अफगानिस्तान में बाढ़ का कहर: बारिश से दीवार गिरने से तीन महिलाओं की मौत
सारांश
Key Takeaways
- खोस्त प्रांत में दीवार गिरने से तीन महिलाओं की मृत्यु हुई।
- नंगरहार प्रांत में छत गिरने से कम से कम दस लोगों की मौत हुई।
- लगातार बारिश ने बुनियादी ढांचे को खतरे में डाल दिया है।
- जनजीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है, हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं।
- आपदा प्रबंधन की आवश्यकता को और मजबूत किया जाना चाहिए।
काबुल, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण एक दीवार गिरने से तीन महिलाओं की मृत्यु हो गई और दो बच्चे घायल हुए।
स्थानीय गवर्नर के प्रवक्ता मुस्तगफर गुरबाज ने बताया कि यह घटना सोमवार को खोस्त के मातून क्षेत्र के गिंगिनी गांव में घटी। हाल की बारिश के कारण दीवार कमजोर हो गई थी, जिससे यह गिर गई। घायल बच्चों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
इस बीच, नंगरहार प्रांत में भी भारी बारिश के कारण घरों की छतें गिरने से कम से कम दस व्यक्तियों की जान चली गई और छह लोग घायल हुए।
एरियाना न्यूज ने मंगलवार को सूचना दी कि जलालाबाद, शेरजाद, खोघ्यानी, हस्का मीना और अंगूर बाग में सबसे अधिक नुकसान हुआ।
अधिकारियों के अनुसार, अंगूर बाग में एक घर की छत गिरने से पांच लोगों की मृत्यु और दो लोग घायल हुए। शेरजाद जिले में भी एक महिला और दो बच्चों की छत गिरने से जान चली गई।
खोघ्यानी जिले में एक व्यक्ति की मौत हुई और दो लोग घायल हुए। वहीं, हस्का मीना में दो घरों की छत गिरने से एक बच्चे की मृत्यु और दो लोग घायल हो गए।
अधिकारियों ने कहा कि लगातार हो रही बारिश से घरों और बुनियादी ढांचे को खतरा बना हुआ है। खासकर गांवों और पहाड़ी इलाकों में जहां घर इस तरह के मौसम को सहन करने के लिए मजबूत नहीं होते।
सोमवार को अधिकारियों ने बताया कि पिछले 12 दिनों में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़, भूस्खलन, बिजली गिरने और घर गिरने की घटनाओं में कम से कम 110 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 160 लोग घायल हुए हैं। सात लोग अभी भी लापता हैं और आगे भी बारिश की संभावना से मौत का आंकड़ा बढ़ने का डर बना हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार, 958 घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं और 4,155 घरों को आंशिक क्षति पहुंची है। इससे हजारों परिवारों को तुरंत मदद और रहने के लिए स्थान की आवश्यकता है। 325 किमी से ज्यादा सड़कें भी खराब हो गई हैं और कारोबार, खेती, सिंचाई नहरें और पीने के पानी के स्रोतों को भी नुकसान पहुंचा है।