8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत को अमेरिका-ईरान तनाव के बीच संतुलन साधने की चुनौती: लिसा कर्टिस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत को अमेरिका-ईरान तनाव के बीच संतुलन साधने की चुनौती: लिसा कर्टिस

सारांश

दक्षिण एशिया के लिए व्हाइट हाउस की पूर्व अधिकारी लिसा कर्टिस ने कहा है कि ईरान के साथ अमेरिका के सैन्य ऑपरेशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। वर्तमान तनाव भारत के लिए डिप्लोमैटिक संतुलन की परीक्षा बन गया है, जिससे देश एक कठिन स्थिति का सामना कर रहा है।

मुख्य बातें

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर ईरान-अमेरिका तनाव का दबाव।
डिप्लोमैटिक संतुलन की आवश्यकता।
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव।
अंतरिम व्यापार फ्रेमवर्क समझौता महत्वपूर्ण है।
मिश्रित रणनीति अपनाने की आवश्यकता।

वॉशिंगटन, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण एशिया के मामले में व्हाइट हाउस की पूर्व अधिकारी लिसा कर्टिस ने बताया कि ईरान के साथ अमेरिका के जारी सैन्य अभियान भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव डाल रहे हैं। उनका कहना है कि इस समय ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच का तनाव भारत के लिए डिप्लोमैटिक संतुलन की परीक्षा बन गया है। भारत एक कठिन और लगातार बिगड़ती स्थिति का सामना कर रहा है।

कर्टिस ने राष्ट्र प्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, "सबसे पहले, इसका प्रतिकूल असर भारत की तेल सप्लाई पर हो रहा है। भारत वास्तव में मिडिल ईस्ट से आने वाले तेल पर निर्भर है, इसलिए भारतीय अधिकारी तेल की बढ़ती कीमतों और इस संकट के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।"

कर्टिस ने भारत के लिए ऊर्जा को तत्काल चिंता का विषय बताते हुए कहा कि संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी भारत की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

उन्होंने हाल ही में ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के कारण उत्पन्न डिप्लोमैटिक मुश्किल की ओर इशारा करते हुए कहा, "अमेरिका ने भारत की मेज़बानी में हुए नौसैनिक अभियान के तुरंत बाद एक ईरानी जहाज पर हमला किया।" यह भारत के लिए चिंता और आपसी संबंधों में तनाव का एक कारण बन गया है।

उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि वॉशिंगटन नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बनाए रखेगा। "भारत अमेरिका को एक जिम्मेदार देश के रूप में देखता है और समुद्री रास्तों की आजादी की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन, इस मामले में अमेरिका उस नियम-आधारित व्यवस्था में रुकावट डालने वाला व्यवहार कर रहा है।"

उन्होंने कहा, "भारत, अधिक न्यूट्रल रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है। वह ईरान के साथ मजबूत संबंधों को अमेरिका के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की अहमियत के साथ संतुलित कर रहा है।"

पूर्व अमेरिकी अधिकारी लिसा कर्टिस ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण दूसरे अमेरिकी सहयोगियों जैसा ही है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों ने अमेरिका के साथ मजबूत साझेदारी बनाए रखने के विचार को संतुलित करने की कोशिश की है, लेकिन वे ऐसे युद्ध में नहीं पड़ना चाहते जिसका वे हिस्सा नहीं हैं।

कर्टिस ने यह भी कहा कि वॉशिंगटन अपनी ईरान नीति को लेकर तेजी से अलग-थलग होता दिख रहा है। जब ईरान में सैन्य ऑपरेशन की बात आती है, तो अमेरिका अपने बड़े सहयोगियों और साझेदारों से अलग-थलग हो गया है।

उन्होंने कहा कि सहयोगी देश सैन्य संपत्तियों को देने में हिचकिचा रहे हैं। सभी देश होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों को ले जाने के लिए युद्धपोत नहीं भेजना चाहते। वे सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहते। इसके बजाय, सभी देश साझेदारों की स्थिरता का समर्थन करने के लिए गैर-सैन्य तरीके खोज रहे हैं। वे अमेरिका का समर्थन करना चाहते हैं। वे ऑयल टैंकरों के जोखिम को कम करने में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और मार्केट में रणनीतिक रिजर्व जारी करने की कोशिश कर रहे हैं।

द्विपक्षीय संबंधों पर कर्टिस ने कहा कि अमेरिका-भारत संबंध हाल ही में बेहतर हुए हैं। उन्होंने अंतरिम व्यापार फ्रेमवर्क समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने जोर दिया कि रूसी तेल पर अमेरिका की नीति में बदलाव से भारत को फायदा हो सकता है।

उन्होंने कहा, "अमेरिका रूस को तेल बेचने की अनुमति दे रहा है। इससे भारत को मदद मिलेगी। ऊर्जा संकट से निपटने में अमेरिका भारत की मदद के लिए जो कुछ भी कर सकता है, उसका स्वागत है।"

कर्टिस ने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन की नीतियों का अनिश्चित और अप्रत्याशित होना चिंता का कारण बन रहा है। यह ट्रंप सरकार की चंचलता और अनिश्चितता को दर्शाता है, जो अन्य देशों के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर रही है। यही कारण है कि भविष्य में भारत, ट्रंप सरकार के साथ व्यवहार करते समय अधिक सतर्क रुख अपना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी गहरा असर डाल रही है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का भारत पर क्या असर है?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारत इस स्थिति में क्या कर सकता है?
भारत को अमेरिका और ईरान के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना होगा और एक न्यूट्रल रुख अपनाना होगा ताकि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले