क्या सुरों के बादशाह उदित नारायण को लता मंगेशकर ने 'प्रिंस ऑफ प्लेबैक सिंगिंग' कहा?
सारांश
Key Takeaways
- उदित नारायण का संघर्ष और सफलता की कहानी प्रेरणादायक है।
- लता मंगेशकर का खिताब उनके काम की प्रशंसा है।
- उदित की आवाज़ में जादू है, जो उन्हें अद्वितीय बनाता है।
- उन्होंने कई प्रसिद्ध फिल्मों में गाने गाए हैं।
- उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं।
मुंबई, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड के संगीत क्षेत्र में कुछ गायकों की आवाज़ में ऐसा जादू होता है कि जिसे सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। उदित नारायण ऐसे ही एक अद्भुत गायक हैं। उनकी आवाज़ की मिठास और नर्म एहसास हर किसी के दिल को छू लेती है। इसी कारण भारत की संगीत सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने उन्हें 'प्रिंस ऑफ प्लेबैक सिंगिंग' का विशेष खिताब दिया।
उदित नारायण की कहानी संघर्ष, परिश्रम और जुनून की कहानी है। उनका जन्म 1 दिसंबर 1955 को नेपाल के सपतारी जिले में एक मैथिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता हरेकृष्ण झा एक किसान थे और मां भुवनेश्वरी झा एक लोक गायिका थीं। मां की प्रेरणा से उदित में संगीत के प्रति रुचि जागृत हुई। उन्होंने बचपन से ही गांव और स्कूल के छोटे मंचों पर गाना शुरू किया। 1971 में उन्हें काठमांडू रेडियो पर पहली बार गाने का मौका मिला, जहाँ उन्होंने मैथिली गाना 'सुन-सुन-सुन पनभरनी गे तनी घुरिये के तक' गाया, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। यह उनके करियर की पहली महत्वपूर्ण पहचान थी।
संगीत में करियर बनाने के लिए वे 1978 में मुंबई आए। शुरुआत में उन्हें काफी संघर्ष झेलना पड़ा। उन्होंने एक होटल में 100 रुपए की सैलरी पर काम किया और इस दौरान भारतीय विद्या भवन से संगीत की शिक्षा भी ली। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें बॉलीवुड में अवसर दिलाया। 1980 में उन्हें फिल्म 'उन्नीस बीस' के लिए अपना पहला गाना गाने का मौका मिला, जहाँ उन्होंने महान गायक मोहम्मद रफी के साथ आवाज़ मिलाई।
लेकिन उन्हें असली पहचान 1988 में मिली, जब उन्होंने आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'कयामत से कयामत तक' के लिए गाना 'पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा' गाया। यह गाना इतना प्रसिद्ध हुआ कि उदित को पहली बार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला और उनके करियर को नई ऊंचाई मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उदित नारायण ने 'कुछ कुछ होता है', 'हम साथ-साथ हैं', 'धड़कन', 'तेरे नाम', 'स्वदेश', 'वीर-जारा' जैसी कई फिल्मों के लिए आवाज दी।
उदित नारायण की आवाज़ की मिठास और जादू ने लता मंगेशकर को भी गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने उदित को 'प्रिंस ऑफ प्लेबैक सिंगिंग' कहा। उनके गाने न केवल सुपरहिट रहे हैं, बल्कि आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
उदित नारायण को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले हैं। उन्हें 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्होंने चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी जीते। उन्होंने अपनी आवाज़ से 30 से अधिक भाषाओं में 15,000 से ज्यादा गाने गाए हैं।