INST मोहाली की नई PLA-ZnO नैनोफाइबर तकनीक: 120 मिनट में 98.6% डाई हटाने में सफलता
सारांश
मुख्य बातें
नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (INST) मोहाली के शोधकर्ताओं ने एक अभिनव पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA)-जिंक ऑक्साइड (ZnO) नैनोफाइबर फिल्टर विकसित किया है, जो मशीन लर्निंग की सहायता से डाई-दूषित अपशिष्ट जल का उपचार केवल 120 मिनट में 98.6 प्रतिशत तक की दक्षता से कर सकता है। यह शोध एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स (विली) जर्नल में प्रकाशित हुआ है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत संस्थान की यह उपलब्धि वस्त्र व औद्योगिक क्षेत्र में जल-प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
समस्या: डाई-प्रदूषण की बड़ी चुनौती
औद्योगिक गतिविधियों, विशेष रूप से वस्त्र उद्योग, से लगातार जैविक रंगों का जल में मिलना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट बना हुआ है। ये कार्बनिक यौगिक स्थिर, विषाक्त और प्राकृतिक अपघटन के प्रतिरोधी होते हैं। मौजूदा उपचार विधियाँ — जैसे सोखना, अवसादन और फ्लोक्यूलेशन — प्रदूषकों को अलग तो कर सकती हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं करतीं। अत्यधिक स्थिर रंगों के लिए जैविक उपचार भी धीमा साबित होता है।
फोटोकैटलिसिस एक आशाजनक विकल्प है क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करते हुए अपेक्षाकृत सामान्य परिस्थितियों में प्रदूषकों को तोड़ सकती है। हालाँकि, पारंपरिक फोटोकैटलिटिक प्रणालियों में नैनोकणों की पुनःप्राप्ति, उत्प्रेरक को उपचारित जल से अलग करना, इलेक्ट्रॉन-होल पुनर्संयोजन और प्रकाश पर अत्यधिक निर्भरता जैसी बाधाएँ बनी रहती थीं।
नई तकनीक: पीजो-फोटोकैटलिसिस का अभिनव संयोजन
डॉ. अवीरू कुमार बसु की प्रयोगशाला ने हल्दी के अर्क का उपयोग करके ZnO नैनोकणों को हरित विधि से संश्लेषित किया। हल्दी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले करक्यूमिन, फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक यौगिकों ने हानिकारक रासायनिक अभिकर्मकों की आवश्यकता को समाप्त कर दिया।
इलेक्ट्रोस्पिनिंग प्रक्रिया के माध्यम से PLA-ZnO नैनोफाइबर झिल्ली निर्मित की गई, जो झरझरी (porous), उच्च सतह-क्षेत्र वाली और यांत्रिक रूप से टिकाऊ है। इस तकनीक की विशेषता यह है कि यांत्रिक कंपन से पीजोइलेक्ट्रिक ध्रुवीकरण उत्पन्न होता है, जो फोटोजेनरेटेड इलेक्ट्रॉन-होल पुनर्संयोजन को दबाता है और प्रतिक्रियाशील प्रजातियों के निर्माण को बढ़ाता है।
प्रयोगशाला परिणाम: प्रभावी डाई और जीवाणु उन्मूलन
शोध के अनुसार, PLA-ZnO नैनोफाइबर ने संयुक्त प्रकाश और अल्ट्रासोनिक उत्तेजना के तहत 120 मिनट के भीतर 98.6 प्रतिशत MB (मेथिलीन ब्लू) और 96.7 प्रतिशत CR (कांगो रेड) रंग हटाने में सफलता प्राप्त की। यह प्रदर्शन अकेले फोटोकैटलिसिस की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बेहतर है।
जीवाणुरोधी परीक्षणों में इस सामग्री ने 6 घंटे के भीतर ई. कोली को लगभग 75 प्रतिशत और एस. ऑरियस को 71 प्रतिशत तक निष्क्रिय करने की क्षमता दर्शाई। यह गुण इसे जीवाणु-संदूषित औद्योगिक जल के उपचार के लिए भी उपयुक्त बनाता है।
मशीन लर्निंग की भूमिका
इस अध्ययन में मशीन लर्निंग (ML) को शामिल कर डाई-डीकलराइजेशन के व्यवहार का पूर्वानुमान लगाया गया। तरंगदैर्ध्य, समय, उत्प्रेरक की मात्रा, पराध्वनि (अल्ट्रासोनिक) आवृत्ति, प्रकाश की तीव्रता और डाई की सांद्रता जैसे मानदंडों के आधार पर ML मॉडल ने उपचार की दक्षता का पूर्वानुमान करने में सहयोग किया। यह दृष्टिकोण भविष्य में बड़े पैमाने पर प्रणाली के अनुकूलन में सहायक हो सकता है।
व्यावहारिक उपयोग और आगे की राह
विकसित PLA-ZnO नैनोफाइबर का उपयोग कपड़ा और औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार, फोटोकैटलिटिक और पीजोकैटलिटिक पर्यावरणीय उपचार, तथा जीवाणुरोधी जल-उपचार झिल्ली के रूप में किया जा सकता है। PLA बायोडिग्रेडेबल होने के कारण यह तकनीक पारंपरिक सिंथेटिक पॉलिमर-आधारित फिल्टरों की तुलना में अधिक टिकाऊ विकल्प प्रस्तुत करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जहाँ वस्त्र उद्योग का विस्तार और जल-प्रदूषण का स्तर दोनों ऊँचे हैं।