पल्लवी जोशी को 'पत्नी' बताने पर विवेक अग्निहोत्री का तीखा जवाब: 'यह पत्रकारिता नहीं, पितृसत्ता है'
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने 17 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जब एक मीडिया रिपोर्ट में अभिनेत्री पल्लवी जोशी का परिचय मुख्य रूप से 'विवेक अग्निहोत्री की पत्नी' के रूप में दिया गया। यह रिपोर्ट केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के नए 18 सदस्यीय बोर्ड की नियुक्ति से जुड़ी थी, जिसमें पल्लवी जोशी को भी स्थान मिला है।
CBFC के नए बोर्ड में पल्लवी जोशी की नियुक्ति
केंद्र सरकार ने बुधवार, 17 सितंबर को CBFC के नए बोर्ड का गठन किया। इस 18 सदस्यीय बोर्ड में प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और सुनील शेट्टी सहित कई著名 हस्तियों को शामिल किया गया है। नए बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक निर्धारित किया गया है।
इसी नियुक्ति से संबंधित एक खबर में पल्लवी जोशी का परिचय देते हुए उन्हें 'फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की पत्नी' और 'द कश्मीर फाइल्स' की कलाकार एवं निर्माता के रूप में वर्णित किया गया था। इसी वर्णन ने विवेक अग्निहोत्री को सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने पर विवश किया।
विवेक अग्निहोत्री की तीखी प्रतिक्रिया
अग्निहोत्री ने उस खबर का लिंक एक्स पर साझा करते हुए लिखा, 'यह किस तरह की, तीसरे दर्जे की, दुर्भावनापूर्ण और महिला-विरोधी पत्रकारिता है? पल्लवी जोशी चार बार की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री हैं। उन्होंने चार साल की उम्र में अभिनय शुरू कर दिया था।'
उन्होंने आगे कहा कि पल्लवी जोशी उस दौर में भारत के सबसे जाने-माने टीवी कलाकारों में शामिल हो चुकी थीं, जब खबर लिखने वाले कई पत्रकारों का जन्म भी नहीं हुआ था। अग्निहोत्री ने यह भी स्वीकार किया कि जब पल्लवी ने भारतीय नौसेना की महिलाओं पर केंद्रित ऐतिहासिक धारावाहिक 'आरोहण' का निर्माण किया था, तब उन्हें खुद प्रोडक्शन की कोई समझ नहीं थी।
पितृसत्ता और पहचान पर सवाल
अग्निहोत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'इन सबके बावजूद जब आप एक सफल और आत्मनिर्भर महिला के बारे में लिखते हैं, तो आप उनका परिचय मुख्य रूप से फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री की पत्नी के रूप में कराना चुनते हैं। क्यों?... क्योंकि शायद अब भी आपको लगता है कि किसी महिला की अपनी उपलब्धियाँ उसकी पहचान तय करने के लिए काफी नहीं हैं। यही पितृसत्ता का असली तरीका है।'
उन्होंने कहा, 'पल्लवी जोशी ने अपनी पहचान किसी से उधार नहीं ली। उन्होंने चार दशकों के अभिनय, टेलीविजन, सिनेमा, निर्माण और अपने असाधारण काम के जरिए अपनी पहचान खुद बनाई है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कोई एक सफल, स्वतंत्र महिला को उसके अपने दम पर स्वीकार नहीं कर सकता और उसे उसके पति के जरिए ही परिभाषित करने को मजबूर महसूस करता है, तो 'समस्या पल्लवी जोशी में नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की गहरी पितृसत्तात्मक सोच में है।'
वैकल्पिक हेडलाइन का सुझाव
अग्निहोत्री ने एक वैकल्पिक हेडलाइन भी सुझाई — 'पल्लवी जोशी: तीन बार की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री, जिन्होंने श्याम बेनेगल की 'द मेकिंग ऑफ द महात्मा' में कस्तूरबा की भूमिका निभाई, भारतीय टेलीविजन में क्रांति लाई, 'द कश्मीर फाइल्स' में यादगार किरदार निभाया और सार्थक सिनेमा का निर्माण किया — फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री की पत्नी भी हैं।'
उन्होंने कहा, 'फर्क दिखा? पहली हेडलाइन बताती है कि वह कौन हैं। दूसरी हेडलाइन बताती है कि वह किसकी पत्नी हैं। यह फर्क पत्रकारिता नहीं है — यह पत्रकारिता के मुखौटे में छुपी पितृसत्ता है।'
महिला सशक्तीकरण और मीडिया जवाबदेही
अग्निहोत्री ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि उन्हें हैरानी है कि कुछ वेबसाइटें चंद अतिरिक्त व्यूज़ के लिए ऐसी हेडलाइन को बढ़ावा दे रही हैं या उसका बचाव कर रही हैं। उनका कहना था, 'महिला सशक्तीकरण की बात तभी पूरी मानी जा सकती है, जब अलग-अलग महिलाओं के मामले में भी एक जैसा नजरिया रखा जाए।' यह बहस मीडिया में महिलाओं की पहचान को लेकर एक व्यापक सवाल खड़ा करती है, जो आने वाले समय में और गहरी होने की संभावना है।