क्या ऑफिस में घंटों कंप्यूटर पर काम करना सर्वाइकल का मरीज बना सकता है?

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क्या ऑफिस में घंटों कंप्यूटर पर काम करना सर्वाइकल का मरीज बना सकता है?

सारांश

क्या आप भी घंटों तक कंप्यूटर पर काम करते हैं? यह समस्या कब बन जाती है? जानिए सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के बारे में और आयुर्वेदिक नुस्खों से कैसे मिलेगी राहत।

मुख्य बातें

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।
गलत मुद्रा में बैठने से यह समस्या बढ़ती है।
आयुर्वेद में इसके लिए कई प्रभावी उपाय हैं।
व्यायाम और सही आहार इस समस्या को नियंत्रित कर सकते हैं।
तनाव प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 10 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। आज के युग में मोबाइल और कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग, घंटों तक झुककर काम करने की आदत और गलत जीवनशैली सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या को तेजी से बढ़ा रही है। यह एक ऐसी बीमारी है जो गर्दन और रीढ़ की हड्डी से संबंधित होती है, जो न केवल दर्द देती है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी गंभीरता से प्रभावित करती है।

गर्दन में उपस्थित रीढ़ की हड्डी का भाग 'सर्वाइकल स्पाइन' कहा जाता है। इसमें 7 कशेरुकाएं होती हैं जो सिर को सहारा देती हैं और मस्तिष्क से पूरे शरीर तक संवेग पहुंचाती हैं। जब इन कशेरुकाओं या डिस्क में घिसाव, सूजन या दबाव की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कहते हैं।

इस समस्या का मुख्य कारण लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना है। वर्तमान जीवनशैली में लोग झुककर मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करते हैं, जिससे लगातार गर्दन पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, एक्सीडेंट या गिरने से चोट लगना, 40 वर्ष की आयु के बाद हड्डियों और डिस्क का कमजोर होना, तनाव, और कैल्शियम, विटामिन-डी और मैग्नीशियम की कमी भी सर्वाइकल का कारण बन सकते हैं।

सर्वाइकल के लक्षणों की बात करें तो गर्दन, कंधे और पीठ में लगातार दर्द, हाथ और बाजू में झनझनाहट या सुन्नपन, सिरदर्द और चक्कर आना, गर्दन को घुमाने में कठिनाई, थकान और कमजोरी के साथ-साथ कभी-कभी दृष्टि धुंधली होना और नींद न आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आयुर्वेद में सर्वाइकल को 'ग्रीवा स्तंभ' कहा गया है और इसे वात दोष की वृद्धि से जोड़ा गया है। वात दोष का बढ़ना स्नायु और कशेरुकाओं को कमजोर कर देता है, जिससे दर्द, जकड़न और सूजन उत्पन्न होती है।

आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष को संतुलित करना इस रोग का स्थायी समाधान है।

सर्वाइकल की समस्या को समाप्त करने के लिए निम्नलिखित घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खे अपनाएं:

  • अजवाइन को तवे पर गर्म करके कपड़े में बांधें और गर्दन पर सेंक लगाएं। इससे दर्द और जकड़न में राहत मिलती है।
  • सरसों के तेल में लहसुन भूनकर गर्दन पर मालिश करें। यह रक्त संचार को बढ़ावा देता है और सूजन को कम करता है।
  • गिलोय, हल्दी और अदरक का काढ़ा पीने से शरीर में सूजन और दर्द कम होता है।
  • मेथी दाना रातभर भिगोकर सुबह चबाएं या दूध में मिलाकर पिएं। इससे हड्डियों और स्नायुओं को मजबूती मिलती है।
  • भुजंगासन, ताड़ासन, मकरासन और गर्दन घुमाने वाले सरल योगासन सर्वाइकल में राहत देते हैं।
  • गुनगुने पानी से स्नान या गर्म पट्टी लगाना मांसपेशियों के तनाव को कम करता है।
  • रोजाना 15 से 20 मिनट धूप में रहने से विटामिन-डी की कमी पूरी होती है।
  • इसके अलावा, आहार में दूध, हरी सब्जियां, तिल, बादाम और दालें शामिल करें।

उपचार के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव भी आवश्यक है। लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करने से बचें। यदि काम के कारण बैठना जरूरी हो, तो हर 30 मिनट में गर्दन घुमाएं। सोने के समय न तो बहुत ऊंचा और न ही बहुत नीचा तकिया लें। तनाव से दूर रहना भी आवश्यक है, क्योंकि यह समस्या को और गंभीर बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस एक गंभीर समस्या है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। इसके लिए जागरूकता और सही उपायों की आवश्यकता है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण क्या हैं?
गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द, हाथ और बाजू में झनझनाहट, सिरदर्द, और गर्दन को घुमाने में कठिनाई।
क्या आयुर्वेद में इस समस्या का इलाज संभव है?
हाँ, आयुर्वेद में वात दोष को संतुलित करके सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का इलाज किया जा सकता है।
क्या जीवनशैली में बदलाव जरूरी है?
जी हाँ, लंबे समय तक बैठने से बचना और नियमित व्यायाम करना जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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