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क्या बलूचिस्तान में हाल ही में सात लोग जबरन गायब हुए हैं?

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क्या बलूचिस्तान में हाल ही में सात लोग जबरन गायब हुए हैं?

सारांश

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हाल के दिनों में सात लोगों के जबरन गायब होने की घटनाएं सामने आई हैं। सुरक्षा बलों द्वारा की गई इन कार्रवाईयों पर विवाद बढ़ता जा रहा है। क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है? जानें इस मुद्दे की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

बलूचिस्तान में सात लोग जबरन गायब हुए हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने सरकार के दावों को खारिज किया है।
परिजनों को अभी भी अपने लापता प्रियजनों का कोई पता नहीं है।

क्वेटा, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हाल ही में कम से कम सात लोगों के जबरन गायब होने की घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 15 जनवरी को तुर्बत में एक स्थानीय अस्पताल के बाहर से मेहरान बलूच नामक एक युवा नर्सिंग छात्र को हिरासत में लिया। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मेहरान बलूच बल-निगोर क्षेत्र का निवासी है।

परिजनों का कहना है कि मेहरान को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और उसकी हिरासत के कारणों के बारे में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

खारान में रहने वालों ने बताया कि पिछले सप्ताह हुए एक सशस्त्र हमले के बाद पाकिस्तानी बलों ने घेराबंदी और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं। इस दौरान बलूच आबाद इलाके में छापेमारी के दौरान ओवैस अहमद क़म्बरानी को उसके वाहन सहित हिरासत में लिया गया। उसके परिवार ने बताया कि अब तक उसकी लोकेशन के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खारान में चलाए गए अभियानों के दौरान तीन युवकों- मुनीब सियापद, मख़फर आबिद सियापद और अहमद सियापद को भी कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया।

इसके अलावा, क्वेटा से भी दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पाकिस्तानी बलों ने किली क़म्बरानी इलाके में घरों पर छापेमारी कर अब्दुल क़ह़ार और मुसव्विर क़म्बरानी को उठा लिया। उनके परिवारों का कहना है कि इसके बाद से दोनों लापता हैं।

हालांकि, पहले से लापता पांच लोग हाल ही में अपने घर लौट आए हैं। द बलूचिस्तान पोस्ट ने यह जानकारी परिजनों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से दी है।

इस बीच, एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने मंगलवार को बलूचिस्तान प्रांतीय सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि लापता लोगों का मुद्दा “स्थायी रूप से सुलझा लिया गया है।” संगठन ने इस बयान को “झूठा और जमीनी हकीकत के विपरीत” बताया।

ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) के अनुसार, मंगलवार को हुई प्रांतीय कैबिनेट बैठक के बाद जारी बयान, जिसमें लापता लोगों का मुद्दा सुलझने का दावा किया गया, तथ्यों की गंभीर गलत प्रस्तुति है, क्योंकि परिवार अब भी अपने गायब परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं।

एचआरसीबी की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में जबरन गुमशुदगी के 1,455 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 1,443 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं। इनमें से 1,052 लोग अब भी लापता हैं, 317 को रिहा किया गया, 83 लोगों की हिरासत में मौत हो गई, जबकि 3 को जेल भेजा गया.

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि ये आंकड़े अवैध हिरासत के जारी पैमाने को दर्शाते हैं और यह स्पष्ट करते हैं कि तथाकथित “समाधान” का दावा पूरी तरह गलत है।

एचआरसीबी ने कहा, “बलूचिस्तान में सैकड़ों लोग अब भी जबरन गुमशुदगी का शिकार हैं। कई परिवार अदालतों, आयोगों और मानवाधिकार संगठनों का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन उनके प्रियजनों का अब तक कोई पता नहीं चला है।”

संगठन ने दोहराया कि बलूच नागरिकों को बिना कानूनी प्रक्रिया, वारंट या वैध गिरफ्तारी के अवैध रूप से उठाया गया और उन्हें कभी भी किसी अदालत के सामने पेश नहीं किया गया, जो पाकिस्तान के संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का स्पष्ट उल्लंघन है।

एचआरसीबी ने कहा, “जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक गंभीर अपराध है, न कि कोई राजनीतिक नारा या प्रचार। इसे ‘प्रोपेगैंडा’ बताना पीड़ित परिवारों के लिए गहरी अपमानजनक बात है और वर्षों से मौजूद दस्तावेजी साक्ष्यों को खारिज करने जैसा है।”

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पूरे देश के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। हमें ऐसे मामलों में जांच और पारदर्शिता की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामले बढ़ रहे हैं?
जी हां, हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिनमें कई लोग अभी भी लापता हैं।
मानवाधिकार संगठनों की इस पर प्रतिक्रिया क्या है?
मानवाधिकार संगठन इस स्थिति को गंभीरता से ले रहे हैं और सरकार के दावों को खारिज कर रहे हैं।
क्या सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई की है?
सरकार ने कुछ मामलों में कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन कई परिवारों का अभी भी अपने लापता परिजनों का कोई पता नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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