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जाकिर खान का अनसुना किस्सा: घर बनाते वक्त खुद बने चौथे मजदूर, संगीत से भरे बचपन की यादें साझा कीं

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जाकिर खान का अनसुना किस्सा: घर बनाते वक्त खुद बने चौथे मजदूर, संगीत से भरे बचपन की यादें साझा कीं

सारांश

कॉमेडी के मंच पर हँसाने वाले जाकिर खान ने 'पहला पहला' पॉडकास्ट में एक अलग ही रूप दिखाया — घर बनाते वक्त खुद चौथे मजदूर बने, निर्माण सामग्री तैयार की। उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते की यह संघर्षगाथा बताती है कि उनकी हँसी के पीछे कितनी गहरी मेहनत और विरासत है।

मुख्य बातें

जाकिर खान ने अभिनेता गोपाल दत्त के पॉडकास्ट 'पहला पहला' में अपने संघर्ष के दिनों के किस्से साझा किए।
घर निर्माण के दौरान जाकिर ने तीन मजदूरों के साथ खुद चौथे मजदूर की भूमिका निभाई और निर्माण सामग्री तैयार की।
जाकिर खान मशहूर सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते हैं; उनका बचपन मुंबई बाज़ार के संगीतमय घर में बीता।
घर में पाँच युवा लड़कों को संगीत की शिक्षा दी जाती थी और दादा जी हफ्ते में एक-दो बार आकाशवाणी जाते थे।
पॉडकास्ट IVM पॉप के यूट्यूब चैनल और अन्य ऑडियो मंचों पर उपलब्ध है।

मशहूर कॉमेडियन जाकिर खान ने हाल ही में अभिनेता गोपाल दत्त के पॉडकास्ट 'पहला पहला' में अपनी जिंदगी के शुरुआती और अनजाने पहलुओं को खुलकर साझा किया। 5 अगस्त को प्रसारित इस बातचीत में जाकिर ने बताया कि घर निर्माण के दौरान वह खुद एक मजदूर की तरह काम करते थे और निर्माण सामग्री तैयार करने का अनुभव उन्हें भली-भाँति है। संघर्ष, परिवार और संगीत की विरासत से जुड़े ये किस्से उनके लाखों प्रशंसकों के लिए एक नई रोशनी लेकर आए।

घर निर्माण में खुद उठाया हथौड़ा

जाकिर खान ने पॉडकास्ट में बताया कि जब उनका घर बन रहा था, उस दौरान वह उसी जगह रह रहे थे और निर्माण कार्य में सक्रिय रूप से हाथ बँटाते थे। उन्होंने कहा, 'मैं आपको अपने घर के बारे में एक दिलचस्प बात बताता हूँ। घर जब बन रहा था, तब मैं वहीं रह रहा था। उसमें हमारी मेहनत लगी हुई थी। हमें चार मजदूरों की ज़रूरत थी, लेकिन हमने केवल तीन मजदूर रखे। चौथा इंसान मैं खुद था। मैंने निर्माण सामग्री बनाई है।' यह खुलासा इस बात का प्रमाण है कि सफलता के पीछे उनकी ज़िंदगी में कितना व्यावहारिक संघर्ष रहा है।

संगीत से सराबोर था बचपन का माहौल

जाकिर खान मशहूर सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते हैं। उनका बचपन मुंबई बाज़ार स्थित उस घर में बीता जहाँ सुबह से शाम तक संगीत की धुनें गूँजती रहती थीं। उन्होंने बताया, 'हर सुबह करीब पाँच या छह बजे दादा जी संगीत का अभ्यास करते थे। वह अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में थे, लेकिन संगीत के प्रति उनका समर्पण बहुत गहरा था।'

घर में पाँच युवा लड़कों को नियमित रूप से संगीत की शिक्षा दी जाती थी और बाहर से भी कई विद्यार्थी सीखने आते थे। जाकिर ने बताया कि कभी-कभी घंटों तक तबले की साधना होती थी, तो कभी सितार और सारंगी की धुनें पूरे घर में गूँजती थीं।

