पालक: स्वास्थ्य का सुपरफूड लेकिन सावधानी आवश्यक, जानें किन्हें करना चाहिए परहेज
सारांश
Key Takeaways
- पालक का सेवन रक्त बढ़ाने में मददगार है।
- यूटीआई और पथरी के मरीजों को पालक से बचना चाहिए।
- कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए पालक हानिकारक हो सकता है।
- पालक की भारी प्रकृति से कफ और वात की समस्याएं हो सकती हैं।
नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब भी शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ाने या संपूर्ण स्वास्थ्य की बात आती है, तो पालक का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
पालक को 'सुपरफूड' की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि यह न केवल रक्त के लिए बल्कि हड्डियों और पाचन तंत्र के लिए भी अत्यंत फायदेमंद होता है। लेकिन, बहुत से लोग यह नहीं जानते कि पालक का सेवन किन लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। हर कोई पालक का सेवन तो करता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह परेशानी का कारण बन सकता है। आज हम पालक के फायदों के साथ-साथ इसके संभावित नुकसानों पर भी ध्यान देंगे।
आयुर्वेद में पालक के सेवन के लाभ बताए गए हैं, लेकिन इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि किन लोगों को पालक से दूर रहना चाहिए। आयुर्वेद में पालक को उसकी प्रकृति, गुण और शरीर के दोषों (वात-पित्त-कफ) पर आधारित तरीके से देखा जाता है। जहां पालक रक्त को बढ़ाने का कार्य करता है, वहीं दूसरी ओर इसका सेवन करने से पथरी होने का खतरा भी बढ़ सकता है। पथरी के मरीजों को पालक का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी व्यक्ति को यूटीआई से संबंधित समस्याएं अधिक होती हैं, तो उसे पालक का सेवन नहीं करना चाहिए। पालक का अधिक सेवन मूत्र मार्ग में रुकावट उत्पन्न कर सकता है, जिससे पथरी का खतरा बढ़ सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, यदि आपकी पाचन अग्नि कमजोर है, तो पालक का सेवन सावधानीपूर्वक करना चाहिए। कमजोर पाचन के कारण पालक ठीक से नहीं पचता और पेट में विषाक्त पदार्थ उत्पन्न कर सकता है, जिससे पेट में भारीपन और खराब बैक्टीरिया का विकास हो सकता है। ऐसी स्थिति में पालक से परहेज करना ही उचित है। इसके अलावा, यदि शरीर में वात या कफ की अधिकता है, तो भी पालक का अत्यधिक सेवन हानिकारक हो सकता है। पालक की भारी प्रकृति कफ को बढ़ाकर श्वसन संबंधी समस्याएं और वात को बढ़ाकर जोड़ों में दर्द या गैस जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकती है।