क्या हेल्दी खाना खाकर भी बढ़ रहा वजन? जरा इन आदतों पर गौर करें!
सारांश
Key Takeaways
- हेल्दी डायट के बावजूद वजन बढ़ सकता है।
- पाचन शक्ति का महत्व समझें।
- नींद की कमी से वजन पर बुरा असर पड़ता है।
- हार्मोनल असंतुलन का ध्यान रखें।
- शारीरिक गतिविधि को बनाए रखें।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में युवा अब फिटनेस की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर घर की रसोई तक, हर जगह हेल्दी लाइफस्टाइल की बातें की जा रही हैं। फिर भी, एक हैरान करने वाली बात यह है कि हेल्दी डायट अपनाने के बावजूद उनका वजन घटने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।
ऐसे में लोगों के मन में कई प्रश्न उठते हैं। असलियत यह है कि बढ़ते वजन का कारण केवल आपकी थाली नहीं, बल्कि आपके शरीर का संपूर्ण तंत्र है।
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर भोजन से नहीं, बल्कि अग्नि यानी पाचन शक्ति से संचालित होता है। वहीं, विज्ञान इसे मेटाबॉलिज्म कहता है। यदि यह तंत्र गड़बड़ हो जाए, तो सबसे शुद्ध और पौष्टिक भोजन भी शरीर में जाकर चर्बी का रूप ले सकता है। यही कारण है कि हेल्दी खाना और वजन कम करना हमेशा एक साथ नहीं होते।
सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि हेल्दी चीजें जितनी चाहें उतनी खाई जा सकती हैं। आयुर्वेद में कुछ खाद्य पदार्थों को भारी माना गया है। ड्राई फ्रूट्स, घी, शहद, मूंगफली का मक्खन या एवोकाडो अत्यंत पौष्टिक होते हैं, लेकिन इन्हें पचाने में शरीर को अधिक समय लगता है। विज्ञान भी मानता है कि इनमें कैलोरी बहुत अधिक होती है। यदि शरीर रोज जितनी ऊर्जा खर्च करता है, उससे अधिक ऊर्जा प्राप्त की जाए, तो वजन बढ़ना स्वाभाविक है।
आजकल बाजार में मिलने वाले कई हेल्दी प्रोडक्ट भी वजन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आयुर्वेद में अत्यधिक मीठे स्वाद को कफ बढ़ाने वाला बताया गया है। विज्ञान कहता है कि अधिक शुगर इंसुलिन को बढ़ाती है, जिससे शरीर फैट स्टोर करने लगता है। लो-फैट दही, मल्टीग्रेन बिस्कुट या एनर्जी बार हेल्दी लगते हैं, लेकिन इनमें छिपी चीनी शरीर के संतुलन को बिगाड़ देती है।
कभी-कभी वजन बढ़ने का कारण खाना नहीं, बल्कि हार्मोन होते हैं। आयुर्वेद में इसे दोषों का असंतुलन कहा गया है, खासकर कफ दोष का बढ़ना। थायरॉइड, पीसीओएस या लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति कम खाकर भी वजन बढ़ता हुआ अनुभव करता है, क्योंकि शरीर ऊर्जा जलाने के बजाय जमा करने लगता है।
नींद और मानसिक स्थिति भी वजन पर गहरा प्रभाव डालती है। आयुर्वेद में कहा गया है कि अधूरी नींद पाचन शक्ति को कमजोर कर देती है। विज्ञान बताता है कि कम सोने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन 'घ्रेलिन' बढ़ता है और पेट भरने का संकेत देने वाला लेप्टिन घट जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति बिना भूख के भी खाने लगता है।
उम्र बढ़ने या शारीरिक गतिविधि कम होने से मेटाबॉलिज्म भी सुस्त हो जाता है। विज्ञान कहता है कि मांसपेशियां कम होने से कैलोरी बर्न कम होता है। केवल डाइट से वजन कम नहीं होता, शरीर को सक्रिय रखना भी उतना ही आवश्यक है।