3 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

संध्या: असली शेरों के साथ शूटिंग करने वाली अभिनेत्री, जिनका करियर समर्पण की मिसाल था

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
संध्या: असली शेरों के साथ शूटिंग करने वाली अभिनेत्री, जिनका करियर समर्पण की मिसाल था

सारांश

संध्या सिर्फ परदे की नायिका नहीं थीं — वे असली शेरों के सामने निडर खड़ी रहने वाली कलाकार थीं। बिना बॉडी डबल के खतरनाक दृश्य, महीनों का नृत्य प्रशिक्षण और एक निर्देशक के प्रति अटूट समर्पण — उनकी जीवनगाथा भारतीय सिनेमा के इतिहास में अभिनय के प्रति जुनून की सबसे दुर्लभ मिसालों में से एक है।

मुख्य बातें

संध्या (विजया देशमुख) का 4 अक्टूबर 2025 को मुंबई में उम्र संबंधी बीमारियों से निधन; दादर के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में अंतिम संस्कार।
उनका जन्म 27 सितंबर 1938 को कोच्चि में हुआ था; फिल्म निर्माता वी.
शांताराम ने 1951 में उन्हें 'संध्या' नाम दिया।
फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' ( 1957 ) को बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सिल्वर बियर और गोल्डन ग्लोब (सैमुअल गोल्डविन अवार्ड) मिला।
1961 की फिल्म 'स्त्री' में उन्होंने बिना बॉडी डबल के असली शेरों के साथ दृश्य फिल्माए।
फिल्मफेयर (मराठी) सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार दो बार — लावणी प्रदर्शन के लिए; वी.
शांताराम से विवाह 22 दिसंबर 1956 को।

अभिनेत्री संध्या (मूल नाम: विजया देशमुख), जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अपने अदम्य साहस और असाधारण समर्पण से एक अमिट छाप छोड़ी, का 4 अक्टूबर 2025 को मुंबई में निधन हो गया। 27 सितंबर 1938 को कोच्चि में एक रंगमंचीय परिवार में जन्मी संध्या ने भारतीय फिल्म इतिहास के कुछ सबसे यादगार और साहसी प्रदर्शन दिए। दादर के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

सिनेमाई सफर की शुरुआत

बेहतर करियर की तलाश में संध्या अपनी बहन वत्सला देशमुख के साथ बंबई (अब मुंबई) आईं और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता वी. शांताराम की मराठी फिल्म 'अमर भूपाली' (1951) के लिए अखबार में दिए एक विज्ञापन का जवाब दिया। ऑडिशन के दौरान शांताराम उनकी विशिष्ट आवाज से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने विजया देशमुख को सिनेमाई नाम 'संध्या' दिया। इस फिल्म में उन्होंने 'गुणवती' की भूमिका निभाई और यह कृति इतनी सशक्त रही कि 1952 के प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल में इसे 'पाल्मे डी ओर' के लिए नामांकित किया गया।

नृत्य और परिश्रम की अनूठी मिसाल

संध्या अपने करियर की शुरुआत में प्रशिक्षित शास्त्रीय नृत्यांगना नहीं थीं, फिर भी उन्होंने 1955 की रंगीन फिल्म 'झनक झनक पायल बाजे' के लिए मशहूर नर्तक गोपी कृष्ण के साथ तालमेल बिठाने हेतु महीनों तक कठोर प्रशिक्षण लिया। फिल्म में 'नीला' के रूप में उनका शिव तांडव और भावपूर्ण नृत्य उनके असाधारण परिश्रम का प्रमाण है। 1955 में इस हिंदी फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

असली शेरों के साथ खतरनाक शूटिंग

सिनेमा के प्रति संध्या का जुनून नृत्य मुद्राओं तक सीमित नहीं था। 1961 में आई फिल्म 'स्त्री' में उन्होंने वास्तविक शेरों के साथ दृश्य फिल्माने के लिए शेर प्रशिक्षकों के साथ रहकर उनकी गतिविधियाँ और व्यवहार समझा। गौरतलब है कि उन्होंने इन खतरनाक दृश्यों के लिए कोई 'बॉडी डबल' नहीं लिया — यह उनके साहस और भूमिका के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और पुरस्कार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने वाली फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' (1957) में उन्होंने 'चंपा' नामक खिलौने बेचने वाली एक महिला की भूमिका निभाई। इस फिल्म को बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सिल्वर बियर और हॉलीवुड फॉरेन प्रेस द्वारा सैमुअल गोल्डविन अवार्ड (गोल्डन ग्लोब) से नवाज़ा गया। फिल्म के गीत 'सैयां झूठों का बड़ा सरताज निकला' में सिर पर टोकरी का संतुलन, हाथ में रावणहत्था वाद्ययंत्र और चलते हुए जटिल भाव-भंगिमाओं ने उनके अभूतपूर्व मल्टीटास्किंग कौशल को उजागर किया।

