक बाहर बढ़ने लगता है और भारत में इसके बारे में जागरूकता अभी भी सीमित है। सुमोना का यह खुलासा उन लाखों महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो इस बीमारी से अनजान या अनदेखी का शिकार हैं।
जीवन के प्रति नया नज़रिया
सुमोना ने अपने पोस्ट का अंत एक सकारात्मक संदेश के साथ किया। उन्होंने लिखा, 'बढ़ती उम्र डरने की नहीं, बल्कि गर्व करने की बात है, क्योंकि इसके साथ अनुभव, समझ और जीवन के प्रति आभार भी बढ़ता है।' पेट पर बचे तीन निशानों को वे उस लड़ाई की निशानी मानती हैं जो उन्होंने जीती है। आने वाले समय में यदि उनकी कम्युनिटी की योजना साकार होती है, तो यह महिलाओं के स्वास्थ्य पर खुले संवाद की दिशा में एक सार्थक कदम हो सकता है।