सर्दियों में लोग सीने में दर्द की शिकायत क्यों करते हैं, आयुर्वेद से इसका क्या समाधान है?
सारांश
Key Takeaways
- गुनगुने पानी में शहद
- छाती की हल्की मालिश
- भाप लेना
- आयुर्वेदिक चूर्ण का सेवन
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों के दौरान वातावरण में कई बदलाव आते हैं। इस समय हमें अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। सर्दियों में कई लोग छाती में हल्के दर्द और भारीपन की शिकायत करते हैं। यह सिर्फ दिल की बीमारी का संकेत नहीं है, बल्कि यह सर्दी में होने वाली जकड़न का परिणाम है, जो छाती से शुरू होकर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं कि सर्दियों में छाती में जकड़न क्यों होती है और इससे राहत पाने के उपाय क्या हैं।
मौसम में बदलाव का सीधे तौर पर मानव शरीर पर प्रभाव पड़ता है और नसें संकुचित हो जाती हैं। ठंड के कारण फेफड़ों में भी संकुचन बढ़ जाता है और सर्द हवा छाती में कफ की वृद्धि कर देती है, जिससे सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, बोलने में दिक्कत और सीने में खिंचाव महसूस होता है। ये सभी लक्षण बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक को परेशान कर सकते हैं।
आयुर्वेद में छाती में जकड़न से बचने के लिए कुछ सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं। यह समस्या खासकर उन लोगों को ज्यादा परेशान करती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। ऐसे व्यक्तियों को सर्दियों में बार-बार बुखार, कफ और पाचन की समस्याएं होती हैं। इस स्थिति से राहत पाने के लिए सुबह गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीना चाहिए। इससे कफ ढीला होता है और गला नरम रहता है।
दूसरा, छाती की हल्की मालिश से भी आराम पाया जा सकता है। इसके लिए सरसों के तेल में कुछ लहसुन की कलियां, अजवाइन और लौंग डालकर पका लें। रात को सोने से पहले छाती और कंधे की मालिश करें। यह दर्द कम करने और शरीर को गर्म रखने में मदद करेगा।
तीसरा, भाप लेना एक सरल और प्रभावी तरीका है, जिससे छाती की जकड़न से जल्दी राहत पाई जा सकती है। दिन में लगभग दो बार भाप लें और मुंह खोलकर भाप को अंदर खींचें। इससे कफ ढीला होगा और फेफड़ों की मांसपेशियों को आराम मिलेगा।
चौथा, सितोपलादि चूर्ण, तालीसागी चूर्ण या त्रिकुट चूर्ण का सेवन भी किया जा सकता है। ये चूर्ण शरीर को गर्म रखते हैं और पाचन शक्ति को मजबूत करने में मदद करते हैं।