क्या अमेरिकी कोर्ट ने तीन भारतीयों को आईसीई की गिरफ्तारी से रिहा करने का आदेश दिया?

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क्या अमेरिकी कोर्ट ने तीन भारतीयों को आईसीई की गिरफ्तारी से रिहा करने का आदेश दिया?

सारांश

अमेरिकी कोर्ट ने तीन भारतीय नागरिकों को बिना उचित प्रक्रिया के हिरासत में लेने के मामले में रिहा कर दिया है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति के चलते आया है, जो प्रवासियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। क्या यह बदलाव प्रवासी समुदाय के लिए एक नई आशा लाएगा?

Key Takeaways

  • अमेरिकी कोर्ट ने तीन भारतीय नागरिकों को रिहा किया।
  • हिरासत प्रक्रिया में बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
  • प्रवासी समुदाय के लिए यह निर्णय एक नई उम्मीद का संकेत है।
  • इमिग्रेशन नीति में बड़े बदलाव हुए हैं।
  • कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया का महत्व बताया।

वॉशिंगटन, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के कैलिफोर्निया में फेडरल जजों ने प्रवासी अधिकारियों को तीन भारतीय नागरिकों को रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि इन प्रवासी भारतीयों को पहले अमेरिका में रहने की इजाजत दी गई थी और फिर बिना सुनवाई या उचित नोटिस के हिरासत में लिया गया।

इस हफ्ते, कैलिफोर्निया के पूर्वी और दक्षिणी जिले में अलग-अलग मामलों में कोर्ट ने ये फैसले सुनाए हैं। हर मामले में, कोर्ट ने पाया कि प्रवासी और कानून प्रवर्तन ने इन व्यक्तियों को दोबारा गिरफ्तार करने से पहले बुनियादी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

गौरतलब है कि अमेरिका में ट्रंप के वापस आने के बाद से इमिग्रेशन नीति में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे कानून कड़ा हो गया है। इसी के चलते अमेरिका में रह रहे प्रवासियों की गहन जांच की जा रही है।

कोर्ट द्वारा जिन तीन भारतीय नागरिकों के पक्ष में फैसला सुनाया गया है, उन्हें पहले इमिग्रेशन अधिकारियों ने रिहा किया था और बाद में फिर से हिरासत में लिया गया। पहले मामले में, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज ट्रॉय एल ननली ने 21 वर्षीय हरमीत एस को रिहा करने का आदेश दिया, जो अगस्त 2022 में अमेरिका गए थे।

कोर्ट के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि हरमीत को फेडरल चाइल्ड प्रोटेक्शन कानूनों के तहत नाबालिग होने पर रिहा किया गया था। उसका इमिग्रेशन केस अभी भी पेंडिंग है। बाद में उसने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा चलाए जा रहे एक अल्टरनेटिव-टू-डिटेंशन प्रोग्राम में एनरोल किया। कोर्ट ने कहा कि उसने सभी शर्तों का पालन किया और उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है।

इससे पहले हरमीत ने नवंबर 2025 में इन-पर्सन चेक-इन के लिए आईसीई के सामने पेश हुए थे। उन्हें बिना किसी एडवांस नोटिस के हिरासत में लिया गया था। वह बिना किसी बॉंड सुनवाई के एक महीने से ज्यादा समय तक हिरासत में रहे। इस पर जज ननली ने फैसला सुनाया कि हिरासत ने संभवतः 5वें संशोधन की प्रक्रिया ड्यू प्रोसेस क्लॉज का उल्लंघन किया है।

बता दें, अमेरिका में ड्यू प्रोसेस क्लॉज 14वें संविधान संशोधन की वह प्रक्रिया है जो सरकार को किसी भी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता या संपत्ति को कानून की उचित प्रक्रिया के बिना छीनने से रोकती है।

इसी के तहत कोर्ट ने हरमीत को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और इमिग्रेशन अधिकारियों को उसे दोबारा गिरफ्तार करने से रोक दिया। कोर्ट ने फिर से गिरफ्तारी के लिए शर्त रखी है कि वे पहले नोटिस या फिर सुनवाई करें। जज ने कहा कि भविष्य में किसी भी हिरासत के लिए यह सबूत चाहिए होगा कि हरमीत खतरा पैदा करता है या उसके भागने की संभावना है।

इसके अलावा, जज ननली ने अन्य मामले में सावन के. को रिहा करने का आदेश दिया है। सावन एक भारतीय नागरिक हैं और सितंबर 2024 में अमेरिका आए थे। कोर्ट के अनुसार, सावन को एंट्री के तुरंत बाद हिरासत में लिया गया था। सावन ने भारत में राजनीतिक उत्पीड़न का डर बताया, और जब आईसीई ने उन्हें रिहा किया, तब तक उनका असाइलम एप्लीकेशन पेंडिंग था।

अपनी रिहाई के दौरान, सावन आईसीई चेक-इन के लिए पेश हुए। इसके बावजूद, उसे सितंबर 2025 में एक रूटीन अपॉइंटमेंट के दौरान फिर से हिरासत में लिया गया। कोर्ट ने कहा कि सावन को बिना वारंट या सुनवाई के करीब चार महीने तक हिरासत में रखा गया।

तीसरे मामले में, दक्षिणी कैलिफोर्निया में, अमेरिकी जिला जज जेनिस एल. सैममार्टिनो ने इंपीरियल रीजनल डिटेंशन सेंटर में डिटेन किए गए भारतीय नागरिक अमित के लिए हेबियस कॉर्पस की रिट दी।

कोर्ट के अनुसार, अमित सितंबर 2022 में अमेरिका आए थे। उन्हें कुछ समय के लिए डिटेन किया गया और फिर कॉग्निजेंस के ऑर्डर पर रिहा कर दिया गया। रिहा होने के बाद, अमित को नौकरी मिल गई और उन्होंने असाइलम के लिए अप्लाई किया। फाइलिंग के मुताबिक, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। सितंबर 2025 में, अमित को उनके घर के बाहर तब गिरफ्तार किया गया जब वह काम पर जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे।

Point of View

NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या अमेरिकी कोर्ट ने वास्तव में तीन भारतीयों को रिहा करने का आदेश दिया?
हाँ, अमेरिकी कोर्ट ने तीन भारतीय नागरिकों को बिना उचित प्रक्रिया के हिरासत में लिए जाने के बाद रिहा करने का आदेश दिया है।
ये भारतीय नागरिक किस कारण से हिरासत में लिए गए थे?
इन नागरिकों को पहले अमेरिका में रहने की इजाजत दी गई थी, लेकिन बाद में उन्हें बिना सुनवाई के हिरासत में लिया गया।
अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में क्या बदलाव आए हैं?
ट्रंप प्रशासन के तहत इमिग्रेशन नीति में कई बड़े बदलाव हुए हैं, जिससे प्रवासियों की गिरफ्तारी प्रक्रियाएँ कड़ी हो गई हैं।
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