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बढ़ती उम्र में प्यार और भी गहराता है: सौरभ शुक्ला की नई फिल्म 'जब खुली किताब'

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बढ़ती उम्र में प्यार और भी गहराता है: सौरभ शुक्ला की नई फिल्म 'जब खुली किताब'

सारांश

सौरभ शुक्ला की नई फिल्म 'जब खुली किताब' दर्शाती है कि उम्र के साथ प्यार और भी खूबसूरत हो जाता है। यह एक वृद्ध दंपति की कहानी है, जो अपने रिश्ते में आए उथल-पुथल का सामना करते हैं।

मुख्य बातें

प्यार का स्वरूप उम्र के साथ बदलता है।
सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता।
फिल्म में वृद्ध दंपति की कहानी को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है।

मुंबई, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेता और फिल्म निर्माता सौरभ शुक्ला का मानना है कि उम्र के साथ प्यार का अहसास कम नहीं होता, बल्कि यह और भी गहरा और खूबसूरत बनता है। उनकी नवीनतम फिल्म 'जब खुली किताब' इसी धारणा पर आधारित है, जिसमें एक वृद्ध दंपति की सुखद शादीशुदा जिंदगी की कहानी दर्शाई गई है।

6 मार्च को जी5 पर रिलीज हुई इस फिल्म में गोपाल और अनुसूया नामक एक बुजुर्ग जोड़े की जिंदगी की कहानी दिखाई गई है, जो वर्षों से एक-दूसरे के साथ हैं। फिल्म की कहानी में यह दिखाया गया है कि सब कुछ सामान्य लग रहा है, लेकिन अचानक एक पुराना राज खुलने से उनके रिश्ते में तूफान आ जाता है। इस दौरान प्यार, लंबी यात्रा, माफी और एक-दूसरे को फिर से समझने की कोशिश की भावनाएं दर्शकों के दिल को छू लेती हैं। कहानी में हास्य और गहरे भावुक क्षण दोनों शामिल हैं।

सौरभ शुक्ला ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में बताया कि फिल्म बढ़ती उम्र में रोमांस और साथ रहने की सुंदरता को प्रस्तुत करती है, जो हिंदी सिनेमा में अभी भी बहुत कम देखने को मिलती है। स्क्रिप्ट लिखते समय कई लोगों ने उनसे सवाल किया था कि क्या युवा दर्शक वृद्ध कपल की कहानी में रुचि लेंगे? लेकिन सौरभ को इस पर कभी संदेह नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, "फिल्म में उम्रदराज कपल भले ही बाहर से बड़े दिखें, लेकिन उनके दिल में युवा भावनाएं जीवित रहती हैं। जब कोई भावनात्मक बदलाव आता है, तो उनकी जवानी की यादें फिर से जाग उठती हैं। वे बच्चों की तरह झगड़ते हैं, अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं और अपने इमोशंस को बाहर लाते हैं। इस प्रकार, युवा भी इस कहानी से आसानी से जुड़ सकते हैं, क्योंकि यह दो बुजुर्ग दिखने वाले युवा दिलों की कहानी है।"

सौरभ ने आगे कहा, "सिनेमा में प्यार को अक्सर जवानी से जोड़ा जाता है। युवावस्था में प्यार अधिक शारीरिक और हार्मोनल होता है, जिसमें उत्साह, जल्दबाजी और शारीरिक आकर्षण प्रमुख होते हैं। लेकिन प्यार कभी खत्म नहीं होता। हम प्यार करना कभी नहीं छोड़ते। प्यार का स्वरूप बदलता रहता है। जब आप सुबह उठते हैं और देखते हैं कि आपके बगल में सबसे खास इंसान सो रहा है, तो यह एहसास बेहद खूबसूरत और प्यारा होता है। वास्तव में, सच्चा प्यार उम्र की सीमाओं से परे है। यह फिल्म दर्शकों को याद दिलाती है कि जीवन के किसी भी चरण में प्यार मजबूत और सुंदर रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वृद्ध दंपतियों के प्यार और रिश्तों की गहराई को दर्शाती है। यह फिल्म दर्शकों को यह संदेश देती है कि प्यार का असली रूप उम्र के साथ और भी खूबसूरत हो सकता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'जब खुली किताब' की कहानी क्या है?
यह फिल्म एक वृद्ध दंपति की कहानी है जो अपने रिश्ते में आए उथल-पुथल का सामना करते हैं।
सौरभ शुक्ला का इस फिल्म के बारे में क्या कहना है?
सौरभ शुक्ला का मानना है कि उम्र के साथ प्यार और भी गहरा और खूबसूरत हो जाता है।
फिल्म कब रिलीज हुई थी?
फिल्म 'जब खुली किताब' 6 मार्च को जी5 पर रिलीज हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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