क्या आंखों को बार-बार मलने से रोशनी जा सकती है? जानिए इस आदत के खतरनाक प्रभाव

सारांश
Key Takeaways
- आंखों को बार-बार मलने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
- यह आदत आंखों की सुरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकती है।
- ग्लूकोमा जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- आंखों के चारों ओर की त्वचा पर भी बुरा असर पड़ता है।
- चश्मा पहनने वालों के लिए यह आदत खतरा बन सकती है।
नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। आंखें केवल इस दुनिया को देखने का साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारी भावनाओं का भी आईना हैं। जब हम खुश होते हैं, दुखी होते हैं, थकावट महसूस करते हैं या सोने का मन करता है, तो हमारी आंखें अपने आप बहुत कुछ बयां कर देती हैं। ऐसे में जब हमें थकान, जलन या खुजली होती है, तो हम अक्सर बिना सोचे-समझे अपनी आंखों को मलने लगते हैं। यह प्रक्रिया उस समय हमें राहत देने वाली लग सकती है, लेकिन यह आदत हमारी आंखों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
आंखों को बार-बार मलना एक खतरनाक आदत बन सकती है। यह धीरे-धीरे हमारी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है। यह समस्या विशेष रूप से बच्चों, युवाओं और उन लोगों में अधिक देखी जाती है, जो लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहते हैं।
अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसंधान के अनुसार, आंखों को बार-बार मलने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। हमारे हाथ दिनभर कई चीजों को छूते हैं, जैसे दरवाजों की कुंडी और मोबाइल फोन। इन पर बैक्टीरिया होते हैं, जो हमारी आंखों में पहुंच सकते हैं जब हम बिना हाथ धोए उन्हें मलते हैं। इससे आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना और यहां तक कि कंजक्टिवाइटिस हो सकता है। यदि यह आदत बनी रही, तो आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और छोटी-छोटी चीजें भी आंखों को प्रभावित करने लगती हैं।
इसके अलावा, इस आदत से आंखों की सतह, यानी कॉर्निया, पर भी बुरा असर पड़ सकता है। कॉर्निया बहुत नाजुक होती है। जब हम आंखों को जोर से या बार-बार मलते हैं, तो इससे कॉर्निया पर छोटे-छोटे घाव या खरोंच पड़ सकते हैं, जिसे चिकित्सा की भाषा में 'कॉर्नियल एब्रेशन' कहा जाता है। यह स्थिति न केवल दर्दनाक होती है, बल्कि इससे रोशनी में देखने में परेशानी, धुंधलापन और लगातार जलन हो सकती है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह संक्रमण का रूप ले सकता है।
ग्लूकोमा भी आंखों को बार-बार मलने की आदत से उत्पन्न हो सकता है। ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंखों की ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे खराब होने लगती है। बार-बार आंखों को मलने से आंखों में दबाव बढ़ जाता है, और यदि यह दबाव लंबे समय तक बना रहे, तो ग्लूकोमा का खतरा उत्पन्न हो सकता है। यह बीमारी धीरे-धीरे नजर को समाप्त कर देती है, और यदि सही समय पर इलाज न मिले, तो व्यक्ति अपनी रोशनी हमेशा के लिए खो सकता है।
आंखों के चारों ओर की त्वचा बहुत नाजुक होती है। जब हम उन्हें बार-बार मलते हैं, तो वहां की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे डार्क सर्कल गहरे हो जाते हैं। इसके अलावा, त्वचा की लचक खत्म होने लगती है, जिससे समय से पहले झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं। यह आदत न केवल आंखों की सेहत, बल्कि चेहरे की सुंदरता को भी बिगाड़ सकती है।
यदि किसी को पहले से चश्मा है या आंखों की कोई समस्या है, तो आंख मलने से यह और बढ़ सकती है। बार-बार रगड़ने से कॉर्निया का आकार बदल सकता है, जिससे चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ सकता है। कई मामलों में, यह आदत कराटोकोनस जैसी गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है, जिसमें कॉर्निया पतला और शंकु जैसा हो जाता है, और इसके कारण व्यक्ति को हर चीज धुंधली दिखने लगती है।