मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत शासन में वैज्ञानिकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

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मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत शासन में वैज्ञानिकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

सारांश

मिशन कर्मयोगी के तहत वैज्ञानिकों के लिए प्रशासनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह पहल शासन में उनके निर्णय लेने की क्षमताओं को विकसित करने पर केंद्रित है।

Key Takeaways

  • प्रशासनिक क्षमता विकास के लिए विशेष कार्यक्रम की शुरुआत।
  • वैज्ञानिकों को शासन और निर्णय लेने के कौशल से लैस करना।
  • प्रशिक्षण मॉड्यूल का समय के साथ विकास
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का महत्व
  • निजी क्षेत्र की प्रथाओं का समावेश

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को मिशन कर्मयोगी के तहत वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक कौशल विकास का पहला विशेष कार्यक्रम आरंभ किया। इसका मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक और शैक्षणिक लीडर्स को शासन और निर्णय लेने की क्षमताओं से संपन्न करना है।

इस पहल की घोषणा 'साधना सप्ताह' के एक विशेष सत्र में की गई, जिसमें मंत्री ने प्रशासनिक प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए लंबे समय से महसूस की जा रही कमी को उजागर किया।

उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों के कई पेशेवर अक्सर शासन प्रक्रियाओं के अनुभव के बिना ही नेतृत्व की भूमिकाएं निभाते हैं, इसलिए संरचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि नया कार्यक्रम इस समस्या का समाधान प्रदान करेगा, जिससे अनौपचारिक या स्व-अध्ययन विधियों पर निर्भरता कम हो सके, जो कि अक्सर अनियमित और समय लेने वाली होती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण मॉड्यूल समय के साथ विकसित होते रहेंगे ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाया जा सके, साथ ही प्रौद्योगिकी और मानवीय निर्णय के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

मंत्री ने क्षमता निर्माण आयोग के लिए नई प्राथमिकताओं की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें विशिष्ट प्रशासनिक कार्यों के लिए विशेष मॉड्यूल का निर्माण शामिल है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारियों के बीच प्रक्रियात्मक समझ को बेहतर बनाने के लिए संसदीय प्रश्नों के संचालन पर एक केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू किया जाए।

इसके अतिरिक्त, नव-नियुक्त सिविल सेवकों और सहायक सचिवों के लिए शासन प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता हेतु संक्षिप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं।

दृष्टिकोण में बदलाव पर जोर देते हुए, सिंह ने कहा कि क्षमता निर्माण को नियम-आधारित प्रणालियों से आगे बढ़कर अधिक लचीले, भूमिका-आधारित मॉडल की ओर ले जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शासन में निजी क्षेत्र की प्रथाओं को शामिल करना आवश्यक हो गया है, क्योंकि आज के तेजी से बदलते परिवेश में पारंपरिक पृथक्करण अब प्रभावी नहीं रह गया है।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मिशन कर्मयोगी के अगले चरण में सार्वजनिक संस्थानों को अधिक अनुकूलनीय और मानवीय बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का महत्व लगातार बढ़ रहा है, फिर भी शासन व्यवस्था नागरिक-केंद्रित रहनी चाहिए।

उन्होंने क्षमता निर्माण आयोग और विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली के बीच क्षमता निर्माण में वैश्विक ज्ञान साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी निरीक्षण किया।

Point of View

बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी को भी सशक्त करेगा, जो कि देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
NationPress
12/04/2026

Frequently Asked Questions

मिशन कर्मयोगी क्या है?
मिशन कर्मयोगी एक पहल है जिसका उद्देश्य प्रशासनिक क्षमता निर्माण के माध्यम से वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को शासन में प्रशिक्षित करना है।
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिकों और शैक्षणिक लीडर्स को शासन और निर्णय लेने के कौशल से लैस करना है।
प्रशिक्षण मॉड्यूल कैसे विकसित होंगे?
प्रशिक्षण मॉड्यूल समय के साथ विकसित होते रहेंगे, ताकि वे उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे एआई के साथ तालमेल बिठा सकें।
क्या यह कार्यक्रम सभी वैज्ञानिकों के लिए है?
हाँ, यह कार्यक्रम सभी वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए खुला है, जो प्रशासनिक क्षमताओं का विकास करना चाहते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का शासन में क्या महत्व है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व शासन में बढ़ रहा है, यह निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने में मदद करेगा।
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