प्रतीक चौधरी बोले — वर्टिकल फॉर्मेट में टाइमिंग सबसे कठिन, यही एक्टर को निखारती है
सारांश
मुख्य बातें
टेलीविजन अभिनेता प्रतीक चौधरी इन दिनों बालाजी टेलीफिल्म्स की वर्टिकल सीरीज 'साइलेंट शिकारी' में अपनी अदाकारी से दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं। अभिनेता ने हाल ही में एक बातचीत में खुलकर बताया कि वर्टिकल फॉर्मेट में टाइमिंग की चुनौती किसी भी अन्य माध्यम से कहीं अधिक कठिन है — और यही संघर्ष एक कलाकार को असल में माँजता है।
बालाजी के साथ काम का अनुभव
प्रतीक चौधरी ने कहा, 'बालाजी के साथ इस सीरीज में मैंने दो दिन का काम किया था और मेरा अनुभव बहुत शानदार रहा है। मुझे लगता है कि हर वो एक्टर अपने आपको खुशकिस्मत समझेगा, जिसे बालाजी के साथ काम करने का मौका मिला है क्योंकि उनके कंटेंट बहुत शानदार रहते हैं और उनके शूट करने का तरीका दूसरों से काफी अलग है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं कि अन्य प्रोडक्शन हाउस या निर्देशकों का काम कमतर है, लेकिन बालाजी की चुनौतियाँ एक अलग ही स्तर की होती हैं।
वर्टिकल बनाम वेब सीरीज — क्या है फ़र्क
अभिनेता ने वर्टिकल और वेब सीरीज के बीच के अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों अपने-अपने तरीके से अनूठे हैं। उनके अनुसार, वर्टिकल फॉर्मेट में टेलीविजन की पूरी कहानी को एक नए सांचे में ढालना पड़ता है। उन्होंने माना कि पहले उन्हें टेलीविजन सबसे कठिन लगता था, लेकिन वर्टिकल में काम करने के बाद उनकी राय बदल गई।
उन्होंने कहा, 'सबसे बड़ी समस्या टाइमिंग की है। हमें चीजों को ठीक से करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता, लेकिन मुझे लगता है कि यही चुनौती एक एक्टर को उसके काम में बेहतर बनाती है।' गौरतलब है कि वर्टिकल फॉर्मेट में एपिसोड महज पाँच से दस मिनट के होते हैं, जबकि सीन खुद बेहद लंबे होते हैं।
अभिनय में वर्टिकल फॉर्मेट की सीख
प्रतीक ने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि उन्होंने अभिनय केवल टेलीविजन से सीखा है, लेकिन वर्टिकल में काम करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि इस फॉर्मेट ने भी उन्हें उतना ही सिखाया है। कुछ ही दिनों में बड़ी संख्या में सीन शूट करने की बाध्यता एक अभिनेता को व्यावहारिक अनुभव देती है जो स्टूडियो की किसी क्लास में नहीं मिलता।
उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि पाँच से दस मिनट के छोटे क्लिप्स होते हैं, लेकिन सीन खुद बहुत लंबे होते हैं। एक एक्टर के तौर पर इतने कम समय में इतने सारे सीन करना आपको बहुत अनुभव देता है।'
नए निर्देशकों के साथ काम — एक अतिरिक्त फायदा
प्रतीक चौधरी ने वर्टिकल फॉर्मेट की एक और खासियत साझा की। उनके अनुसार, टेलीविजन में एक निश्चित टीम और दो-तीन निर्देशकों के साथ काम होता है, जबकि वर्टिकल में बार-बार नए निर्देशकों और नए कंटेंट से सामना होता है। उन्होंने कहा, 'हमेशा एक फिक्स टीम नहीं होती, तो एक एक्टर के तौर पर आप बहुत कुछ एक्सप्लोर कर सकते हैं और बहुत कुछ सीख सकते हैं।' यह विविधता ही उन्हें वर्टिकल फॉर्मेट में सबसे आकर्षक लगती है।
आगे क्या
'साइलेंट शिकारी' में प्रतीक चौधरी की भूमिका पर दर्शकों की नज़रें टिकी हैं। वर्टिकल फॉर्मेट भारतीय ओटीटी और मोबाइल दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, और बालाजी टेलीफिल्म्स जैसे स्थापित प्रोडक्शन हाउस की इसमें बढ़ती भागीदारी इस माध्यम के भविष्य को और उज्जवल बनाती दिख रही है।