क्या सुभाष घई ने 80-90 के दशक से डिजिटल युग तक हिंदी सिनेमा में बदलाव की कहानी सुनाई?

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क्या सुभाष घई ने 80-90 के दशक से डिजिटल युग तक हिंदी सिनेमा में बदलाव की कहानी सुनाई?

सारांश

सुभाष घई ने अपने फिल्मी करियर के माध्यम से हिंदी सिनेमा की यात्रा को दर्शाया है। उन्होंने बताया कि कैसे सिनेमा ने समय के साथ बदलाव किए हैं और कैसे डिजिटल युग ने नए अवसर प्रदान किए हैं। उनकी सोच और अनुभव युवा फिल्म निर्माताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

Key Takeaways

  • सुभाष घई का फिल्मी सफर प्रेरणादायक है।
  • सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का आईना है।
  • डिजिटल युग ने नए अवसर प्रदान किए हैं।
  • फिल्म स्कूल युवा प्रतिभाओं के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है।
  • सिनेमा में बदलाव स्वाभाविक है और समय के अनुसार होता है।

मुंबई, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा के महान फिल्म निर्माता सुभाष घई ने भारतीय फिल्म उद्योग को कई दशकों तक नई दिशा दी है। उनकी फिल्मों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज, रिश्तों और भावनाओं को भी बड़े परदे पर मजबूती से प्रस्तुत किया।

राष्ट्र प्रेस को दिए गए इंटरव्यू में सुभाष घई ने अपने लंबे फिल्मी सफर को याद करते हुए उस समय की चर्चा की, जब उन्होंने सिनेमा की दुनिया में कदम रखा था और हर स्तर पर खुद को तैयार किया। उन्होंने कहा कि सिनेमा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और दिखाने का माध्यम है।

सुभाष घई ने बताया, "आज से लगभग 55 साल पहले मैं पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में अध्ययन कर रहा था। वहाँ मैंने अभिनय का कोर्स किया और विश्व सिनेमा को समझने का अवसर मिला। उस समय मैंने सिर्फ भारतीय फिल्में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर की फिल्मों को देखा और सीखा। यह अनुभव आगे चलकर मेरे करियर की नींव बना।"

उन्होंने कहा, "पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने सीधे निर्देशन का कार्य नहीं किया। पहले तीन साल तक मैंने अभिनय किया, फिर तीन साल लेखक के रूप में काम किया और उसके बाद तीन साल निर्देशन में बिताए। मेरा मानना है कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने से पहले उसकी बुनियाद को समझना आवश्यक है। अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने से मुझे सिनेमा को हर एंगल से समझने का अवसर मिला।"

सुभाष घई ने कहा, "इसके बाद मैंने निर्माता और निर्देशक के रूप में लगभग 18 से 19 फिल्में बनाई। जब मेरा प्रोडक्शन हाउस मजबूत हुआ, तो मैंने अपनी कंपनी को शेयर बाजार में लाया। इसके बाद मैंने फिल्म वितरण का कार्य संभाला और फिर सिनेमाघरों से भी जुड़ गया। फिल्म इंडस्ट्री एक विशाल प्रणाली है और इसे सही तरीके से समझने के लिए, हर हिस्से को जानना आवश्यक है।"

सुभाष घई ने आगे बताया कि इसी सोच के साथ मैंने एक फिल्म स्कूल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य उन युवाओं की मदद करना है, जो सपने लेकर मुंबई आते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि किस स्टूडियो में जाना है, किससे मिलना है, और अपना प्रतिभा कैसे दिखाना है।

उन्होंने कहा, "फिल्म स्कूल में बच्चे दो-तीन साल रहकर उद्योग से जुड़ते हैं, विशेषज्ञों से सीखते हैं, अभ्यास करते हैं और फिर तैयार होकर फिल्मी दुनिया में कदम रखते हैं।"

फिल्म इंडस्ट्री में आए बदलावों पर बात करते हुए सुभाष घई ने कहा, "बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। हर 30 साल में नए लेखक और निर्देशक आते हैं, जो अपनी सोच और समय के अनुसार कहानियां बनाते हैं। सिनेमा समाज का आईना होता है, इसलिए जैसे लोग बदलते हैं, समय बदलता है और हालात बदलते हैं, वैसे ही फिल्मों की कहानियां और उन्हें प्रस्तुत करने का तरीका भी बदल जाता है।"

उन्होंने कहा, "आज की फिल्में 80 और 90 के दशक जैसी नहीं हो सकतीं। उस समय के दर्शक, उनकी पसंद और परिस्थितियां अलग थीं। आज का दर्शक ज्यादा जागरूक है और नए प्रकार की कहानियां देखना चाहता है। इसलिए फिल्मों की भाषा, भावनाएं और प्रस्तुति भी बदल गई है।"

डिजिटल युग पर बात करते हुए सुभाष घई ने कहा, "इससे इंडस्ट्री को कई नई सुविधाएं मिली हैं। आज सिर्फ सिनेमा ही नहीं, बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म, वेब सीरीज और टेलीविजन भी मजबूत माध्यम बन चुके हैं। इससे युवा कलाकारों और कहानीकारों को अपनी बात कहने के कई मौके मिले हैं। आज सिनेमा अकेला नहीं है, बल्कि इसके साथ कई अन्य मंच हैं, जो नए प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका दे रहे हैं।"

Point of View

मैं यह मानता हूँ कि सुभाष घई का अनुभव और दृष्टिकोण हमें हिंदी सिनेमा के विकास और बदलाव को समझने में मदद करता है। यह जरूरी है कि हम सिनेमा को केवल एक कला नहीं, बल्कि एक सामाजिक माध्यम के रूप में देखें।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

सुभाष घई का फिल्मी करियर कैसे शुरू हुआ?
सुभाष घई ने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अभिनय का कोर्स किया और उसके बाद विभिन्न भूमिकाओं में काम किया।
डिजिटल युग का सिनेमा पर क्या प्रभाव पड़ा है?
डिजिटल युग ने ओटीटी प्लेटफॉर्म और वेब सीरीज को लोकप्रिय बनाया है, जिससे युवा कलाकारों को अपने विचार व्यक्त करने के नए अवसर मिले हैं।
सुभाष घई ने कितनी फिल्में बनाई हैं?
सुभाष घई ने निर्माता और निर्देशक के रूप में लगभग 18 से 19 फिल्में बनाई हैं।
फिल्म स्कूल की स्थापना का उद्देश्य क्या है?
फिल्म स्कूल का उद्देश्य उन युवाओं को मार्गदर्शन देना है जो मुंबई में फिल्म उद्योग में करियर बनाने की चाह रखते हैं।
सिनेमा में बदलाव की प्रक्रिया कैसे होती है?
सिनेमा में बदलाव समाज के बदलाव के साथ होता है, जहाँ नए लेखक और निर्देशक अपनी सोच के अनुसार कहानियाँ प्रस्तुत करते हैं।
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