क्या तेल स्नान से मौसमी बीमारियों से सुरक्षा मिलेगी और शरीर मजबूत होगा?
सारांश
Key Takeaways
- तेल स्नान से इम्यूनिटी में सुधार होता है।
- यह मौसमी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
- सादा और प्रभावी घरेलू उपाय है।
- प्रक्रिया को नियमित रूप से अपनाना चाहिए।
- विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब मौसम बदलता है, तो सबसे पहले मौसमी बीमारियों का प्रहार हमारे शरीर पर होता है। इस स्थिति में तेल स्नान एक प्रभावी उपाय साबित होता है। सिद्ध प्रणाली की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में तेल स्नान को एक आवश्यक और प्रभावी प्रक्रिया के रूप में मान्यता दी गई है।
तेल स्नान का प्राचीन तरीका न केवल शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाता है, बल्कि संवेदी अंगों को भी मजबूत बनाता है और मौसमी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, हर चार दिन में एक बार इस निवारक विधि को अपनाने से स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा सकता है।
सिद्ध चिकित्सा दक्षिण भारत की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है, जो आयुर्वेद से प्रेरित है। इसे 11 सबसे महत्वपूर्ण उपचारों में से एक माना जाता है। इसका उपयोग विभिन्न बीमारियों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह एक साधारण घरेलू उपाय है, जिसे आसानी से दैनिक जीवन में शामिल किया जा सकता है।
तेल स्नान करने की प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए सबसे पहले पूरे शरीर और सिर (स्कैल्प) पर तिल का तेल या शुद्ध गाय का घी अच्छी तरह लगाएं। तेल को कुछ समय तक शरीर पर रहने दें ताकि यह त्वचा में अच्छी तरह समा सके। इसके बाद, पारंपरिक हर्बल बाथ पाउडर, जिसे पंचकर्पम कहा जाता है, का उपयोग करके तेल को हटाएं। यह हर्बल पाउडर प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बना होता है और त्वचा को साफ करने के साथ-साथ ताजगी भी देता है।
इस तेल स्नान की प्रक्रिया को नियमित रूप से हर चार दिन में एक बार करने से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है। खासकर जब मौसम बदलता है, तो यह सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी बीमारियों से सुरक्षा करता है। इसके साथ ही यह मांसपेशियों और नसों को मजबूत बनाता है, जिससे मोटर फंक्शन में सुधार होता है और संवेदी अंग जैसे त्वचा और आंखें स्वस्थ रहती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सरल उपाय आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी आसानी से अपनाए जा सकते हैं और ये लंबे समय तक स्वास्थ्य लाभ देते हैं। उपयोग से पहले वैद्य से सलाह लेना न भूलें।