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श्रेया घोषाल का संगीतकार बनने का सफर, कहीं—'हर गायक के भीतर छिपा है एक रचनाकार'

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श्रेया घोषाल का संगीतकार बनने का सफर, कहीं—'हर गायक के भीतर छिपा है एक रचनाकार'

सारांश

श्रेया घोषाल ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में खुलासा किया कि हर गायक के अंदर एक संगीतकार छिपा होता है। समय की कमी के बावजूद, वह भविष्य में संगीत रचना की कला में अपना योगदान देने की इच्छुक हैं और लता मंगेशकर तथा आशा भोंसले की विरासत को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता श्रेया घोषाल ने कहा कि गायन और संगीत रचना अलग नहीं हैं।
श्रेया ने अपनी छोटी भाई के साथ मिलकर कुछ एकल गीत रिलीज़ किए हैं।
माइक पर होते समय गायक निरंतर रचनात्मक होते हैं और गीत में अपनी आत्मा डालते हैं।
समय की कमी के कारण श्रेया पूरी तरह संगीत रचना की ओर नहीं जा सकीं।
वह लता मंगेशकर और आशा भोंसले को अपना आदर्श मानती हैं।

मुंबई, 1 मई (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पार्श्व गायिका श्रेया घोषाल ने हिंदी सिनेमा में असंख्य सुरीले और रोमांटिक गानों से दर्शकों का दिल जीता है। उनकी मधुर आवाज़ सुनने वालों को मुग्ध कर देती है, लेकिन एक सफल गायक बनने के लिए सिर्फ़ गायन में दक्षता काफ़ी नहीं है — आंतरिक रूप से संगीत रचना की समझ भी ज़रूरी है। हाल ही में श्रेया घोषाल ने राष्ट्र प्रेस से विशेष साक्षात्कार में संगीत रचना के अपने दृष्टिकोण और इस यात्रा की चुनौतियों पर विस्तार से बात की।

गायन से रचना की ओर संघर्ष

गायक से संगीतकार बनने के कठिन रास्ते पर चलते हुए, श्रेया घोषाल ने कहा, "यह संघर्ष निरंतर है क्योंकि मैं इसे लगातार अनुभव करती हूँ। मैंने अपनी रचनाओं पर आधारित कुछ एकल गीत रिलीज़ किए हैं, जिन्हें मैंने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर तैयार किया है।" उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि गायन और संगीत रचना दो अलग-अलग विषय नहीं हैं। श्रेया का मानना है, "एक गायिका के अंदर एक संगीतकार हमेशा छिपा होता है।"

रचनात्मकता की सहज प्रक्रिया

श्रेया ने समझाया कि जब किसी गायक को कोई गीत दिया जाता है, तो संगीतकार हमेशा उन्हें शब्दशः पालन करने की अपेक्षा नहीं करते हैं। उन्होंने कहा, "जब आप माइक के सामने होते हैं, तो आप निरंतर रचनात्मक सोचते हैं। आप गीत में रंग भरते हैं, उसे निखारते हैं, और अपनी आत्मा उसमें प्रवाहित करते हैं। इसी प्रक्रिया में आप कुछ नई रचनाएँ और विचार जोड़ देते हैं, और यह एक बहुत ही स्वाभाविक प्रक्रिया है।"

समय की कमी का चुनौती

श्रेया घोषाल संगीत रचना की दुनिया में पूरी तरह कदम रखना चाहती हैं, लेकिन व्यस्त शेड्यूल के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया, "जब आप स्वतंत्र रूप से संगीत रचना करते हैं, तो आपको पूरी स्वतंत्रता मिलती है। फिल्मों के लिए संगीत बनाना कभी-कभी बहुत कठिन होता है, लेकिन समय की कमी के कारण मैं खुद को इस रास्ते से दूर रखती हूँ।" उन्होंने स्वीकार किया, "मैं यह करना चाहती हूँ, लेकिन मुझे एक चुनाव करना होगा, और मुझे लगता है कि मैं शायद एक संगीतकार के रूप में अभी उतनी सक्षम नहीं हूँ।"

लता-आशा की विरासत को आगे बढ़ाना

श्रेया घोषाल लता मंगेशकर और आशा भोंसले को अपनी प्रेरणा मानती हैं और उन दिग्गजों की तरह गायन में पारंगत होने के लक्ष्य को पूरा करना चाहती हैं। हालांकि, यदि भविष्य में समय मिला, तो वह संगीत रचना की कला में भी अपना हाथ आज़माएँगी। उन्होंने कहा, "संगीतकारों के प्रति मेरे मन में गहरा सम्मान है। यदि आप उनकी तुलना करें, तो पाएँगे कि वे अपने क्षेत्र में मुझसे कहीं आगे हैं। लेकिन संभव है कि भविष्य में मैं भी इसी तरह की कोशिश करूँ।"

भविष्य की संभावनाएँ

श्रेया की यह बातचीत दिखाती है कि वह अपने कला के प्रति कितनी समर्पित हैं और भविष्य में संगीत रचना के क्षेत्र में भी अवदान देने की इच्छुक हैं। उनके विचार न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कैसे एक कलाकार अपने कौशल को विभिन्न क्षेत्रों में विस्तारित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनका समय की कमी से संघर्ष एक व्यापक समस्या को दर्शाता है: भारतीय फिल्म उद्योग में पार्श्व गायकों को अक्सर केवल 'आवाज़' के रूप में देखा जाता है, न कि रचनात्मक कलाकारों के रूप में। लता-आशा के युग में, गायकों को संगीत रचना में भी अधिक स्वतंत्रता थी। आज की व्यावसायिक संरचना में, एक सफल पार्श्व गायक के लिए संगीतकार बनने की ओर मुड़ना एक विलासिता बन गई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रतिभा और इच्छा के बावजूद, समय की बाध्यता कलाकारों को उनके पूर्ण संभावित विकास से वंचित रखती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रेया घोषाल ने गायन और संगीत रचना के बारे में क्या कहा?
श्रेया घोषाल का मानना है कि हर गायक के भीतर एक संगीतकार छिपा होता है। उन्होंने कहा कि ये दो अलग-अलग रास्ते नहीं हैं, बल्कि जब कोई गायक माइक पर होता है, तो वह निरंतर रचनात्मक होता है और गीत में अपनी आत्मा डालता है।
क्या श्रेया घोषाल ने अपनी रचनाओं पर आधारित गीत रिलीज़ किए हैं?
हाँ, श्रेया घोषाल ने अपनी रचनाओं पर आधारित कुछ एकल गीत रिलीज़ किए हैं, जिन्हें उन्होंने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर तैयार किया है।
श्रेया घोषाल पूरी तरह संगीत रचना की ओर क्यों नहीं जा सकीं?
श्रेया ने स्वीकार किया कि समय की कमी के कारण वह पूरी तरह संगीत रचना की ओर नहीं जा सकीं। वह गायन में अपनी सफलता को जारी रखना चाहती हैं और एक सही समय का इंतज़ार कर रही हैं।
श्रेया घोषाल के संगीत प्रेरणा स्रोत कौन हैं?
श्रेया घोषाल लता मंगेशकर और आशा भोंसले को अपना आदर्श मानती हैं। उन्होंने कहा कि वह इन दिग्गजों की तरह गायन में पारंगत होने के लक्ष्य को पूरा करना चाहती हैं।
क्या श्रेया घोषाल भविष्य में संगीत रचना में आएँगी?
श्रेया ने कहा कि यदि भविष्य में समय मिला, तो वह संगीत रचना की कला में अपना हाथ आज़माएँगी, लेकिन वर्तमान में वह गायन पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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