पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट में 8%25 की वृद्धि
सारांश
Key Takeaways
- कच्चे तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
- पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर ऊर्जा कीमतों पर पड़ा है।
- ब्रेंट क्रूड में 8%25 की वृद्धि हुई है।
- ट्रंप की चेतावनी ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
- यदि तनाव बढ़ता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को भारी उछाल आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर अगले 2-3 हफ्तों में संभावित सैन्य हमले की चेतावनी देने के बाद, बाजार में सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 109.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) फ्यूचर्स 111.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
पिछले सप्ताह के दौरान, यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड में 11.94 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि में 3.14 प्रतिशत की कमी आई।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इस स्थिति के कारण ऊर्जा कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुँची हैं, और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली सप्लाई पर निर्भर देशों में ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
ट्रंप ने इस हफ्ते अपने भाषण में कहा कि अमेरिका अगले हफ्तों में ईरान पर 'कड़ा प्रहार' कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पुनः खोलने के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई और अन्य देशों से इसे सुचारू करने की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों, भारतीय रुपए और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर दबाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्थिति में सुधार होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मुद्रा में स्थिरता आ सकती है, लेकिन यदि तनाव बढ़ता है, तो बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और अधिक बढ़ेगी।
कीमती धातुओं के संदर्भ में, कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,679.70 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
इस बीच, गुड फ्राइडे के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार सुबह के सत्र में बंद रहे।
वहीं, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्क - सेंसेक्स और निफ्टी - में कमजोरी रही।