क्या बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस पर 17 कत्लों का सच जानना जरूरी है?

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क्या बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस पर 17 कत्लों का सच जानना जरूरी है?

सारांश

बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस पर 17 कत्लों की कहानी। जानिए कैसे 1975 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की आवाज को कुचला गया। यह एक ऐसी सुबह थी जब अपनों ने ही अपने ही को मार डाला। क्या यह घटना आज भी बांग्लादेश की पहचान को प्रभावित कर रही है?

मुख्य बातें

बांग्लादेश का स्वतंत्रता संघर्ष बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान का बलिदान राष्ट्रीय शोक दिवस का महत्व अपनों द्वारा धोखा राजनीतिक स्थिरता की आवश्यकता

नई दिल्ली, 13 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। जिस स्थान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता का ऐलान किया गया, वहीं एक दिन खामोशी के साथ उस आजादी की आवाज को कुचला गया। 1975 के 15 अगस्त के उस दुखद दिन की शुरुआत, जब मस्जिदों से अजान की आवाज गूंज रही थी, शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ढाका की राजधानी उस दिन इतिहास के सबसे खौफनाक अध्याय में प्रवेश करने जा रही है। धानमंडी के 32 नंबर मकान में सब कुछ पहले की तरह शांत था, लेकिन कुछ ही पलों में वहां का हर कमरा, हर दीवार और हर कोना गोलियों की तड़तड़ाहट और खून के छीटों से भर गया।

यह घर किसी आम नागरिक का नहीं था, बल्कि यह बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान का निवास स्थान था। हालाँकि, 1975 की वह सुबह इस घर के इतिहास में सबसे काली सुबह बन गई। बंगबंधु का यह घर बांग्लादेश के संघर्ष, आंदोलन और स्वतंत्रता का गवाह रहा था। उन्होंने 1949 में अवामी लीग की स्थापना की और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के लिए राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई शुरू की। 1970 के आम चुनावों में अवामी लीग को पूर्ण बहुमत मिला, लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान ने सत्ता हस्तांतरित नहीं की। इसके बाद 1971 की मुक्ति संग्राम की लड़ाई शुरू हुई, जिसमें भारत की मदद से पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश ने स्वतंत्रता पाई।

जनवरी 1972 में बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान देश के पहले प्रधानमंत्री बने। लेकिन 1975 तक आते-आते राजनीतिक अस्थिरता, प्रशासनिक चुनौतियों और असंतोष के कारण हालात बिगड़ने लगे। उसी साल जनवरी में उन्होंने राष्ट्रपति पद संभाला। इसके बावजूद, बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान किसी शाही महल में नहीं रहते थे। उनका साधारण दो मंजिला घर था, जैसे अन्य आम मध्यमवर्गीय बंगाली परिवार का होता था। लेकिन राष्ट्रपति पद संभालने के केवल 7 महीने बाद ही उन्हें अपने ही लोगों द्वारा धोखा दिया गया।

बांग्लादेश आवामी लीग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बंगबंधु अक्सर कहा करते थे, "मेरी ताकत यह है कि मैं इंसानों से प्यार करता हूं। मेरी कमजोरी यह है कि मैं उन्हें बहुत ज्यादा प्यार करता हूं।"

शेख हसीना ने 'अखबार ढाका टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में बताया, "मेरे पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान देशवासियों पर विश्वास करते थे। यह कभी नहीं सोचा कि कोई बंगाली उन्हें गोली मारेगा। वे इसी विश्वास के साथ जीते थे कि कोई बंगाली उन्हें कभी भी मारने या किसी तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करेगा।"

31 अगस्त 2022 को 15 अगस्त 1975 के नरसंहार के बारे में शेख हसीना ने अपनी बातों को एक सभा के दौरान दोहराया था और कहा, "उनके पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान कभी यह विश्वास नहीं कर सकते थे कि कोई बंगाली उनकी हत्या कर सकता है।"

हालांकि, सैन्य तख्तापलट के दौरान सिर्फ बंगबंधु ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के 17 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। उनकी बेटी शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना उस समय जर्मनी में थीं, इसीलिए दोनों बच गईं।

कोई युद्ध नहीं छिड़ा था। कोई विदेशी हमला नहीं हुआ था। ये सब तो बंगबंधु के अपने लोग थे। वही लोग, जिनके लिए बंगबंधु ने जेल की यातनाएं सही थीं और जिनकी आजादी के लिए उन्होंने अपना जीवन लगाया था।

बांग्लादेश आवामी लीग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश पत्रकार साइरिल डन ने बंगबंधु के बारे में लिखा था, "उनका शारीरिक कद बहुत ऊंचा था। उनकी आवाज गरजती हुई बिजली जैसी थी। उनका करिश्मा लोगों पर जादू कर देता था। उनका साहस और आकर्षण उन्हें इस युग का एक अनोखा महापुरुष बनाता था।"

2004 के एक बीबीसी सर्वेक्षण में, बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को सर्वकालिक महानतम बंगाली चुना गया था।

हालांकि, जहां भारत हर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं बांग्लादेश में शोक का माहौल होता है, क्योंकि उस देश में यह दिन राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अपने ही लोगों से भी होती है। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान का बलिदान हमें यह सिखाता है कि हमें अपनी पहचान और इतिहास को सहेज कर रखना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस क्यों मनाया जाता है?
बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है, जब 1975 में बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या की गई थी।
इस दिन का महत्व क्या है?
यह दिन बांग्लादेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना को दर्शाता है, जिसमें स्वतंत्रता के संघर्ष में अपने ही लोगों द्वारा धोखा दिया गया।
क्या बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान का योगदान महत्वपूर्ण है?
बंगबंधु ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस