शुभांगी अत्रे की पर्यावरण पर चेतावनी: ‘प्रदूषण नहीं रुका तो दुनिया खो देगी अपनी खूबसूरती’
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री शुभांगी अत्रे ने विश्व पर्यावरण दिवस से पहले प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि यदि इंसानों ने अपनी आदतों में जल्द बदलाव नहीं किया, तो प्रकृति का संतुलन गंभीर रूप से बिगड़ सकता है। मुंबई में 2 जून को राष्ट्र प्रेस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण, घटते जंगलों और बिगड़ते मौसम चक्र को सबसे बड़े खतरों में गिनाया।
प्रकृति से टूटता सामंजस्य
अभिनेत्री ने कहा, ‘आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि इंसान प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहना भूल गया है। पहले लोग प्रकृति का उपयोग अपनी जरूरतों के अनुसार करते थे, लेकिन अब प्राकृतिक संसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका असर धरती के हर हिस्से पर दिखाई देने लगा है।’
शुभांगी के अनुसार, जंगल लगातार कम होते जा रहे हैं और इसके चलते जानवरों का प्राकृतिक आवास छिनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई प्रजातियाँ संकट में हैं और मौसम का चक्र भी पहले जैसा नहीं रहा — ‘कभी अत्यधिक गर्मी पड़ती है तो कभी अचानक भारी बारिश हो जाती है।’
प्लास्टिक: ‘धीरे-धीरे फैलता ज़हर’
अभिनेत्री ने प्लास्टिक प्रदूषण को सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा, ‘प्लास्टिक ऐसा जहर है जो धीरे-धीरे पूरी प्रकृति को नुकसान पहुँचा रहा है। यह धरती और जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन जीव-जंतुओं को होता है, जो यह समझ ही नहीं पाते कि यह उनके लिए कितना खतरनाक है।’ उन्होंने जोड़ा कि कई बार जानवर प्लास्टिक को भोजन समझकर खा लेते हैं, जिससे उनकी जान तक चली जाती है।
रोज़मर्रा की आदतों में बदलाव की अपील
शुभांगी का कहना है कि पर्यावरण की रक्षा रोज़ाना के छोटे-छोटे प्रयासों से की जा सकती है। ‘जब कोई व्यक्ति प्रकृति से जुड़ा रहता है, तो वह जीवनशैली के प्रति ज्यादा जिम्मेदार होता है। यही जुड़ाव लोगों को सही विकल्प चुनने की प्रेरणा देता है,’ उन्होंने कहा। उनका यह संदेश ऐसे समय आया है जब 5 जून को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस से पहले देशभर में जलवायु जागरूकता अभियान तेज़ हो रहे हैं।
भविष्य को लेकर चेतावनी
अभिनेत्री ने आगाह किया कि अगर प्रदूषण इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो ‘दुनिया अपनी प्राकृतिक शांति और खूबसूरती खो सकती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रकृति केवल पेड़-पौधों या नदियों तक सीमित नहीं, बल्कि यह इंसानों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ी हुई है।
लोगों से अपील
शुभांगी अत्रे ने लोगों से कहा कि वे अपनी तेज़ रफ़्तार जिंदगी में कुछ समय प्रकृति को समझने और उसके महत्व को महसूस करने के लिए निकालें। ‘अगर हम धरती, पेड़-पौधों, नदियों और जीव-जंतुओं की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति भी हमें सुरक्षित और संतुलित जीवन देती रहेगी,’ उन्होंने कहा। आने वाले दिनों में सेलिब्रिटी आवाज़ों के ज़रिए इस तरह के संदेश पर्यावरणीय व्यवहार-परिवर्तन की मुहिम को नई ऊर्जा दे सकते हैं।