क्या 'शीतोदक सेचन' और 'पानीतला स्पर्श' से आंखों को राहत मिलती है?
सारांश
Key Takeaways
- शीतोदक सेचन आंखों की जलन और थकान कम करता है।
- पानीतला स्पर्श आंखों को ठंडक और नमी प्रदान करता है।
- ये उपाय प्राकृतिक और बिना खर्च के हैं।
- इन उपायों से आंखों की बीमारियों से बचने में मदद मिलती है।
- अगर गंभीर समस्या हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आजकल की व्यस्त जीवनशैली और डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग के कारण आंखों से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आंखों की देखभाल के लिए कुछ सरल उपाय प्रस्तुत किए हैं, जिनमें शीतोदक सेचन और पानीतला स्पर्श शामिल हैं। ये छोटे उपाय रोजाना अपनाने से आंखों को बड़ी राहत मिलती है और कई बीमारियों से बचाव होता है।
वर्तमान में प्रदूषण, धूल और डिजिटल उपकरणों के प्रभाव से आंखें सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। इसलिए, शीतोदक सेचन और पानीतला स्पर्श जैसे उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद फायदेमंद है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, शीतोदक सेचन का अर्थ है आंखों में ठंडे पानी की कुछ बूंदें डालना, जो बहुत लाभकारी है। इसे दिन में 3 से 4 बार करने से आंखों की रोशनी में सुधार होता है। ठंडा पानी आंखों की जलन, थकान और सूखापन को कम करता है। यह उपाय गर्मियों में या लंबे समय तक स्क्रीन देखने वालों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। साफ और ठंडे पानी की बूंदें डालने से आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे आंखों की चमक बनी रहती है और रोशनी में वृद्धि होती है।
दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है पानीतला स्पर्श। इसमें दोनों हथेलियों को पानी से भिगोकर आंखों पर हल्के से रखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर बार खाने के बाद हाथ धोकर गीली हथेलियों को आंखों पर रखने से मोतियाबिंद और अन्य आंखों की बीमारियों से बचने में मदद मिलती है। गीली हथेलियां आंखों को ठंडक प्रदान करती हैं, जिससे नमी बनी रहती है और सूजन कम होती है।
ये दोनों उपाय पूरी तरह से प्राकृतिक, सरल और बिना किसी खर्च के हैं। ये सदियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा हैं। इन उपायों से आंखों की थकान कम होती है और लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। हालाँकि, यदि कोई गंभीर समस्या हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।