इमली: स्वाद और स्वास्थ्य का अनमोल खजाना जो वजन नियंत्रण में मदद करता है
सारांश
Key Takeaways
- इमली का सेवन पाचन तंत्र को सुधारता है।
- यह वजन नियंत्रण में मदद करती है।
- इमली में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो सूजन कम करते हैं।
- यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक है।
- इमली का नियमित सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है।
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। खट्टी और मिठी इमली न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि यह सेहत के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह पाचन समस्याओं को दूर करने के साथ-साथ वजन को नियंत्रित करने में भी सहायक है।
बिहार सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग के अनुसार, इमली केवल एक विशाल और छायादार वृक्ष नहीं है, बल्कि यह स्वाद और स्वास्थ्य का एक खजाना भी है। यह प्रकृति की अनमोल उपहार है, जो घने जंगलों, खेतों और सड़कों के किनारे आसानी से उपलब्ध होती है। इसकी झुकी हुई शाखाएं और खुरदरी भूरी छाल इसे पहचानने में आसान बनाती हैं। इमली का खट्टा-मीठा गूदा विभिन्न व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने का कार्य करता है और यह चटनी, सांभर जैसे पारंपरिक व्यंजनों का मुख्य घटक है।
इमली के औषधीय गुण सदियों से पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग होते आ रहे हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर में सूजन को कम करती है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है। इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। इमली पाचन सुधारने में मदद करती है, कब्ज से राहत देती है और इसके लैक्सेटिव प्रभाव से पेट साफ रहता है। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है, खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती है, जिससे हृदय स्वास्थ्य बना रहता है।
इमली में मौजूद पॉलीफेनॉल्स और फ्लेवोनॉइड्स सूजन को कम करने और लीवर की सुरक्षा में सहायक होते हैं। यह ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में भी मददगार साबित हो सकती है और वजन नियंत्रण में सहायक होती है।
इमली की पत्तियां, छाल और बीज भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण बैक्टीरिया और फंगस से मुकाबला करने में मदद करते हैं। इमली का नियमित सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे संतुलित मात्रा में ही लेना चाहिए।
हालांकि, इमली का अत्यधिक सेवन दस्त या पेट दर्द का कारण बन सकता है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों को सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। इसका एसिडिक स्वभाव दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए पानी से कुल्ला करना आवश्यक है। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, किडनी रोगियों और दवाएं लेने वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए। एलर्जी से ग्रस्त व्यक्तियों में खुजली या रैश हो सकते हैं। हमेशा संतुलित मात्रा में सेवन करें और अत्यधिक सेवन से बचें।