क्या 'फाइल्स' ट्रायोलॉजी के बाद विवेक रंजन अग्निहोत्री नई दिशा में फिल्म बनाएंगे?
सारांश
Key Takeaways
- विवेक रंजन अग्निहोत्री ने अपनी ट्रायोलॉजी पूरी की है।
- वह नई प्रेरणादायक फिल्में बनाने की योजना बना रहे हैं।
- युवाओं को मार्गदर्शन देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- सोशल मीडिया से हटकर शैक्षणिक लेखों पर ध्यान दिया जाएगा।
- वह ओटीटी प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं।
मुंबई, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की वर्ष 2025 में प्रदर्शित होने वाली 'द बंगाल फाइल्स' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करने में सफल रही। 'द ताशकंद फाइल्स', 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द बंगाल फाइल्स' की चर्चित ट्रायोलॉजी को पूरा करने के बाद विवेक रंजन अग्निहोत्री अब एक नई दिशा में कार्य कर रहे हैं।
हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि ट्रायोलॉजी के बाद वह अब नई और प्रेरणादायक फिल्में बनाएंगे, जो लोगों को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने बताया कि अब वह कुछ विशेष प्रकार की फिल्मों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहे हैं, जिनका केंद्र बिंदु देश होगा। इस वर्ष वे तीन मुख्य चीजों पर ध्यान दे रहे हैं - नई प्रेरणादायक फिल्में, लेखन और युवा प्रतिभाओं को मार्गदर्शन देना।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में विवेक रंजन ने कहा, 'द बंगाल फाइल्स' की रिलीज के बाद मैंने दो महीने अपनी पत्नी के साथ बाहर बिताए। इस दौरान मैंने खुद के बारे में, समाज, राष्ट्र और फिल्मों के बारे में गहराई से विचार किया। अब मैं नई ऊर्जा और उत्साह के साथ फिल्में बनाना चाहता हूं। वर्ष 2012 में मैंने 'द ताशकंद फाइल्स', 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द बंगाल फाइल्स' की ट्रायोलॉजी की घोषणा की थी। इन फिल्मों को पूरा करने में बहुत संघर्ष और बलिदान देना पड़ा। इनमें से दो फिल्में सुपरहिट रहीं और 'द बंगाल फाइल्स' ने ऐसा प्रभाव डाला कि आने वाले वर्षों में इसकी चर्चा होती रहेगी। अब मैं अलग प्रकार की कहानियों पर काम करने की योजना बना रहा हूं। ऐसी फिल्में जो लोगों को प्रेरित करें कि राष्ट्र की बागडोर अपने हाथ में लें।
उन्होंने आगे कहा, वास्तव में आज का सत्य क्या है, उससे कैसे जूझें और कैसे लड़ें? नई आशा, उमंग और उत्साह के साथ भारत का पुनर्निर्माण कैसे करें? बहुत समय हो गया है जब हमने भारत का वर्तमान और भविष्य सरकारों और राजनेताओं के हाथ में छोड़ दिया। स्वतंत्रता संग्राम की तरह अब युवाओं को बागडोर संभालनी होगी। इसलिए अब मैं प्रेरणादायक और सकारात्मक कहानियां दिखाना चाहता हूं।
सोशल मीडिया के बारे में विवेक ने कहा कि वे 2008 से काफी सक्रिय रहे हैं और जागरूकता फैलाते रहे हैं, लेकिन अब सोशल मीडिया पैसे से जुड़ गया है। इसमें गंदगी, मनमुटाव, गाली-गलौज, नफरत और मनोवैज्ञानिक हिंसा बढ़ गई है। महिलाओं और गरीबों के लिए सम्मान नहीं रहा। इसलिए वे सोशल मीडिया से हटकर लंबे लेख, शैक्षणिक मूल्य वाले लेखों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने सबस्टैक और अन्य प्लेटफार्मों पर स्वतंत्र लेखन शुरू किया है। इसके अलावा वे युवा फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण में मार्गदर्शन देने की योजना बना रहे हैं। उनकी कंपनी 'आई एम बुद्ध' अब तक सिर्फ उनकी फिल्में प्रोड्यूस करती थी, लेकिन अब कई युवा फिल्में प्रोड्यूस और मार्गदर्शित कर रही है। खासकर छोटे शहरों से आने वाले, कम अंग्रेजी जानने वाले लेकिन प्रतिभाशाली युवा लड़के-लड़कियां, जिन्हें मौका नहीं मिलता।
उन्होंने दो ऐसी फिल्मों को मार्गदर्शित किया है जो बनकर तैयार हैं, संपादित हो चुकी हैं और सीबीएफसी में आवेदन भी कर दिया गया है। ये फिल्में बहुत अलग हैं। यही नहीं, वह ओटीटी के लिए भी काम कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ शोध-आधारित प्रोजेक्ट्स पर। वह स्वयं एक बड़ी फिल्म पर काम कर रहे हैं, जिसका शोध शुरू हो चुका है। कोई डेडलाइन नहीं है।