क्या हजारों वर्ष पुराना आयुर्वेद आधुनिक युग में प्रभावी है, जड़ी बूटियों में छिपा है सार?

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क्या हजारों वर्ष पुराना आयुर्वेद आधुनिक युग में प्रभावी है, जड़ी बूटियों में छिपा है सार?

सारांश

आयुर्वेद, जो हजारों साल पुराना है, आज भी नई बीमारियों का सामना करने में सक्षम है। जानिए कैसे यह विज्ञान और जीवनशैली का संगम है।

Key Takeaways

  • आयुर्वेद प्राचीन उपचार पद्धति है।
  • यह शरीर के संतुलन को पुनर्स्थापित करता है।
  • जड़ी-बूटियाँ जैसे अश्वगंधा और हल्दी आज भी प्रभावी हैं।
  • आधुनिक जीवनशैली में आयुर्वेद के सिद्धांत लागू होते हैं।
  • यह केवल उपचार नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। कई लोग चकित रह जाते हैं जब यह सुनते हैं कि हजारों वर्ष पुराना आयुर्वेद आज की नई-नई बीमारियों पर भी प्रभाव डालता है। एक सामान्य प्रश्न उठता है – जब उस समय की जीवनशैली, खानपान और पर्यावरण बिलकुल भिन्न था, तो उस समय के उपचार आज कैसे प्रभावी हो सकते हैं? इसका उत्तर मानव शरीर की स्वभाव में छिपा है।

हालांकि मानव शरीर आज अधिक व्यस्त, तनावग्रस्त और प्रदूषण से प्रभावित है, लेकिन इसकी मूल संरचना और कार्यप्रणाली वही है जो पहले थी। पाचन तंत्र, प्रतिरक्षा प्रणाली, और मन जिस प्रकार से प्रतिक्रिया देता है – ये सभी आज भी उसी तरीके से कार्य करते हैं। अंतर केवल इतना है कि आज की जीवनशैली अधिक बिगड़ गई है।

यहाँ पर आयुर्वेद की शक्ति प्रकट होती है। आयुर्वेद बीमारियों को दबाने के बजाय शरीर के संतुलन को पुनर्स्थापित करता है। यह मानता है कि यदि शरीर की अग्नि यानी पाचन शक्ति मजबूत है और ओजस यानी प्रतिरक्षा शक्ति संतुलित है, तो शरीर स्वंय ही रोगों से लड़ सकता है। सुश्रुत संहिता और चरक संहिता ऐसे ग्रंथ हैं जो एक अच्छी जीवनशैली को स्वास्थ्य बनाए रखने की कुंजी मानते हैं। जहाँ सुश्रुत संहिता व्यायाम और स्वच्छता को प्राथमिकता देती है, वहीं चरक संहिता आहार और भोजन के माध्यम से स्वास्थ्य बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करती है।

आयुर्वेद की कई जड़ी-बूटियाँ आज की समस्याओं में अत्यधिक प्रभावी सिद्ध हो रही हैं। जैसे कि अश्वगंधा और ब्राह्मी तनाव को कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं। गुडूची शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। हल्दी सूजन को कम करती है और पाचन को सुधारती है। घी और सौंफ जैसे सामान्य घरेलू उपाय भी पेट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

आधुनिक बीमारियाँ कितनी भी जटिल क्यों न हों, उनका मूल अक्सर जीवनशैली में निहित होता है—अनियमित दिनचर्या, खराब आहार, नींद की कमी, और लगातार तनाव। आयुर्वेद इन्हीं मूल कारणों को ठीक करने पर जोर देता है।

इसलिए यदि कोई पूछे कि आयुर्वेद आज भी क्यों प्रभावी है, तो इसका उत्तर यही होगा—क्योंकि शरीर वही है, केवल परिस्थितियाँ बदल गई हैं। और जब समाधान शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया के अनुसार मेल खाता है, तो वह कभी पुराना नहीं होता।

आयुर्वेद एक प्राचीन विद्या है, लेकिन इसका विज्ञान कालजयी है—आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है जितना कि यह सदियों पहले था। यह केवल उपचार नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जिसे अपनाकर हम न केवल रोगों से बच सकते हैं, बल्कि एक बेहतर और संतुलित जीवन जी सकते हैं।

Point of View

बल्कि एक संतुलित जीवन जी सकते हैं। यह हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे अपनाने में आधुनिक विज्ञान भी रुचि दिखा रहा है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

आयुर्वेद कैसे काम करता है?
आयुर्वेद शरीर के संतुलन को पुनर्स्थापित करता है और प्राकृतिक उपचारों का उपयोग करता है।
क्या आयुर्वेद आज भी प्रासंगिक है?
हाँ, आयुर्वेद आज भी नई बीमारियों का सामना करने में सक्षम है और इसके सिद्धांत आज के जीवनशैली में भी लागू होते हैं।
आयुर्वेद की कौन सी जड़ी-बूटियाँ प्रभावी हैं?
अश्वगंधा, हल्दी, ब्राह्मी, गुडूची और सौंफ जैसी जड़ी-बूटियाँ आज की स्वास्थ्य समस्याओं में प्रभावी हैं।