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क्या रोज इन 4 प्राणायामों से रहेंगे स्वस्थ और चुस्त दुरुस्त?

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क्या रोज इन 4 प्राणायामों से रहेंगे स्वस्थ और चुस्त दुरुस्त?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि योग और प्राणायाम से आप अपनी सेहत में सुधार कर सकते हैं? जानिए चार प्रमुख प्राणायामों के बारे में, जो आपको ताजगी और ऊर्जा प्रदान करेंगे। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में, ये प्राणायाम आपके स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।

मुख्य बातें

अनुलोम-विलोम से मन की शांति और एकाग्रता बढ़ती है।
कपालभाति से ऊर्जा मिलती है और डाइबिटीज के मरीजों को लाभ होता है।
भ्रामरी किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं।
उज्जायी प्राणायाम सर्दी-जुकाम से बचाने में मददगार है।

नई दिल्ली, 27 जून (राष्ट्र प्रेस)। आजकल की तेज़ रफ़्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारतीय योग पद्धति में तन-मन को स्वस्थ रखने के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद हैं। योगासन और प्राणायाम इसी श्रेणी में आते हैं। आज हम आपको चार प्रमुख प्राणायामों के बारे में बताएंगे, जिनका रोजाना अभ्यास करने से आप अपने स्वास्थ्य में सुधार देखेंगे।

नाड़ी शोधन, जिसे अनुलोम-विलोम प्राणायाम भी कहा जाता है, आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह मन को शांति देने, एकाग्रता बढ़ाने और चिंता को कम करने में सहायक है। इसे करने का तरीका बहुत सरल है। आपको शांत होकर पद्मासन में बैठना है और अपनी पीठ को सीधा रखना है। फिर आंखें बंद कर बायीं नासिका से श्वास लें और दाहिनी नासिका से श्वास छोड़ें। इस प्रक्रिया को कई बार दोहराएं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना 5-10 मिनट अनुलोम-विलोम करने से रक्तचाप नियंत्रित होता है और चेहरे पर निखार आता है। यदि आपको नींद में परेशानी है या शरीर में थकान बनी रहती है, तो यह आपके लिए बहुत लाभकारी है। यह आपके शरीर की ऊर्जा को बनाए रखता है और फेफड़ों को भी स्वस्थ रखता है।

अब बात करते हैं कपालभाति प्राणायाम की। यह विशेष रूप से डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है। यह मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को भी ऊर्जा प्रदान करता है। हालाँकि, कपालभाति सभी के लिए उपयुक्त नहीं है; गर्भवती महिलाएं, मासिक धर्म के समय, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, स्लिप डिस्क या पेट दर्द जैसी समस्याओं वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।

भ्रामरी के अनगिनत लाभ हैं। यह न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सहायक है, बल्कि इसे कोई भी व्यक्ति, चाहे वह बच्चा हो या बुजुर्ग, कभी भी कर सकता है। भ्रामरी के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं।

उज्जायी प्राणायाम, जिसे 'विजयी श्वास' या 'समुद्री श्वास' भी कहा जाता है, इसमें श्वास को गले से धीरे-धीरे लिया और छोड़ा जाता है, जिससे एक हल्की सी घरघराहट की आवाज़ होती है। यह शरीर में गर्मी पैदा करता है, जो मानसून में सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए सहायक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं यह मानता हूँ कि योग और प्राणायाम हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। आज की तेज़ रफ़्तार जिंदगी में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखना एक चुनौती है। इन प्राणायामों के माध्यम से हम न केवल अपनी सेहत को सुधार सकते हैं, बल्कि एक सकारात्मक जीवनशैली को भी अपनाने में मदद कर सकते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन से प्राणायाम रोजाना करना चाहिए?
रोजाना अनुलोम-विलोम , कपालभाति , भ्रामरी और उज्जायी प्राणायाम करना चाहिए।
क्या प्राणायाम करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है?
हाँ, नियमित प्राणायाम से तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
क्या सभी लोग कपालभाति कर सकते हैं?
नहीं, गर्भवती महिलाएं और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को कपालभाति से बचना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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