क्या सर्दियों में शरीर का सुरक्षा कवच 'ब्राउन फैट' है? जानें इसकी महत्वता
Key Takeaways
- ब्राउन फैट शरीर के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह सर्दियों में शरीर को गर्म रखता है।
- मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है।
- इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है।
- मोटापा कम करने में मदद करता है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब भी लोग फैट यानी वसा का नाम सुनते हैं, उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें आ जाती हैं, क्योंकि इसे अक्सर मोटापे से जोड़ा जाता है। हालांकि, शरीर में फैट के दो प्रकार होते हैं: व्हाइट फैट और ब्राउन फैट।
दोनों प्रकार के फैट शरीर के लिए आवश्यक हैं, लेकिन सीमित मात्रा में। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राउन फैट वास्तव में व्हाइट फैट का एक रूप है, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली में बड़ा अंतर है। व्हाइट फैट ऊर्जा के संग्रह के रूप में कार्य करता है, जबकि जब यह कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया में बदलता है, तो इसे ब्राउन फैट कहा जाता है। इसलिए, ब्राउन फैट ऊर्जा की जरूरत के समय जला कर शरीर को ऊर्जावान बनाता है और गर्मी भी प्रदान करता है।
इसलिए, ब्राउन फैट शरीर में मोटापा बढ़ाने का नहीं, बल्कि कम करने में मदद करता है। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में सहायक होता है और सर्दियों में शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। ब्राउन फैट सर्दियों का एक सुरक्षा कवच है, जिसमें माइटोकॉन्ड्रिया की मात्रा अधिक होती है।
अब सवाल उठता है कि ब्राउन फैट शरीर के लिए इतना आवश्यक क्यों है। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है, इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है, और ठंड में शरीर को गर्म रखता है। यह मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करता है, और कैलोरी बर्न करने में मदद करता है। रिसर्च दर्शाती है कि जिन लोगों में मोटापा कम होता है, उनमें ब्राउन फैट की मात्रा अधिक होती है और वे मोटे लोगों की तुलना में अधिक सक्रिय होते हैं।
वहीं, ब्राउन फैट की कमी व्हाइट फैट की अधिकता का संकेत देती है, जिससे शरीर में थकान, ऊर्जा की कमी, मेटाबॉलिज्म का धीमा होना, ठंड का अधिक लगना, वजन का बढ़ना, और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है।
यह स्पष्ट है कि ब्राउन फैट आहार से नहीं मिलता, बल्कि इसे शरीर में सक्रिय करना होता है। इसके लिए पोषण युक्त भोजन और पर्याप्त वर्कआउट आवश्यक है।