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क्या बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के बीच छात्रों और पत्रकारों ने मदद की गुहार लगाई?

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क्या बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के बीच छात्रों और पत्रकारों ने मदद की गुहार लगाई?

सारांश

बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के कारण छात्रों और पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। बीएसएल ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे 2026 के आम चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने में मदद करें। क्या बांग्लादेश का लोकतंत्र संकट में है?

मुख्य बातें

बांग्लादेश में हिंसा बढ़ी है।
छात्रों और पत्रकारों ने सुरक्षा की गुहार लगाई है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की गई है।
प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा है।
संविधानिक शासन की जगह भीड़तंत्र का शासन है।

ढाका, 22 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के कारण छात्र और पत्रकार अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। अवामी लीग पार्टी की छात्र शाखा, बांग्लादेश स्टूडेंट्स लीग (बीएसएल) ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध किया है कि वे बांग्लादेश में 12 फरवरी, 2026 को प्रस्तावित आम चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सभी के लिए समावेशी बनाने में सहायता करें। इसके साथ ही, संपादकों और पत्रकारों ने प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा की अपील की है।

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए, छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि गैरकानूनी और गैर-संवैधानिक फासीवादी शासन द्वारा लागू किए गए भीड़तंत्र के कारण, बांग्लादेश तेजी से अव्यवस्था और अराजकता की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही, चरमपंथ और कानून-व्यवस्था में गिरावट भी देखी जा रही है।

बीएसएल ने एक बयान में कहा, "हाल के दिनों में, बांग्लादेश में भीड़ की हिंसा, आगजनी, सामूहिक हमले, जबरन गायब करने और बेरहमी से हत्या की घटनाएं बढ़ गई हैं। ये घटनाएं सोचे-समझे अभियान का हिस्सा हैं, जिसने प्रधानमंत्री शेख हसीना और अवामी लीग की लोकतांत्रिक सरकार को गिरा दिया।"

छात्र संगठन ने कहा कि हसीना की अगुवाई वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद, संवैधानिक शासन की जगह भीड़तंत्र का शासन आ गया है, जिसमें सुनियोजित हिंसा, डर और सजा से छूट शामिल है।

बीएसएल ने कहा, "मीडिया संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों, अल्पसंख्यक समुदायों और राजनीतिक दलों पर किए गए हमले यह दर्शाते हैं कि बांग्लादेश में अब कानून का शासन नहीं रह गया है। देश को जानबूझकर प्रबंधित अराजकता और तानाशाही राज की ओर ले जाया जा रहा है।"

पिछले दिनों बांग्लादेश के प्रमुख अखबारों, प्रोथोम एलो और द डेली स्टार के कार्यालयों पर आगजनी की घटनाओं की निंदा करते हुए, बीएसएल ने कहा, "यह प्रेस की आज़ादी पर सीधा फासीवादी हमला है। खासकर द डेली स्टार की इमारत को जलाने की कोशिश बहुत गंभीर थी; जबकि स्टाफ के सदस्य अंदर फंसे हुए थे, यह हत्या की कोशिश जैसा था।"

छात्र संगठन ने कहा कि सबसे भयानक अपराध मैमनसिंह जिले में हुआ, जहां एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को झूठे ईशनिंदा के आरोप में पेड़ से बांधकर पीट-पीटकर मार डाला गया और उसका शव जला दिया गया। यह घटना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।"

इसके अलावा, बीएसएल ने चटगांव, राजशाही और खुलना में भारतीय कूटनीतिक मिशनों पर बार-बार होने वाले हमलों पर चिंता व्यक्त की।

दूसरी ओर, संपादकों और पत्रकारों ने बीएनपी से अपील की है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो प्रेस की पूरी आज़ादी और क्रिटिकल जर्नलिज्म की गारंटी दी जाए।

बीएनपी की तरफ से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें पार्टी के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान की 18 साल बाद देश वापसी को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान द डेली स्टार के संपादक महफूज अनम ने कहा कि बांग्लादेश के 53 साल के इतिहास में किसी भी मीडिया आउटलेट ने हाल के हमलों जैसे आगजनी का सामना नहीं किया।

महफूज अनम ने कहा, "हमें आलोचना करने की आजादी चाहिए। हमारी 53 साल की राजनीति से एक बड़ा सबक यह है कि किसी भी सरकार ने क्रिटिकल जर्नलिज्म को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है।"

इसके अलावा, प्रोथोम अलो के संपादक मतिउर रहमान ने अवामी लीग के 16 साल के राज को मीडिया के लिए कठिन समय बताया। उन्होंने कहा कि बीएनपी का सत्ता में पिछला समय मीडिया के लिए अधिक आरामदायक था।

एडिटर ने कहा, "बीएनपी अब सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है और प्रेस की आजादी की रक्षा करने की जिम्मेदारी उसी की है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

मेरा मानना है कि बांग्लादेश में स्थिति गंभीर है। छात्रों और पत्रकारों की सुरक्षा की मांग महत्वपूर्ण है। हमें सच्चाई और प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करना चाहिए। यह केवल बांग्लादेश का ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुद्दा है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में हिंसा का मुख्य कारण क्या है?
बांग्लादेश में हिंसा का मुख्य कारण राजनीतिक अस्थिरता और फासीवादी शासन का बढ़ता प्रभाव है।
छात्रों और पत्रकारों ने क्या अपील की है?
छात्रों और पत्रकारों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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