लावणी को मुख्यधारा तक पहुँचाने का श्रेय

लगभग 40 वर्ष की आयु में संध्या ने 'तमाशा' नर्तकी 'चंद्रकला' की चुनौतीपूर्ण और बोल्ड भूमिका निभाई, जो एक आदर्शवादी स्कूल मास्टर के पतन का कारण बनती है। इस फिल्म ने महाराष्ट्र के पारंपरिक लावणी लोक नृत्य को मुख्यधारा के दर्शकों तक पहुँचाया। गीत 'मला लागली कुणाची उचकी' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर (मराठी) पुरस्कार मिला और 1975 में 'चंदनाची चोली अंग अंग जाली' के लिए पुनः यही सम्मान प्राप्त हुआ।

समर्पण और एकांत का जीवन

संध्या और वी. शांताराम का विवाह 22 दिसंबर 1956 को हुआ था। उन्होंने महबूब खान जैसे बड़े निर्देशकों के प्रस्ताव ठुकराकर अपना संपूर्ण करियर शांताराम के विजन को समर्पित किया। 1970 के दशक के अंत में अभिनय से संन्यास लेने के बाद वे सार्वजनिक जीवन से लगभग पूरी तरह दूर हो गईं और राजकमल स्टूडियो परिसर में शांत एकांत जीवन बिताया। 2009 में 'नवरंग' की 50वीं वर्षगांठ पर वी. शांताराम पुरस्कार समारोह में उनकी उपस्थिति एक दुर्लभ क्षण था। भारतीय सिनेमा की यह विरल प्रतिभा अपने पीछे अदम्य साहस, समर्पण और कलात्मकता की एक अमर विरासत छोड़ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब अभिनय महज़ व्यवसाय नहीं, बल्कि तपस्या थी। वी. शांताराम के विजन को संपूर्ण समर्पण देने का उनका निर्णय 'कलाकार बनाम स्टार' की बहस में एक दुर्लभ उदाहरण है — जहाँ उन्होंने महबूब खान जैसे दिग्गजों के प्रस्ताव ठुकराए। लावणी को जिस तरह उन्होंने मुख्यधारा के दर्शकों तक पहुँचाया, वह सांस्कृतिक योगदान आज भी कम आँका जाता है। शायद यही वजह थी कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी — उनके लिए कला से बड़ा कोई मंच नहीं था।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिनेत्री संध्या कौन थीं?
संध्या का असली नाम विजया देशमुख था, जिनका जन्म 27 सितंबर 1938 को कोच्चि में हुआ था। वी. शांताराम की फिल्मों से प्रसिद्ध हुई इस अभिनेत्री ने 'दो आंखें बारह हाथ' और 'झनक झनक पायल बाजे' जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी गई फिल्मों में अभिनय किया।
संध्या का निधन कब और कहाँ हुआ?
संध्या का निधन 4 अक्टूबर 2025 को मुंबई में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण हुआ। उन्हें दादर के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में अंतिम विदाई दी गई।
संध्या ने असली शेरों के साथ शूटिंग क्यों की?
1961 की फिल्म 'स्त्री' में सीन को यथार्थपूर्ण बनाने के लिए संध्या ने शेर प्रशिक्षकों के साथ रहकर शेरों की गतिविधियाँ सीखीं और बिना किसी बॉडी डबल के खतरनाक दृश्य फिल्माए। यह भूमिका के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता का प्रमाण था।
संध्या को कौन-से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले?
'दो आंखें बारह हाथ' (1957) को बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सिल्वर बियर और हॉलीवुड फॉरेन प्रेस द्वारा सैमुअल गोल्डविन अवार्ड (गोल्डन ग्लोब) से सम्मानित किया गया। 'अमर भूपाली' (1951) को 1952 के कान्स फेस्टिवल में 'पाल्मे डी ओर' के लिए नामांकित किया गया था।
वी. शांताराम से संध्या का क्या संबंध था?
संध्या और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता वी. शांताराम का विवाह 22 दिसंबर 1956 को हुआ था। संध्या ने महबूब खान जैसे बड़े निर्देशकों के प्रस्ताव अस्वीकार कर अपना संपूर्ण करियर केवल शांताराम के निर्देशन को समर्पित किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले