'राइज एंड फॉल 2' विजेता शहजाद पूनावाला बोले — गांधी की धरती पर हिंसा कभी नहीं हो सकती समाधान
सारांश
मुख्य बातें
रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल 2' के विजेता और राजनीतिक विश्लेषक शहजाद पूनावाला ने 6 नवंबर 2026 को मुंबई में एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि हिंसा किसी भी विवाद का समाधान नहीं हो सकती, खासकर महात्मा गांधी की धरती पर। उन्होंने यह बयान शो के दौरान को-कंटेस्टेंट सिवेत तोमर के साथ हुई कथित हाथापाई और उनके एविक्शन के संदर्भ में दिया।
मुख्य बयान
पूनावाला ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अब इस मामले पर अपनी राय देने की कोई जरूरत है। शो में सभी को उनके अपने किए की वजह से बाहर किया गया था और मैंने उसी समय उन्हें माफ कर दिया था। मेरे लिए वह चैप्टर बंद हो चुका है।'
उन्होंने आगे कहा, 'हमारे लोकतंत्र और महात्मा गांधी की धरती पर हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती। हमें हिंसा के बजाय शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर कोई बार-बार हिंसा का सहारा लेता है, तो यह उसकी बौद्धिक और अपनी बात रखने की क्षमता की कमी को दिखाता है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
शो में शहजाद पूनावाला और सिवेत तोमर ने शुरुआत में मिलकर गेम खेलने की रणनीति बनाई थी। हालाँकि, 'अल्टीमेट रूलर' रेस के दौरान दोनों के संबंधों में तनाव आ गया। उस रेस में सिवेत को सबसे कमज़ोर फैसले लेने वाला कंटेस्टेंट घोषित किया गया था।
इसके बाद जब सिवेत को किसी कमज़ोर कंटेस्टेंट का नाम लेने का अवसर मिला, तो उन्होंने शहजाद का नाम लिया — जिससे दोनों के बीच खटास और बढ़ गई। विवाद उस समय और गहरा हुआ जब सिवेत को स्वरा भास्कर से बातचीत करते देखा गया और शहजाद ने उनके बदले रवैये पर सवाल उठाए।
हाथापाई और एविक्शन
आरोप है कि बहस के दौरान सिवेत तोमर ने शहजाद पूनावाला की गर्दन पकड़कर उन्हें नीचे धक्का दे दिया। इस कथित घटना में शहजाद को चोट आई और उनके कपड़े भी फट गए। शो के नियमों के तहत सिवेत को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया।
पूनावाला ने बताया कि उन्होंने संबंधित लोगों को पहले ही माफ कर दिया है और इस मामले को अब और तूल नहीं देना चाहते।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण
गौरतलब है कि रियलिटी शो में हिंसा की घटनाओं को लेकर दर्शकों और आलोचकों में बहस पहले भी उठती रही है। शहजाद पूनावाला का यह बयान — कि शब्द शारीरिक ताकत से अधिक प्रभावशाली होते हैं — न केवल शो के संदर्भ में, बल्कि राजनीतिक संवाद की व्यापक संस्कृति पर भी एक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक जीवन में संवाद और असहमति की भाषा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएँ जारी हैं। पूनावाला का शो जीतना और इस शांत रुख को अपनाना दोनों को एक साथ देखना दिलचस्प है।