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कूलर के पानी में फिटकरी डालें, बदबू और मच्छरों से मिलेगी तुरंत राहत

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कूलर के पानी में फिटकरी डालें, बदबू और मच्छरों से मिलेगी तुरंत राहत

सारांश

गर्मियों में कूलर के पानी में फिटकरी का छोटा टुकड़ा डालने से बदबू दूर होती है, बैक्टीरिया कम होते हैं और मच्छरों के लार्वा पनपने की संभावना घटती है। यह सस्ता घरेलू नुस्खा डेंगू-मलेरिया से बचाव में भी सहायक है।

मुख्य बातें

फिटकरी (एलम) कूलर के पानी में मौजूद गंदे कणों को तली में बैठाकर पानी साफ करती है।
फिटकरी के हल्के एंटीसेप्टिक गुण बैक्टीरिया की वृद्धि धीमी करते हैं और बदबू दूर करते हैं।
रुके हुए कूलर के पानी में मादा मच्छर अंडे देती है, जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ता है।
बड़े टैंक में अंगूठे के नाखून के आकार का फिटकरी का एक टुकड़ा पर्याप्त है।
फिटकरी के साथ-साथ हर ३-४ दिन में कूलर का पानी बदलना और टैंक की सफाई जरूरी है।
मानसून के दौरान कूलर के पानी की सफाई और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि नमी और गर्मी मिलकर संक्रमण की रफ्तार बढ़ाते हैं।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गर्मी के मौसम में कूलर का पानी अगर कई दिनों तक न बदला जाए तो उसमें बदबू, बैक्टीरिया और मच्छरों के लार्वा पनपने लगते हैं, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कूलर के टैंक में फिटकरी (एलम) का एक छोटा टुकड़ा डालने से यह समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है। यह उपाय सस्ता, घरेलू और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है।

क्यों जमा होती है कूलर के पानी में गंदगी?

जब कूलर में एक ही पानी कई दिनों तक भरा रहता है, तो उसमें धीरे-धीरे धूल, मिट्टी और सूक्ष्म जीव जमा होने लगते हैं। यह रुका हुआ पानी मादा मच्छर के अंडे देने के लिए आदर्श स्थान बन जाता है। गर्मियों और मानसून के दौरान यही स्थिति वायरल संक्रमण, डेंगू और मलेरिया के प्रसार को तेज करती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकांश शहरी और ग्रामीण परिवार कूलर की बाहरी सफाई पर ध्यान देते हैं, लेकिन टैंक के पानी की गुणवत्ता को नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बीमारियों की जड़ बनती है।

फिटकरी कैसे करती है काम?

वैज्ञानिक भाषा में फिटकरी को 'एलम (Alum)' कहते हैं। सदियों से इसका उपयोग जल शुद्धिकरण में किया जाता रहा है। फिटकरी पानी में घुलने के बाद उसमें मौजूद छोटे गंदे कणों को एकत्रित कर भारी बना देती है, जिससे वे तली में बैठ जाते हैं और ऊपर का पानी साफ दिखने लगता है।

इसके अलावा, फिटकरी में हल्के एंटीसेप्टिक गुण भी पाए जाते हैं जो बैक्टीरिया की वृद्धि को धीमा करते हैं। इससे पानी से आने वाली दुर्गंध काफी कम हो जाती है और कूलर के पैड भी अधिक समय तक सही स्थिति में बने रहते हैं।

मच्छरों पर फिटकरी का असर

मादा मच्छर आमतौर पर रुके हुए और अपेक्षाकृत साफ पानी में ही अंडे देती है। फिटकरी पानी की रासायनिक संरचना को थोड़ा बदल देती है, जिससे मच्छरों के लार्वा के पनपने की संभावना कम हो जाती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि फिटकरी कोई पूर्ण कीटनाशक नहीं है — यह सहायक उपाय है, संपूर्ण समाधान नहीं।

यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ फिटकरी के उपयोग के साथ-साथ हर ३ से ४ दिन में कूलर का पानी पूरी तरह बदलने की सलाह देते हैं।

सही तरीका और सावधानियां

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े कूलर टैंक में फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा — लगभग अंगूठे के नाखून के आकार का — पर्याप्त होता है। अधिक मात्रा में फिटकरी डालने से पानी की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और कूलर के पैड को नुकसान हो सकता है।

साथ ही टैंक और पैड्स की नियमित सफाई जरूरी है ताकि फंगस और काई न जमे। कूलर को हमेशा ढककर रखें ताकि बाहरी धूल और कीड़े पानी में न गिरें। यह छोटी सी आदत आपके परिवार को गर्मियों में स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

जैसे-जैसे मानसून करीब आएगा, कूलर के पानी की सफाई और भी जरूरी हो जाएगी क्योंकि नमी और गर्मी मिलकर बैक्टीरिया और मच्छरों के पनपने की रफ्तार को कई गुना बढ़ा देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन घर के कूलर जैसे सामान्य स्रोत अक्सर नजरअंदाज रह जाते हैं। विडंबना यह है कि जो उपकरण राहत देने के लिए है, वही लापरवाही से बीमारी का वाहक बन जाता है। फिटकरी जैसे पारंपरिक और वैज्ञानिक रूप से स्वीकृत उपाय को बढ़ावा देना सरकारी स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों का हिस्सा होना चाहिए। जन-जागरूकता की यह खाई सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की एक बड़ी चूक को दर्शाती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कूलर के पानी में फिटकरी डालने से क्या फायदा होता है?
फिटकरी पानी में मौजूद गंदे कणों को तली में बैठा देती है और उसके एंटीसेप्टिक गुण बैक्टीरिया की वृद्धि कम करते हैं। इससे कूलर के पानी से आने वाली बदबू दूर होती है और मच्छरों के लार्वा पनपने की संभावना घटती है।
कूलर में कितनी फिटकरी डालनी चाहिए?
बड़े कूलर टैंक में अंगूठे के नाखून के आकार का एक छोटा टुकड़ा पर्याप्त होता है। अधिक मात्रा में फिटकरी डालने से पानी की गुणवत्ता और कूलर के पैड दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
कूलर का पानी कितने दिन में बदलना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार हर ३ से ४ दिन में कूलर का पानी पूरी तरह बदल देना चाहिए। साथ ही टैंक और पैड्स की नियमित सफाई भी जरूरी है ताकि फंगस और काई न जमे।
क्या कूलर का पानी डेंगू फैला सकता है?
हां, अगर कूलर में लंबे समय तक पानी जमा रहे तो मादा मच्छर उसमें अंडे दे सकती है और लार्वा पनप सकते हैं। यही स्थिति डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रसार में योगदान देती है।
फिटकरी क्या होती है और यह कहां मिलती है?
फिटकरी को वैज्ञानिक भाषा में 'एलम (Alum)' कहते हैं और यह एक प्राकृतिक खनिज यौगिक है। यह किसी भी किराने की दुकान या मेडिकल स्टोर पर बेहद सस्ते दाम में आसानी से मिल जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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