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क्या निजी हॉस्टलों के लिए गाइडलाइन की कमी है, कई घटनाएं दबा दी जाती हैं?

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क्या निजी हॉस्टलों के लिए गाइडलाइन की कमी है, कई घटनाएं दबा दी जाती हैं?

सारांश

बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर राजद सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने निजी हॉस्टलों के लिए कोई गाइडलाइन नहीं बनाई है, जिससे घटनाएं दबा दी जाती हैं। क्या यह स्थिति चिंताजनक नहीं है? जानें इस विषय पर उनकी और क्या राय है।

मुख्य बातें

महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं।
सरकार ने अभी तक निजी हॉस्टलों के लिए गाइडलाइन नहीं बनाई है।
राजद सांसद ने राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी राय दी।

पटना, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में एक नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद महिला सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार कभी भी पूरी तरह गंभीर नहीं रही है, और हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं।

सुधाकर सिंह ने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए राष्ट्र प्रेस से कहा कि इससे पहले भी बालिका गृह और छात्रावासों से जुड़े कई मामले सामने आए थे, जिनकी जांच हुई, कुछ लोग जेल भी गए, लेकिन इससे व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसके तहत हर राज्य और बड़े शहरों में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए सरकारी छात्रावास बनाए जाने चाहिए। इस योजना में राशि की कोई कमी नहीं है, फिर भी बिहार ऐसा एकमात्र राज्य है, जहां आज तक पर्याप्त और सुरक्षित गर्ल्स हॉस्टल की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

सुधाकर सिंह ने कहा कि बच्चियों की पढ़ाई और सुरक्षित रहन-सहन दोनों ही जरूरी हैं। बिहार में बड़ी संख्या में छात्राएं निजी हॉस्टलों में असुरक्षित हालात में रहने को मजबूर हैं। सरकार ने आज तक इन निजी हॉस्टलों के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं बनाई है। यही वजह है कि कई घटनाएं या तो सामने नहीं आतीं या फिर सामाजिक दबाव के कारण दबा दी जाती हैं। कैमूर, बक्सर और अन्य जिलों में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने राजनीति के अन्य मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ राज्यों में उनकी पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व बेहद कमजोर है और वे केवल गठबंधन की मदद से आगे बढ़ रहे हैं। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था बेहद जरूरी है ताकि जनता का भरोसा बना रहे।

उन्होंने चुनावी फंडिंग और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सुधाकर सिंह ने कहा कि देश में चुनाव प्रबंधन और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ी बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनकी फंडिंग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि चुनावों में बराबरी का माहौल बना रहे।

राजद के अंदरूनी संगठनात्मक मुद्दों पर बोलते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक विशेष परिस्थितियों में बुलाई जाती है। तेजस्वी यादव को पहले ही संगठन में कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए जा चुके हैं और पार्टी का कामकाज उनके नेतृत्व में ही आगे बढ़ रहा है। बैठक में सभी सदस्यों की राय के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य सरकारों को इस पर त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। बिना ठोस गाइडलाइनों के, छात्राओं की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर क्या कहा गया है?
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई है और हालात बदतर हो रहे हैं।
क्या निजी हॉस्टलों के लिए कोई गाइडलाइन है?
सुधाकर सिंह के अनुसार, सरकार ने आज तक निजी हॉस्टलों के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं बनाई है।
राजद सांसद ने और किन मुद्दों पर बात की?
सुधाकर सिंह ने चुनावी फंडिंग और राजनीतिक अस्तित्व पर भी अपने विचार रखे।
राष्ट्र प्रेस
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