आकाशवाणी और बड़े कलाकारों से नज़दीकी

जाकिर ने यह भी बताया कि उनके दादा जी हफ्ते में एक या दो बार आकाशवाणी जाते थे, जहाँ बड़े कलाकार और गज़ल गायक अपनी प्रस्तुतियाँ देते थे। कई प्रसिद्ध कलाकार उनके घर भी आते थे। उन्होंने कहा, 'मैं संगीत के माहौल के बीच बड़ा हुआ, और मेरे आसपास हमेशा कला और कलाकारों की मौजूदगी रही।' यह पृष्ठभूमि उनकी कॉमेडी में भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि की जड़ें समझाती है।

पॉडकास्ट कहाँ देखें

'पहला पहला' पॉडकास्ट IVM पॉप के यूट्यूब चैनल और अन्य प्रमुख ऑडियो मंचों पर उपलब्ध है। इस बातचीत में जाकिर खान ने अपने जीवन के उन पहलुओं को उजागर किया जो आमतौर पर उनके स्टेज परफॉर्मेंस में नज़र नहीं आते — और यही ईमानदारी उन्हें उनके दर्शकों के और करीब लाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विरासत में नहीं पाया। उस्ताद मोइनुद्दीन खान जैसी शास्त्रीय संगीत की पृष्ठभूमि होने के बावजूद जाकिर का निर्माण मजदूरी तक का सफर बताता है कि भारतीय मध्यवर्गीय परिवारों में कलात्मक विरासत और आर्थिक संघर्ष अक्सर साथ-साथ चलते हैं। यह वह कच्चापन है जो उनकी कॉमेडी को 'सच्चा' बनाता है और करोड़ों दर्शकों से जोड़ता है — एक ऐसा कनेक्शन जिसे स्क्रिप्ट से नहीं, बल्कि असली ज़िंदगी से ही बनाया जा सकता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जाकिर खान ने 'पहला पहला' पॉडकास्ट में क्या बताया?
जाकिर खान ने बताया कि घर निर्माण के दौरान उन्होंने खुद चौथे मजदूर की भूमिका निभाई और निर्माण सामग्री तैयार की। इसके अलावा उन्होंने अपने संगीतमय बचपन और उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते होने की विरासत के बारे में भी खुलकर बात की।
जाकिर खान के दादा कौन हैं?
जाकिर खान मशहूर सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान के पोते हैं। उनका बचपन मुंबई बाज़ार के उस घर में बीता जहाँ हर सुबह संगीत का अभ्यास होता था और बड़े-बड़े कलाकारों का आना-जाना लगा रहता था।
'पहला पहला' पॉडकास्ट कहाँ देख या सुन सकते हैं?
'पहला पहला' पॉडकास्ट IVM पॉप के यूट्यूब चैनल और अन्य प्रमुख ऑडियो मंचों पर उपलब्ध है। इसे अभिनेता गोपाल दत्त होस्ट करते हैं।
जाकिर खान के घर का संगीतमय माहौल कैसा था?
जाकिर के अनुसार उनके मुंबई बाज़ार स्थित घर में हर सुबह पाँच-छह बजे दादा जी सारंगी का अभ्यास करते थे। घर में पाँच युवा लड़कों को संगीत की शिक्षा दी जाती थी और कई बाहरी विद्यार्थी भी सीखने आते थे। दादा जी हफ्ते में एक-दो बार आकाशवाणी भी जाते थे।
जाकिर खान की सफलता की कहानी क्या है?
जाकिर खान ने संगीत की समृद्ध विरासत और आर्थिक संघर्ष दोनों के बीच अपना करियर बनाया। घर निर्माण में मजदूरी से लेकर कॉमेडी के मंच तक का उनका सफर उनकी मेहनत और ज़मीन से जुड़े स्वभाव को दर्शाता है, जो उन्हें करोड़ों दर्शकों का प्रिय बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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