वाई-ब्रेक से लंबी शिफ्ट में भी रहें फिट, आयुष मंत्रालय का यह योग फॉर्मूला बदलेगा ऑफिस कल्चर
सारांश
Key Takeaways
- आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया 'वाई-ब्रेक' ऑफिस कर्मचारियों के लिए एक योग-आधारित माइक्रो-ब्रेक कार्यक्रम है।
- इसे कुर्सी पर बैठे-बैठे किया जा सकता है, किसी अलग जगह या उपकरण की जरूरत नहीं।
- दिन में 2 से 3 बार 'वाई-ब्रेक' लेने से पीठदर्द, गर्दन की जकड़न और मानसिक तनाव में राहत मिलती है।
- ताड़ासन, कटिचक्रासन, ग्रीवा संचालन और नाड़ी शोधन प्राणायाम इस ब्रेक के मुख्य अभ्यास हैं।
- एसोचैम के अनुसार भारत में 42.5 प्रतिशत कॉर्पोरेट कर्मचारी तनाव और चिंता से पीड़ित हैं, जिससे यह पहल और भी अहम हो जाती है।
- आयुष मंत्रालय ने 'वाई-ब्रेक' की पूरी विधि अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराई है।
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया 'वाई-ब्रेक' कार्यक्रम भारत के लाखों ऑफिस कर्मचारियों के लिए एक क्रांतिकारी समाधान बनकर उभरा है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने से होने वाली गर्दन, पीठ और कंधों की तकलीफ के साथ-साथ मानसिक तनाव को कम करने के लिए यह योग-आधारित माइक्रो-ब्रेक तकनीक अत्यंत प्रभावी मानी जा रही है। इसे कर्मचारी अपनी सीट से उठे बिना, सिर्फ कुछ मिनटों में कर सकते हैं।
क्या है 'वाई-ब्रेक' और क्यों है यह जरूरी?
आज की कॉर्पोरेट जिंदगी में 8 से 10 घंटे तक कुर्सी पर बैठे रहना आम बात हो गई है। इससे शरीर में पॉश्चर संबंधी विकार, मांसपेशियों में जकड़न और मेटाबॉलिज्म की सुस्ती जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
'वाई-ब्रेक' यानी Yoga Break एक संरचित लघु योग सत्र है जिसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कार्यस्थल स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया है। इसमें योगासन, प्राणायाम और ध्यान का सरल संयोजन है जिसे कोई भी व्यक्ति बिना किसी पूर्व अनुभव के कर सकता है।
वाई-ब्रेक में कौन-कौन से अभ्यास शामिल हैं?
आयुष मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार 'वाई-ब्रेक' में निम्नलिखित अभ्यास शामिल हैं:
ताड़ासन (बैठे-बैठे शरीर को ऊपर की ओर खींचना) — इससे रीढ़ की हड्डी सीधी होती है और पीठदर्द में राहत मिलती है। कटिचक्रासन (कमर को धीरे-धीरे घुमाना) — इससे कमर की जकड़न खुलती है और पाचन बेहतर होता है।
ग्रीवा संचालन (गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग) — गर्दन को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाने से सर्वाइकल की समस्या में आराम मिलता है। इसके अलावा नाड़ी शोधन प्राणायाम और सरल ध्यान से मन को शांत किया जाता है और एकाग्रता बढ़ती है।
वाई-ब्रेक करने का सही तरीका
कुर्सी पर सीधे बैठें, पीठ को सीधा रखें और दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। पेट को धीरे-धीरे अंदर खींचें और फिर ढीला छोड़ें। गर्दन को आहिस्ता-आहिस्ता दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाएं।
पैरों को फर्श पर सपाट रखें और गहरी सांस लेते हुए पूरे शरीर को रिलैक्स करें। इन सरल अभ्यासों से रक्त संचार बेहतर होता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और मन में ताजगी आती है। आयुष मंत्रालय ने इसकी पूरी विधि और वीडियो अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराए हैं।
स्वास्थ्य और उत्पादकता पर असर
नियमित रूप से दिन में दो से तीन बार 'वाई-ब्रेक' लेने से कर्मचारियों की शारीरिक और मानसिक सेहत में उल्लेखनीय सुधार होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभ्यास तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है, जिससे चिंता और मानसिक थकान घटती है।
इसके अलावा, लगातार बैठे रहने से शरीर में जमा होने वाली अतिरिक्त चर्बी को भी नियंत्रित करने में 'वाई-ब्रेक' सहायक है। यह मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के खतरे को भी कम करता है।
व्यापक संदर्भ: क्यों है यह पहल अहम?
गौरतलब है कि भारत में कार्यस्थल तनाव की समस्या तेजी से विकराल रूप ले रही है। एसोचैम की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 42.5 प्रतिशत कॉर्पोरेट कर्मचारी अवसाद या चिंता से पीड़ित हैं। ऐसे में 'वाई-ब्रेक' जैसी पहल सिर्फ स्वास्थ्य का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उत्पादकता का भी सवाल है।
यह भी उल्लेखनीय है कि जापान, स्वीडन और नीदरलैंड जैसे देशों में कार्यस्थल पर माइक्रो-ब्रेक को कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया है, जिससे वहां कर्मचारियों की उत्पादकता और संतुष्टि दोनों बढ़ी हैं। भारत में 'वाई-ब्रेक' उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आयुष मंत्रालय का लक्ष्य है कि 2025 तक देश के प्रमुख सरकारी और निजी कार्यालयों में 'वाई-ब्रेक' को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए। आने वाले समय में इसे कॉर्पोरेट वेलनेस नीति के तहत व्यापक पैमाने पर लागू करने की योजना है।