क्या सुप्रिया पाठक ने हर किरदार में जान डालकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है?
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रिया पाठक ने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए हैं।
- उन्हें तीन फिल्मफेयर अवार्ड्स मिल चुके हैं।
- उनकी सबसे प्रसिद्ध भूमिका टीवी शो ‘खिचड़ी’ की हंसा है।
- सुप्रिया का परिवार फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा है।
- सुप्रिया ने सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
मुंबई, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे एक्टर हैं, जो विभिन्न जॉनर में अपनी अदाकारी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत अभिनेत्री हैं सुप्रिया पाठक। टीवी की मासूम और प्यारी ‘हंसा’ से लेकर फिल्म ‘राम-लीला’ की सख्त और प्रभावशाली ‘धनकोर बा’ तक, वह हर किरदार में अद्भुत रूप से ढल जाती हैं। अपनी शानदार और जीवंत अभिनय कला के माध्यम से सुप्रिया ने लाखों दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया है।
7 जनवरी 1961 को जन्मी सुप्रिया ने कॉमेडी से लेकर नेगेटिव रोल तक हर प्रकार के किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाया है। टीवी की ‘हंसा’ से लेकर फिल्मों में ‘धनकोर बा’ तक, वह हर भूमिका में पूरी तरह से समाहित हो जाती हैं। उनके अदाकारी को कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें तीन फिल्मफेयर अवार्ड्स शामिल हैं।
सुप्रिया की फिल्मी यात्रा की शुरुआत 1981 में आई फिल्म ‘कलयुग’ से हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने सुभद्रा का किरदार निभाया था, जो महाभारत से प्रेरित था। यह एक जटिल भूमिका थी जिसमें उन्होंने गहराई से अभिनय किया था। इस भूमिका के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवार्ड मिला। यह उनकी डेब्यू फिल्म थी, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।
1982 में आई फिल्म ‘बाजार’ में सुप्रिया ने शबनम का रोल अदा किया। यह किरदार गरीबी और सामाजिक कुरीतियों का सामना करती एक युवती का था। उनकी संवेदनशील और भावुक अदाकारी के कारण यह रोल यादगार बन गया। इस प्रदर्शन को भरपूर सराहना मिली। इस फिल्म में सामाजिक मुद्दों को उठाया गया था और सुप्रिया की अदाकारी ने इसे और प्रभावी बनाया। इसी वर्ष, रिचर्ड एटनबरो की फिल्म ‘गांधी’ में सुप्रिया ने छोटा लेकिन महत्वपूर्ण रोल निभाया। वह महात्मा गांधी की भतीजी के किरदार में थीं। यह एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म थी, जिसमें उनके अभिनय की बहुत प्रशंसा हुई।
1987 में रिलीज हुई ‘मिर्च मसाला’ में सुप्रिया ने एक मजदूर महिला का किरदार निभाया, जो गांव की महिलाओं की एकजुटता को दर्शाता है। यह फिल्म भी सामाजिक मुद्दों पर आधारित थी और सुप्रिया की परफॉर्मेंस ने इसे और मजबूती प्रदान की। 2005 में लंबे अंतराल के बाद, सुप्रिया ‘सरकार’ में लौटीं, जहां उन्होंने एक राजनीतिक परिवार की सदस्य का किरदार निभाया। इसके बाद 2008 में ‘सरकार राज’ में भी उन्होंने दमदार अदाकारी की। ये रोल उनकी वापसी के मजबूत प्रतीक थे।
2013 में, संजय लीला भंसाली की ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ में, सुप्रिया ने धनकोर बा का नेगेटिव किरदार निभाया। यह एक क्रूर और प्रभावशाली मातृसत्ता वाली महिला थी। उनकी तीखी और दमदार अदाकारी ने दर्शकों को चौंका दिया। इस भूमिका के लिए उन्हें फिर से फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवार्ड प्राप्त हुआ।
सुप्रिया की पहचान टीवी शो ‘खिचड़ी’ की हंसा के रूप में बनी है। यह एक साधारण लेकिन थोड़ी नासमझ गृहिणी का किरदार है, जिसकी मासूमियत और कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। आज भी लोग उन्हें ‘हंसा’ के नाम से जानते हैं। इस रोल ने उन्हें कॉमेडी की क्वीन बना दिया। इसी टाइटल की फिल्म में भी उन्हें बहुत पसंद किया गया।
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो सुप्रिया, अभिनेत्री दीना पाठक की बेटी और रत्ना पाठक शाह की बहन हैं। 1988 में उन्होंने अभिनेता पंकज कपूर से विवाह किया। पंकज की पहली शादी से उनका सौतेला बेटा शाहिद कपूर है, जिससे उनका गहरा लगाव है। सुप्रिया और पंकज के दो बच्चे हैं, बेटी सनाह कपूर और बेटा रुहान कपूर।