क्या बॉलीवुड के शोमैन सुभाष घई 'एम' नाम की हीरोइनों को मानते थे अपना लकी चार्म?
सारांश
Key Takeaways
- सुभाष घई ने कई सुपरहिट फिल्में निर्देशित कीं।
- उन्होंने 'एम' नाम की हीरोइनों को लकी माना।
- उनका फिल्म निर्देशन में योगदान महत्वपूर्ण है।
- उन्होंने फिल्म इंश्योरेंस की शुरुआत की।
- उनका फिल्म स्कूल नए टैलेंट को विकसित करने में मदद करता है।
मुंबई, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड में कुछ फिल्मकार ऐसे होते हैं, जिनकी फिल्में केवल कहानी और संगीत से नहीं, बल्कि उनके अनोखे अंदाज और स्टाइल से भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना लेती हैं। सुभाष घई ऐसे ही एक फिल्मकार हैं, जिनकी फिल्मों में ग्लैमर, ड्रामा और कहानी का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। उनके फिल्मी सफर में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि उन्होंने जितनी भी हीरोइनों को लॉन्च किया, उन सबका नाम 'एम' अक्षर से प्रारंभ होता है। यह उनका एक लकी फॉर्मूला था, जिसे उन्होंने कई फिल्मों में अपनाया और यह दर्शकों के लिए हमेशा यादगार बना रहा।
सुभाष घई का जन्म २४ जनवरी १९४५ को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उनके पिता दिल्ली में डेंटिस्ट थे। परिवार के सदस्य १९४७ के बंटवारे के बाद दिल्ली चले गए। सुभाष ने हरियाणा के रोहतक से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया और अपने सपनों को साकार करने के लिए पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लिया। यहीं उन्होंने सिनेमा की शिक्षा प्राप्त की और फिल्मी दुनिया में कदम रखा।
सुभाष घई ने फिल्म उद्योग में अपने करियर की शुरुआत अभिनेता के रूप में की थी। उन्होंने 'अराधना' जैसी फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए और 'उमंग', 'गुमराह', 'भारत के शहीद', 'शेरनी' और 'नाटक' जैसी फिल्मों में भी नजर आए। हालांकि, अभिनय में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली और पहचान भी कम बनी। लेकिन सुभाष ने हार नहीं मानी और डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा, जो उनके लिए एक नया मोड़ साबित हुआ।
डायरेक्टर के रूप में सुभाष घई की पहली फिल्म 'कालीचरण' १९७६ में रिलीज हुई। इसके बाद उन्होंने निरंतर कई सुपरहिट फिल्में दीं, जैसे 'हीरो', 'कर्ज', 'क्रोधी', 'विधाता', 'राम-लखन', 'सौदागर', 'खलनायक', 'परदेस' और 'ताल'। इन फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई और वह राज कपूर के बाद बॉलीवुड के दूसरे शोमैन माने जाने लगे।
सुभाष घई का यह खास अंदाज केवल फिल्मों की कहानी तक सीमित नहीं है। वह नई हीरोइनों को लॉन्च करने के लिए भी जाने जाते थे। उनके द्वारा लॉन्च की गई लगभग हर हीरोइन का नाम 'एम' अक्षर से शुरू होता था, जैसे फिल्म 'हीरो' में मीनाक्षी शेषाद्री, 'राम-लखन' में माधुरी दीक्षित, 'सौदागर' में मनीषा कोइराला और 'परदेस' में महिमा चौधरी। सुभाष घई का मानना था कि यह अक्षर उनके लिए लकी है और इसके कारण उनकी फिल्मों में हीरोइनों की चमक और सफलता दोनों बनी रहती थीं। उन्होंने ना केवल हीरोइनों को स्क्रीन पर पेश किया, बल्कि कई नए चेहरे भी इंडस्ट्री में लाए, जो बाद में बड़े नाम बन गए।
सुभाष घई ने निर्देशन के अलावा, फिल्मों का प्रोडक्शन भी किया। उन्होंने बॉलीवुड को तकनीक और प्रोडक्शन के मामले में कई नई चीजें दीं। उन्होंने फिल्म 'ताल' के जरिए फिल्म इंश्योरेंस पॉलिसी की शुरुआत की और फिल्म फाइनेंसिंग का नया तरीका पेश किया। इसके अलावा उन्होंने व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल फिल्म स्कूल खोला, जो आज दुनिया के शीर्ष फिल्म स्कूलों में गिना जाता है। इस स्कूल से कई बड़े फिल्ममेकर और कलाकार निकले हैं।
सुभाष घई के काम और उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं। साल २००६ में उन्हें फिल्म 'इकबाल' के लिए राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।