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क्या नर्सिंग इको-सिस्टम में सुधार संभव है? नई दिल्ली कार्यशाला में वैश्विक प्रतिस्पर्धी कार्यबल पर चर्चा

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क्या नर्सिंग इको-सिस्टम में सुधार संभव है? नई दिल्ली कार्यशाला में वैश्विक प्रतिस्पर्धी कार्यबल पर चर्चा

सारांश

क्या नर्सिंग इको-सिस्टम में सुधार संभव है? नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में नर्सिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने प्रतिस्पर्धी कार्यबल बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर चर्चा की। आइए जानते हैं इस कार्यशाला में क्या महत्वपूर्ण बातें उठाई गईं।

मुख्य बातें

नर्सिंग इको-सिस्टम में सुधार के लिए बहु-स्तरीय सहयोग आवश्यक है।
योग्यता-आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग नैदानिक प्रशिक्षण में सहायक हो सकता है।
राज्य-स्तरीय मान्यता में सुधार की आवश्यकता है।
प्रतिस्पर्धी नर्सिंग कार्यबल तैयार करने के लिए नीतियों में बदलाव आवश्यक है।

नई दिल्ली, 13 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, जॉन्स हॉपकिन्स प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल एजुकेशन इन गायनोकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स (जेएचपीइगो) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय अनुभव साझा कार्यशाला के दूसरे दिन नर्सिंग इको-सिस्टम में सुधारों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

12 नवंबर से शुरू हुई इस बहु-दिवसीय कार्यशाला में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, नर्सिंग प्रमुखों, शिक्षाविदों और विकास भागीदारों ने भारत के नर्सिंग कार्यबल, शिक्षा प्रणाली और शासन तंत्र को सुदृढ़ करने की कार्यनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला के दूसरे दिन राज्यों, संस्थानों और व्यावसायिक संघों ने अपने नवाचारों और व्यावहारिक मॉडलों को साझा किया। इनमें योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम को अपनाने, नैदानिक प्रशिक्षण के लिए सिमुलेशन प्रयोगशालाओं की स्थापना, निरंतर सीखने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग और राज्य-स्तरीय मान्यता प्रणालियों में सुधार जैसी पहलों को रेखांकित किया गया।

प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से इस बात पर जोर दिया कि नर्सिंग शिक्षा की प्रक्रिया, संरचना और परिणामों में बदलाव लाना आवश्यक है ताकि स्नातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में उप सचिव (नर्सिंग एवं दंत चिकित्सा) आकांक्षा रंजन ने "एक विजन, एक एजेंडा: राष्ट्रीय-राज्य सहयोग के माध्यम से नर्सिंग एवं मिडवाइफरी का सुदृढ़ीकरण" थीम पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई में बदलने के लिए राष्ट्रीय और राज्य प्रणालियों के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. दीपिका खाखा ने इस सहयोगात्मक भावना की सराहना करते हुए कहा कि मंत्रालय का समावेशी दृष्टिकोण भविष्य की नीतियों को सूचित करेगा।

जेएचपीइगो के कंट्री डायरेक्टर डॉ. अमित अरुण शाह ने एक कुशल और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी नर्सिंग कार्यबल तैयार करने में योग्यता-आधारित शिक्षा और डिजिटल नवोन्मेषण के महत्व पर बल दिया।

गेट्स फाउंडेशन के उप-निदेशक और कंट्री लीड डॉ. खंडैत ने भारत में नर्सिंग के भविष्य पर उत्साहजनक और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

उन्होंने इस सेक्‍टर में आ रही परिवर्तनकारी गति के प्रति आशा व्यक्त की और सुधारों को आगे बढ़ाने में मंत्रालय, राज्यों और भागीदारों के सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की।

कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और संस्थानों से प्राप्त अंतर्दृष्टि को समेकित करना है, जिससे पूरे भारत में एक लचीले, सक्षम और सशक्त नर्सिंग कार्यबल के निर्माण के लिए सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को अपनाने और बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कार्यशाला नर्सिंग के क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नर्सिंग शिक्षा और कार्यबल को सशक्त बनाना हमारे स्वास्थ्य प्रणाली के लिए आवश्यक है। हमें सभी स्तरों पर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता है, ताकि हम एक सक्षम और प्रतिस्पर्धी नर्सिंग कार्यबल तैयार कर सकें।
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